गरियाबंद पुलिस कप्तान का बीट,फॉर्मूला अब खाकी सिर्फ डंडा नहीं, डेटा और जागरूकता भी बांटेगी ।

Sangani

By Sangani

गरियाबंद पुलिस कप्तान का अनूठा अभियान,थाना प्रभारियों और बीट आरक्षकों ने संभाली कमान, युवाओं का डेटा तैयार करने के साथ साइबर ठगी, नशा मुक्ति और यातायात नियमों पर दी महत्वपूर्ण जानकारी, पुलिस और जनता के बीच बढ़ेगी नजदीकियां। पढ़ें पूरी खबर पैरी टाईम्स पर ।

गरियाबंद जिले में इन दिनों पुलिस कुछ अलग ही अंदाज में नजर आ रही है। अमूमन खाकी को देखते ही गलियां सूनी हो जाती थीं, लेकिन कप्तान के निर्देश पर अब थाना प्रभारी और बीट आरक्षक खुद युवाओं के पास पहुंचकर उनके भविष्य की कुंडली (डेटा) तैयार कर रहे हैं। इसे पुलिस का डंडा छोड़ो, डेटा पकड़ो अभियान कहें तो गलत नहीं होगा।

गरियाबंद पुलिस कप्तान

गरियाबंद पुलिस कप्तान,युवाओं की बेरोजगारी पर पुलिस की नजर

​अक्सर पुलिस यह पूछती है कि तुमने अपराध क्यों किया? लेकिन गरियाबंद पुलिस अब यह पूछ रही है कि तुम बेरोजगार क्यों हो?। जिले के बीट आरक्षक गांव-गांव जाकर युवक-युवतियों का शैक्षणिक डेटा जुटा रहे हैं, उद्देश्य नेक है ताकि भविष्य में इन युवाओं को सही कौशल विकास और प्रतियोगी परीक्षाओं का मार्ग दिखाया जा सके। यानी अब गरियाबंद के युवा सिर्फ थानों के चक्कर नहीं लगाएंगे, बल्कि पुलिस खुद उनके करियर की चिंता कर रही है।

साइबर ठगों की दुकान बंद करने की तैयारी

​डिजिटल इंडिया के दौर में जहाँ ठग एक क्लिक पर बैंक खाता साफ कर देते हैं, वहाँ पुलिस अब ‘टीचर’ की भूमिका में है। थाना प्रभारियों ने ग्रामीणों को साफ कर दिया है कि अपना OTP और आधार नंबर किसी अनजान आशिक या फर्जी लॉटरी वाले को न दें। पुलिस ने जोर देकर कहा कि अगर डिजिटल दुनिया में कोई जाल बिछाए, तो तुरंत 1930 डायल करें।

नशे से दूरी और हेलमेट से यारी

​सड़कों पर हवाई जहाज बनने वाले युवाओं को पुलिस ने प्यार से समझाया कि जमीन पर चलना ही सेहतमंद है। नशे के दुष्प्रभावों और यातायात नियमों पर जो क्लास ली गई, उसका संदेश साफ था: नशा नाश की जड़ है और हेलमेट सिर की ढाल। पुलिस की यह पहल समाज को अपराध मुक्त बनाने की दिशा में एक कड़ा प्रहार है, लेकिन अंदाज बिल्कुल दोस्ताना।

कप्तान वेदव्रत सिरमौर का सीधा संदेश दूरी घटेगी, तो अपराध मिटेगा

​पुलिस कप्तान वेदव्रत सिरमौर का मानना है कि जनता और पुलिस के बीच की खाई को केवल संवाद से भरा जा सकता है। जब खाकी खुद चलकर मोहल्ले में आएगी, तो अपराधियों के हौसले पस्त होंगे और आम नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस करेगा। गरियाबंद पुलिस का यह भ्रमण केवल एक राउंड नहीं, बल्कि एक सुरक्षित समाज की नींव रखने की कोशिश है।

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