प्राचार्या पदस्थापना मामला क्योंकि…जिद के आगे डर है,गरियाबंद में रसूख के आगे नतमस्तक हुआ शिक्षा विभाग, विवादित प्राचार्य की उसी स्कूल में दोबारा एंट्री

Sangani

By Sangani

संपादक पैरी टाईम्स 24×7 डेस्क गरियाबंद

प्राचार्या पदस्थापना मामला गरियाबंद आत्मानंद स्कूल में विवादित प्राचार्य वंदना पांडे की बहाली पर शिक्षकों और छात्रों का भारी विरोध,नियमों को ताक पर रखकर पुनः पुरानी जगह पर दे दी गई पदस्थापना होना था बिन्द्रानवागढ़ कर दिया गरियाबंद पढ़े पूरा मामला पैरी टाईम्स पर।

गरियाबंद शिक्षा विभाग में इन दिनों एक नया चमत्कार चर्चा का विषय बना हुआ है। यह चमत्कार किसी लैब में नहीं, बल्कि गरियाबंद के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय में हुआ है। यहाँ नियमों की ऐसी आरती उतारी गई है कि खुद नियम बनाने वाले भी सिर खुजला रहे होंगे। मामला है एक ऐसी प्राचार्य की बहाली का, जिनके खौफ से शिक्षक और छात्र दोनों ही त्रस्त हैं, लेकिन विभाग है कि नतमस्तक होकर उनके स्वागत में रेड कार्पेट बिछाए बैठा है।

प्राचार्या पदस्थापना मामला

प्राचार्या पदस्थापना मामला निलंबन का इनाम और कायदों का कत्लेआम

कहानी शुरू होती है 17 अक्टूबर 2025 को, जब शासन ने भारी भरकम जांच के बाद प्राचार्य श्रीमती वंदना पांडे को निलंबित किया था जांच में पाया गया था कि स्कूल में पढ़ाई का स्तर पाताल छू रहा था और प्रयोगशालाएँ सिर्फ कागजों पर सज रही थीं। छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 की दुहाई देकर उन्हें घर बैठाया गया था। लेकिन, 4 फरवरी को गरियाबंद जिला शिक्षा अधिकारी ने एक ऐसा आदेश निकाला, जिसने लोकतंत्र के सिस्टम को ही चुनौती दे दी।

​लोक शिक्षण संचालनालय का साफ आदेश है कि यदि कोई निलंबित कर्मचारी बहाल होता है, तो उसे शिक्षक विहीन या एकल शिक्षकीय विद्यालय में भेजा जाए। नियम यह भी कहता है कि जिस स्कूल से निलंबन हुआ, वहां दोबारा पोस्टिंग नहीं होगी। लेकिन यहाँ तो गंगा ही उल्टी बह गई,मैडम को वापस उसी स्कूल की चाबी सौंप दी गई, जहाँ से उन्हें निकाला गया था।

देख लेने की धमकी और खौफजदा शिक्षक

​स्कूल के 28 शिक्षकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर (क्योंकि मैडम वापस जो आ गई हैं) जिला शिक्षा अधिकारी को एक शिकायती पत्र सौंपा है। इस पत्र में शिक्षकों का दर्द छलका है। उन्होंने बताया कि निलंबन के दौरान भी मैडम चुप नहीं बैठी थीं; वे लगातार शिक्षकों को देख लेने की धमकी दे रही थीं। शिक्षकों का कहना है कि वे पिछले कई समय से मानसिक प्रताड़ना झेल रहे हैं।

​शिक्षक अब इस बात से डरे हुए हैं कि अगर मैडम फिर से प्राचार्य की कुर्सी पर बैठ गईं, तो उनकी प्रताड़ना का लेवल प्रो हो जाएगा। शिक्षकों ने साफ लफ्जों में कहा है कि वे ऐसी कार्यशैली के नीचे काम नहीं कर सकते जहाँ हर दिन सम्मान की बलि दी जाती हो।

छात्रों ने भी कहा मैडम, नो थैंक्स

​सिर्फ शिक्षक ही नहीं, स्कूल के 40 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भी मोर्चा खोल दिया है। छात्र भी उस अनोखी शैक्षणिक गुणवत्ता से परिचित हैं, जिसके कारण मैडम को पहले छुट्टी पर भेजा गया था। छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे वंदना पांडे से नहीं पढ़ना चाहते। सूत्रों की मानें तो विभाग उन्हें बिंद्रानवागढ़ भेजने का मन बना चुका था, लेकिन फिर किसी अदृश्य शक्ति या मैडम की अटल जिद ने जिला प्रशासन का इरादा बदल दिया।

अब आगे क्या? उग्र आंदोलन की आहट

​फिलहाल गरियाबंद का यह स्कूल शिक्षा का केंद्र कम और राजनीति का अखाड़ा ज्यादा नजर आ रहा है। एक तरफ मैडम का रसूख है, तो दूसरी तरफ नियमों की किताब। शिक्षकों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उनका कहना है कि यदि यह नियम विरुद्ध पदस्थापना रद्द नहीं हुई, तो वे कलम छोड़कर सड़कों पर उतरेंगे। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन अपनी गलती सुधारता है या मैडम की जिद के आगे विभाग का इकबाल ऐसे ही नीलाम होता रहेगा।

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