संपादक पैरी टाईम्स 24×7 डेस्क गरियाबंद
फिंगेश्वर कृषि कॉलेज मामला महाविद्यालय को किरवई शिफ्ट करने पर पूर्व CM भूपेश बघेल का बड़ा हमला,कहा सरकार को विवाद कराने में आता है मजा,ग्रामीणों के कड़े विरोध और फिंगेश्वर बंद के बाद अब इस मामले ने पकड़ा सियासी तूल। जानें क्या है पूरा विवाद और क्यों उबल रहा है गरियाबंद पैरी टाईम्स पर।
गरियाबंद की राजनीति में इन दिनों संस्थानों के माइग्रेशन का सीजन चल रहा है। गरियाबंद के फिंगेश्वर में 8 सालों से जड़ें जमा चुका कृषि महाविद्यालय अब सरकारी विस्थापन का शिकार होने वाला है। इस मुद्दे पर हमने पहले भी खबर दिखाई थी कि कैसे स्थानीय स्तर पर इस स्थानांतरण का विरोध सुलग रहा है, लेकिन अब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के एंट्री मारते ही यह मामला सियासी दंगल में तब्दील हो गया है।

फिंगेश्वर कृषि कॉलेज मामला,विवादों की खाद और सियासत की खेती
पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला करते हुए कहा कि राज्य सरकार को जनता के बीच विवाद की स्थिति पैदा करने में महारत और मजा दोनों हासिल हैं। 8 साल पहले जिस कॉलेज की नींव फिंगेश्वर की मिट्टी में रखी गई थी, उसे किरवई भेजने की तैयारी को बघेल ने सरकार की परम निष्क्रियता का सर्टिफिकेट बताया है।
उन्होंने स्पष्ट कहा जो सरकार एक भवन नहीं बना पा रही, वह कॉलेज को ही दूसरी जगह खिसका कर अपनी नाकामी छिपा रही है।

इतिहास के पन्ने उद्घाटन से लेकर विदाई तक
जैसा कि हमने अपनी पिछली रिपोर्ट में भी जिक्र किया था, इस महाविद्यालय का उद्घाटन खुद तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कांग्रेस शासनकाल में किया था। अब 8 साल बाद उसी संस्थान को डिलीट-पेस्ट करने की कवायद चल रही है। पूर्व CM ने पुरजोर मांग की है कि कॉलेज का नया भवन फिंगेश्वर की सीमा में ही बनना चाहिए। किरवई में स्थानांतरण का फैसला तुरंत वापस लिया जाए।शिक्षा के मंदिर को सियासी फुटबॉल बनाना बंद हो।
लगातार विरोध और प्रदर्शन के बावजूद आंखे मूंदे बैठा प्रशासन
फिंगेश्वर के स्थानीय निवासी और छात्र पहले ही इस शिफ्टिंग के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। पहले यह चर्चा केवल प्रशासनिक गलियारों में थी, लेकिन अब यह मामला भवन निर्माण की मांग से जुड़कर बड़ा आंदोलन बनता दिख रहा है। जनता का सीधा सवाल है क्या सरकार फिंगेश्वर के विकास को अनडू (Undo) करना चाहती है?
पूर्व सीएम बोले जनता की मांग के अनुसार ही रहे कॉलेज
भूपेश बघेल ने साफ कर दिया है कि वे फिंगेश्वर में ही कॉलेज भवन के निर्माण के लिए सरकार पर दबाव बनाएंगे। यह केवल एक कॉलेज की शिफ्टिंग नहीं है, बल्कि यह गरियाबंद की अस्मिता और शिक्षा के अधिकार के बीच छिड़ी जंग है। ।
यह भी देखे …खबर का असर अवैध खनन को लेकर गरियाबंद प्रशासन जागा तो सही, पर अब मिट्टी और मुरूम के फेर में फंसा पेंच ?