गरियाबंद पुलिस ई-30 टीम एसपी वेदव्रत सिरमौर ने 40 पुलिसकर्मियों का किया तबादला,नक्सल मोर्चे पर 1-1 करोड़ के इनामी नक्सलियों को ढेर करने वाली जांबाज E-30 टीम अब थानों में देगी सेवाएं।
गरियाबंद पुलिस विभाग में एक नए युग की शुरुआत हुई है,जिला पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर ने 40 पुलिसकर्मियों का स्थानांतरण कर प्रशासनिक कसावट और वीरता के सम्मान का अनूठा उदाहरण पेश किया है। इस तबादला सूची की सबसे गौरवशाली बात यह है कि जिले की फ्रंटलाइन यानी E-30 टीम के जांबाज सदस्यों को अब मुख्यधारा की पुलिसिंग और थानों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

गरियाबंद पुलिस ई-30 टीम अजेय योद्धा E-30 टीम का स्वर्णिम इतिहास
साल 2013 में गठित हुई E-30 टीम छत्तीसगढ़ की इकलौती ऐसी टीम थी, जिसे विशेष रूप से नक्सल मोर्चे पर लोहा लेने के लिए तैयार किया गया था। इन जवानों ने अपनी जान की बाजी लगाकर गरियाबंद के दुर्गम जंगलों को सुरक्षित बनाया है। ई-30 टीम की सफलता की दास्तां जनवरी 2025 में कुल्हाड़ी घाट की मुठभेड़ से भी जुड़ी है, जहां 1 करोड़ के इनामी नक्सली चलपति सहित 16 नक्सलियों को मार गिराया गया था।
इतना ही नहीं, सितंबर 2025 में माटल की पहाड़ियों पर हुए भीषण ऑपरेशन में भी इसी टीम ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए 1 करोड़ के इनामी मनोज और बालकृष्ण जैसे बड़े नक्सलियों का सफाया किया था।
नक्सल मोर्चे पर टीम ई 30

शांति का नया सवेरा मोर्चे से जनसेवा तक
जवानों को अब थानों में पोस्टिंग देना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि गरियाबंद जिला अब नक्सलवाद के दंश से पूरी तरह मुक्त हो चुका है। जिन हाथों ने जंगलों में नक्सलियों का काल बनकर सुरक्षा की दीवार खड़ी की, अब वही हाथ थानों के माध्यम से आम जनता की समस्याओं का समाधान करेंगे। पुलिस अधीक्षक का यह निर्णय उन जवानों के लिए एक बड़े पुरस्कार जैसा है, जिन्होंने सालों तक अपने परिवार से दूर रहकर मोर्चे पर रातें गुजारीं।
अनुभव का लाभ उठाएगी जनता
इन अनुभवी और जांबाज जवानों की थानों में मौजूदगी से न केवल क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी, बल्कि अपराधियों में खौफ भी बढ़ेगा। गरियाबंद की जनता को अब उन नायकों की सेवाएं मिलेंगी जिन्होंने अपनी वीरता से जिले के इतिहास को गौरवान्वित किया है। यह स्थानांतरण केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि शांति और विजय का उत्सव है।