गरियाबंद के जंगल में मादा लंगूरों का शिकार उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दो मादा लंगूरों के शिकार के मामले में 3 आरोपी गिरफ्तार,13.8 किलो मांस, हथियार और बाइक जब्त, 4 आरोपी फरार पढ़े पूरी ख़बर पैरी टाईम्स पर।
गरियाबंद छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में वन्यजीवों के अवैध शिकार का गंभीर मामला सामने आया है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के तौरेंगा बफर क्षेत्र में वन विभाग की टीम ने दो मादा सामान्य लंगूरों के शिकार के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से वन्यप्राणी का 13 किलो 8 सौ ग्राम कच्चा मांस, शिकार में इस्तेमाल किए गए हथियार और एक मोटरसाइकिल जब्त की गई है। मामले में चार अन्य सह-आरोपी फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में विभाग जुटा हुआ है।

गरियाबंद के जंगल में मादा लंगूरों का शिकार,आरक्षित वन क्षेत्र में घुसकर किया शिकार
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने गरियाबंद जिले के गाजीमुड़ा सर्कल अंतर्गत वन परिसर गरीबा के आरक्षित वन क्षेत्र कक्ष क्रमांक 1200 में अवैध रूप से प्रवेश कर अनुसूची-2 में शामिल सामान्य लंगूर की दो मादा का शिकार किया। वन्यजीवों के संरक्षण के लिहाज से यह मामला गंभीर माना जा रहा है।
कार्रवाई के दौरान वन विभाग की टीम ने आरोपियों के पास से एक कुल्हाड़ी, चार छुरी, एक पंसुल, चार पीले थैले और एक मोटरसाइकिल (क्रमांक CG04 MF 3970) जब्त की। इसके साथ ही लंगूर का 13.800 किलोग्राम कच्चा मांस भी बरामद किया गया।
ओडिशा के नबरंगपुर जिले के रहने वाले हैं आरोपी
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान भूसा पिता लालधर (50 वर्ष), बनमाली सांता पिता सुकिया सांता (51 वर्ष) और सोलन्दर पिता रतुन सांता (26 वर्ष) के रूप में हुई है। विभागीय जानकारी के मुताबिक, तीनों आरोपी ग्राम कबाटपानी, पोस्ट गोना, थाना रायघर, तहसील रायघर, जिला नबरंगपुर, ओडिशा के निवासी हैं।
वन विभाग ने इस मामले में वन अपराध पीओआर क्रमांक 23/19, दिनांक 26 अक्टूबर 2026 को दर्ज किया है। आरोपियों के खिलाफ वन्यप्राणी (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 9, 27, 29, 31, 32, 39, 49, 50, 51 और 52 के तहत कार्रवाई की गई है।
न्यायालय के आदेश पर जेल दाखिल, चार अन्य की तलाश
गिरफ्तार आरोपियों को गरियाबंद स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी न्यायालय में पेश किया गया। विभागीय जानकारी के अनुसार, न्यायालयीन वारंट के तहत उन्हें 5 नवंबर 2026 तक रिमांड पर जिला जेल गरियाबंद में दाखिल कराया गया है। मामले में चार अन्य सह-आरोपी फरार हैं, जिनकी पतासाजी की जा रही है।
वन विभाग और ओडिशा पुलिस की संयुक्त भूमिका
यह कार्रवाई प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) ओ.पी. यादव, मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) गुरूनाथन और उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरुण जैन के निर्देशन में की गई। सहायक संचालक तौरेंगा जे.पी. दर्रो के मार्गदर्शन में तौरेंगा बफर वन परिक्षेत्र की टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया।
कार्रवाई में वनक्षेत्रपाल केजुराम कोरचे, उपवनक्षेत्रपाल गौरीशंकर भोई, वनरक्षक पुरुषोत्तम, वन चौकीदार उदेराम यादव और ओडिशा पुलिस बल का विशेष सहयोग रहा। वन्यजीवों का अवैध शिकार केवल वन कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि जंगल के प्राकृतिक संतुलन के लिए भी चिंता का विषय है। अब मामले में फरार चार आरोपियों की गिरफ्तारी और शिकार के पूरे नेटवर्क की जांच पर नजर रहेगी।