संपादक पैरी टाईम्स 24×7 डेस्क गरियाबंद
8 बजे से चक्का जाम शुरू जब सिस्टम सो जाए तो जनता को सड़क पर सोना पड़ता है देखिए साहेबिनकछार में 8 बजे कैसे खुला विकास की फाइलों का पोल खोल कच्चा चिट्ठा पैरी टाईम्स पर ।
गरियाबंद इस कड़कड़ाती ठंड में जब आप रजाई में दुबके हुए है और चाय का इंतजार कर रहे है तब कुछ ऐसे भी लोग है जो अपने हक की मूलभूत जरूरतों के लिए इस हाड़ मांस को कपा देने वाली ठंड सिस्टम को जगाने सड़क पर बैठे है ……स्वागत है आपका आधुनिक भारत के उस हिस्से में जहाँ विकास इतना तेज भागा कि साहेबिनकछार की 25 किलोमीटर की सड़क ही पीछे छूट गई आज सुबह 8 बजे से बम्हनीझोला में ग्रामीणों ने चक्का जाम करके प्रशासन को यह बताने की कोशिश की है कि सड़क पर गड्ढे नहीं गड्ढों में सड़क ढूंढना अब नामुमकिन हो गया है NH130C पर गाड़ियों के पहिए ऐसे थमे हैं जैसे सरकारी दफ्तरों में जनता की फाइलें थमती हैं

8 बजे से चक्का जाम शुरू वो भी अपने हक की मूलभूत मांगों के लिए ?
ग्रामीणों का कसूर सिर्फ इतना है कि वे उस कन्या शाला और छात्रावास को ढूंढ रहे हैं जिसे प्रशासन ने जादू की छड़ी घुमाकर इंदागांव शिफ्ट कर दिया है शायद अधिकारियों को लगा होगा कि बेटियां पैदल चलकर ज्यादा फिट रहेंगी वहीं स्कूल जतन योजना के अधूरे भवन चिल्ला चिल्ला कर कह रहे हैं कि साहब हमें पूरा कर दो वरना हम ऐतिहासिक खंडहर घोषित हो जाएंगे सबसे मजेदार बात तो उस गायब शिक्षक की है जो नियुक्ति के बाद से ही मिस्टर इंडिया बने हुए हैं और विभाग उन्हें ढूंढने के बजाय शायद मेडल देने की तैयारी में है
टावर है मगर नेटवर्क नहीं,स्वास्थ्य केंद्र है मगर बिजली पानी नहीं
जियो टावर भी गांव में किसी शोपीस की तरह खड़ा मुस्कुरा रहा है और कह रहा है कि टावर तो लग गया अब नेटवर्क के लिए क्या जान लोगे उधर स्वास्थ्य केंद्र में बिजली और पानी का न होना इस बात का सबूत है कि प्रशासन चाहता है कि ग्रामीण बीमार ही न पड़ें क्योंकि वहाँ इलाज कम और तपस्या ज्यादा होती है फिलहाल चक्का जाम जारी है और ग्रामीण इस उम्मीद में सड़क पर बैठे हैं कि शायद गाड़ियों के हॉर्न की आवाज से कुंभकर्णी नींद में सोए सिस्टम के कान के पर्दे फटने शुरू होंगे
क्यों सुलग रहा है साहेबिनकछार? ये हैं वो 8 सुलगते सवाल:
प्रशासन की फाइलें भले ही विकास के दावे करती हों, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। ग्रामीणों ने अपनी 8 सूत्रीय मांगों का जो कच्चा चिट्ठा खोला है, उसने अधिकारियों की नींद उड़ा दी है
- सड़क नहीं तो चैन नहीं बम्हनीझोला से ओडिशा सीमा तक की 25 किमी की जर्जर सड़क अब ग्रामीणों के सब्र का इम्तिहान ले रही है। मांग है कि पक्की सड़क का निर्माण अतिशीघ्र शुरू हो।
- बेटियों की शिक्षा पर डाका ? इंदागांव स्थानांतरित किए गए आदिवासी कन्या छात्रावास और कन्या शाला को वापस मूल स्थान पर लाने की मांग ने भावनात्मक मोड़ ले लिया है।
- अंधेरे में भविष्य आजादी के इतने सालों बाद भी कई गांव विद्युत विहीन हैं। बिजली के बिना विकास की कल्पना बेमानी है।
- अधूरे स्कूल, टूटे सपने मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के तहत करलाझर, नागेश और कोदोमाली में बन रहे अधूरे भवनों ने बच्चों के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है।
- गायब शिक्षक का रहस्य माध्यमिक शाला साहेबिनकछार में नियुक्त शिक्षक आज तक स्कूल क्यों नहीं पहुंचे? ग्रामीण इस अनुपस्थित नियुक्ति का जवाब चाहते हैं।
- शोपीस बना जियो टावर डिजिटल इंडिया के दौर में साहेबिनकछार का जियो टावर सिर्फ लोहे का ढांचा बना खड़ा है। इसे तुरंत चालू करने की मांग उठी है।
- स्वास्थ्य केंद्र में प्यास और अंधेरा उप-स्वास्थ्य केंद्र करलाझार में न बिजली है, न पानी। सवाल यह है कि मरीज यहां इलाज कराने आएं या बीमार होने?
- नल-जल योजना का दम फूला अधूरी पड़ी नल-जल योजना को पुनर्जीवित करने की मांग ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर मुहर लगा दी है।
इस बार मांग के लिए आश्वासन नहीं साफ नीयत का इंतजार
इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ स्वीकार करना होगा कि जब सेवक अपनी जिम्मेदारी भूलकर फाइलों में खो जाते हैं तब चक्का जाम ही एकमात्र रास्ता बचता है प्रशासन को यह मान लेना चाहिए कि धूल खाती नल जल योजना और बिजली विहीन गांव अब केवल वादों से नहीं बल्कि काम से संतुष्ट होंगे यह प्रदर्शन इस बात का जीता जागता सबूत है कि विकास केवल कागजों पर चमकदार दिखता है लेकिन धरातल पर आज भी जनता अपनी बुनियादी सुविधाओं के लिए सूरज की पहली किरण के साथ सड़क पर बैठने को मजबूर है अब देखना यह है कि यह चक्का जाम साहबों की कुर्सी हिला पाता है या एक और आश्वासन की भेंट चढ़ जाता है
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