गरियाबंद में खनिज विभाग की कार्यवाही से पहले माफियाओं को पहुंच रही खबर ,जिले में धड़ल्ले से हो रहा अवैध रेत उत्खनन खनिज विभाग की रेड से पहले ही लीक हो रही जानकारी, आखिर कौन बचा रहा है विभाग के भीतर बैठे इन संदिग्ध भेदियों को पढ़े पूरी खबर पैरी टाईम्स पर।
गरियाबंद जिले में इन दिनों रेत का अवैध उत्खनन नहीं, बल्कि मैनेजमेंट का अद्भुत खेल चल रहा है। यहां खनिज विभाग की रेड इतनी सीक्रेट होती है कि उसकी खबर विभाग के अधिकारियों से पहले रेत माफिया को हो जाती है। इसे विभाग की कुशलता कहें या माफिया की दूरदर्शिता, पर सच यही है कि जैसे ही सरकारी गाड़ी का पहिया दफ्तर से हिलता है, खदानों पर सन्नाटा पसर जाता है।
नागझर की कार्रवाई में मिली एक मशीन

गरियाबंद में खनिज विभाग की नाकामी और कार्रवाई के दौरान मिलती केवल मशीनें?
ताजा मामला नागझर रेत खदान का है,विभागीय अमले को सूचना मिली कि वहां रेत का अवैध दोहन सुबह से ही जोरों पर है। टीम पूरी तैयारी के साथ दबिश देने निकली, लेकिन मौके पर पहुंची तो वहां केवल एक चैन माउंटेन मशीन खड़ी मिली ।
सूत्रों की मानें तो बुधवार सुबह से नागझर और बकली में रेत का खेल धड़ल्ले से चालू था, बाकायदा हाईवा मालिकों के ग्रुप में मैसेज तैर रहे थे कि खदान चालू है और लोडिंग की पर्ची इतने की कटेगी, मौके पर करीब 20 से 22 हाईवा गाड़ियां कतार में खड़ी थीं। मगर मजाल है कि सरकारी अमले के हाथ एक भी गाड़ी लग जाए,टीम के पहुंचने से पहले ही सारा काफिला हवा हो गया। अब इसे अंतर्यामी शक्ति कहें या विभाग के भीतर बैठे विभीषणों की कृपा, यह समझना ज्यादा मुश्किल नहीं है।
हथखोज में कार्रवाई में मिली दो मशीनें

आरंग वाले खास साहब का रसूख और रातभर की लोडिंग
इस पूरे नाटक की असली स्क्रिप्ट तब समझ आती है जब पर्दे के पीछे के चेहरों पर नजर जाती है। सूत्रों के हवाले से दबी जुबान में चर्चा है कि नागझर रेत खदान को आरंग के एक रसूखदार मंत्री के बेहद खास व्यक्ति द्वारा चलाया जा रहा है।
अब जहां सत्ता का वरदहस्त हो, वहां नियम-कायदे तो वैसे ही घुटने टेक देते हैं। यही वजह है कि नागझर बकली से लेकर चौबेबांधा तक रातभर नदियां छलनी की जा रही हैं, लेकिन विभाग की आंखों पर सत्ता की पट्टी बंधी हुई है। अधिकारियों की हिम्मत भी रसूख के आगे जवाब दे जाती है। आखिर साहब के आदमी पर हाथ डालने का जोखिम कौन ले!

एक कार्यवाही के बाद विभाग शिकायत के इंतजार में…
इधर, खनिज विभाग के अधिकारियों की कर्मठता देखिए, लगता है वो अभी भी थकान मिटाने और छुट्टी के मूड में चल रहे हैं। सूत्रों की मानें तो जब नागझर और बकली खदानों में अवैध उत्खनन की जानकारी अधिकारियों को दी गई, तो साहब लोगों ने इस सूचना को यह कहकर टाल दिया कि कल ही तो हथखोज में कार्रवाई की थी, अब रोज-रोज कितनी कार्रवाई करेंगे? जरा शिकायत आने दो, तब देखेंगे, वाह साहब रेत माफिया दिन-रात नदियों का सीना छलनी कर रहे हैं और विभाग एक दिन की कार्रवाई वो भी अधूरी के बाद आराम मोड में चला जाता है। अब भाई जब अधिकारी खुद ही शिकायत का इंतजार करेंगे, तो माफिया क्यों न बेखौफ होकर गाड़ियां दौड़ाएंगे ।
व्हाट्सएप ग्रुप में प्रशासन को खुल्लम खुल्ला चुनौती ?
इस पूरे खेल में प्रशासन को जो सबसे मजेदार सैल्यूट मिल रहा है, वो है सोशल मीडिया का खुला उपयोग,वाहन मालिकों के व्हाट्सएप ग्रुप्स में बाकायदा गाड़ियों की लोडिंग के साथ रेत की कीमत पोस्ट की जा रही हैं। इन मैसेजों में खुलेआम लिखा जा रहा है कि नागझर रेत खदान पर लोडिंग शुरू है। और रॉयल्टी भी उपलब्ध है यह सीधे तौर पर खनिज विभाग और जिला प्रशासन के सीने पर मूंग दलने और उन्हें सरेआम चुनौती देने जैसा है। माफिया व्हाट्सएप पर लाइव अपडेट दे रहे हैं और सरकारी अमला दफ्तरों में बैठकर फाइलों के पन्ने पलट रहा है।
कलेक्टर के आदेश को ठेंगा और खाली हाथ लौटती टीमें
ऐसा नहीं है कि यह पहला मौका है जब खनिज विभाग बिना हाईवा के खाली हाथ लौटा हो, ठीक एक दिन पहले हथखोज खदान में भी दबिश दी गई थी। वहां भी दो चैन माउंटेन मशीनें तो पकड़ में आ गईं, लेकिन अवैध रेत ढोने वाली गाड़ियां गायब थीं।
हैरानी की बात यह है कि जिले के मुखिया (कलेक्टर) ने पूर्व में ही इन भेदियों को चिह्नित कर कार्रवाई करने के सख्त निर्देश दिए थे। लेकिन लगता है कि विभाग के भीतर बैठे मुखबिरों की जड़ें कलेक्टर के आदेशों से कहीं ज्यादा गहरी हैं। कार्रवाई के नाम पर केवल फाइलें घूम रही हैं और धरातल पर माफिया चांदी काट रहे हैं। सरकार के राजस्व को चूना लग रहा है और प्राकृतिक संपदा को लूटा जा रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन रसूखदारों और अंदरूनी गद्दारों पर कब नकेल कसता है, या फिर यह दिखावटी पकड़म-पकड़ाई का खेल यूं ही चलता रहेगा।
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