गरियाबंद शिक्षा व्यवस्था,आसमान से आफत बरसी, फिर भी सड़क पर उतरे बच्चे,ठेमली पथर्री में शिक्षा की गुहार, जिम्मेदार अफसरों की चुप्पी पर सवाल ?

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By Sangani

गरियाबंद शिक्षा व्यवस्था मैनपुर में ठेमली पथर्री के बच्चे और ग्रामीण शिक्षा संबंधी मांगों को लेकर बारिश और आंधी के बीच SDM व BEO कार्यालय की ओर पदयात्रा कर रहे हैं पढ़े पूरी ख़बर पैरी टाईम्स पर।

गरियाबंद सरकारी योजनाओं की फाइलों में विकास कितनी तेजी से दौड़ता है और जमीन पर उसकी रफ्तार कितनी सुस्त हो सकती है, इसकी तस्वीर गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड के ग्राम ठेमली में सामने आई है। यहां स्कूल का अतिरिक्त कक्ष भवन पूरा कराने के लिए ग्रामीणों को मुख्यमंत्री तक गुहार लगानी पड़ रही है। हालात ऐसे बने कि सैकड़ों ग्रामीण और स्कूली बच्चे झमाझम बारिश के बीच छाता लेकर पदयात्रा पर निकल पड़े। अब सवाल है कि जब बच्चों की पढ़ाई से जुड़ा भवन वर्षों में पूरा नहीं हो पाया, तो आखिर जिम्मेदारी किसकी है?

गरियाबंद शिक्षा व्यवस्था

गरियाबंद शिक्षा व्यवस्था 8.32 लाख रुपये स्वीकृत, लेकिन भवन की हालत पर सवाल

ग्रामीणों द्वारा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को सौंपे गए आवेदन के अनुसार, ठेमली आदिवासी बहुल गांव है, जिसकी आबादी करीब 350 बताई गई है। गांव मैनपुर विकासखंड मुख्यालय से लगभग 13 किलोमीटर दूर स्थित है। आवेदन में बताया गया है कि यहां शासकीय प्राथमिक शाला कई वर्षों से एक ही कमरे में पांच कक्षाओं के संचालन के कारण बच्चों और शिक्षकों के लिए परेशानी का सामना कर रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को अधिकारियों के संज्ञान में लाने के बाद वर्ष 2022-23 में मुख्यमंत्री जतन योजना के तहत प्राथमिक शाला के अतिरिक्त भवन के लिए 8.32 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई थी। आवेदन के मुताबिक, भवन का बाहरी निर्माण तो कर दिया गया, लेकिन अंदर टाइल्स, बिजली और पुताई जैसे जरूरी काम अधूरे हैं। ग्रामीणों ने भवन की स्थिति को खंडहर जैसी बताते हुए कहा है कि करीब चार वर्ष बीतने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ।

पढ़ाई एक कमरे में, समाधान सरकारी दफ्तरों में

बच्चों की पढ़ाई के लिए अतिरिक्त कक्ष की जरूरत थी, लेकिन ग्रामीणों के आवेदन के अनुसार भवन अब तक पूरी तरह तैयार नहीं हो सका। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि स्वीकृत राशि से हुए निर्माण की गुणवत्ता की जांच किसने की? काम पूरा होने का सत्यापन किस आधार पर हुआ? और यदि भवन में जरूरी सुविधाएं अधूरी हैं, तो जिम्मेदार विभाग ने अब तक क्या कार्रवाई की?

व्यंग्य यह है कि बच्चों के भविष्य के लिए भवन बनाने की योजना तो बनी, राशि भी स्वीकृत हुई, लेकिन ग्रामीणों को अब अपनी मांग मनवाने के लिए बारिश में सड़क पर उतरना पड़ रहा है। कागजों में स्वीकृत भवन और जमीन पर अधूरे काम के बीच आखिर बच्चों की पढ़ाई कहां खड़ी है?

बारिश में पदयात्रा, मुख्यमंत्री से लेकर अधिकारियों तक गुहार

28 अक्टूबर 2026 को ग्रामीणों और स्कूली बच्चों ने बारिश और खराब मौसम के बीच पदयात्रा निकाली। हाथों में बैनर लेकर वे मैनपुर स्थित एसडीएम और खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर बढ़े। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को संबोधित आवेदन में मांग की है कि मुख्यमंत्री जतन योजना के तहत बन रहे अतिरिक्त भवन को पूर्ण कराया जाए। आवेदन की प्रतिलिपि कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी और विकासखंड शिक्षा अधिकारी को भी भेजने का उल्लेख है।

भवन पूरा होने तक ग्रामीण करेंगे बहिष्कार

ग्रामीणों ने आवेदन में यहां तक कहा है कि भवन पूरा होने तक वे स्कूल बहिष्कार का निर्णय लेने को मजबूर हुए हैं। यह मांग अब प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती है, क्योंकि इसका सीधा संबंध बच्चों की पढ़ाई से है।

अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी भवन की वास्तविक स्थिति की जांच कराते हैं या ग्रामीणों की यह पदयात्रा भी आश्वासनों के रास्ते लौट जाएगी। बच्चों को भाषण नहीं, पढ़ने के लिए सुरक्षित कमरा चाहिए। सवाल सीधा है जब 8.32 लाख रुपये स्वीकृत हुए, तो चार साल बाद भी बच्चों को पूरा भवन क्यों नहीं मिला?

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