अवैध परिवहन गरियाबंद में वारसी ट्रेडर्स का हाइवा फिर से अवैध गिट्टी परिवहन करते पकड़ा गया,बार-बार उल्लंघन करने वाले वाहनों पर राजसात की कार्रवाई का प्रावधान है पर विभाग छोटे मोटे जुर्माने करके छोड़ देते है ।
गरियाबंद जिले में अवैध खनिज परिवहन करने वालों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें कानून की कड़ाई का कोई खास असर पड़ता दिखाई नहीं दे रहा है। अभी कुछ ही दिनों पहले प्रशासन के चंगुल से छूटकर आए वारसी ट्रेडर्स (गौरव पथ) के वाहन ने फिर से गिट्टी के अवैध खेल में अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी। बिना रॉयल्टी के गिट्टी परिवहन करते हुए इस हाइवा को कल पांडुका थाने की सुपुर्दगी में दिया गया है।

15 मार्च को भी हुई थी अवैध खनन की कार्यवाही
गौरतलब है कि वारसी ट्रेडर्स का यह वही वाहन है जो बीते 15 मार्च को कोदोबतर के पास अवैध मिट्टी और मुरुम के उत्खनन में संलिप्त पाया गया था। उस दौरान भारी मशीनों के साथ इसे जप्त कर गरियाबंद थाने में खड़ा किया गया था। हैरानी की बात यह है कि आपसी सहमति और कागजी खानापूर्ति के बाद जैसे ही यह वाहन आजाद हुआ, वारसी ट्रेडर्स ने फिर से बिना किसी डर के अवैध परिचालन शुरू कर दिया। बार-बार एक ही वाहन का अवैध कार्यों में पकड़ा जाना यह संकेत देता है कि संबंधित फर्म के लिए जुर्माना महज एक औपचारिकता बनकर रह गया है।

अवैध परिवहन पर क्या है नियम बार-बार गलती करने पर हो सकती है बड़ी मुश्किल
खनिज संपदा के अवैध दोहन को रोकने के लिए बनाए गए नियमों में स्पष्ट उल्लेख है कि आदतन नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी गाज गिर सकती है वाहन राजसात की कार्रवाई यदि कोई वाहन बार-बार अवैध परिवहन या उत्खनन में पकड़ा जाता है, तो प्रशासन के पास उसे राजसात (Confiscation) करने की शक्ति होती है। इसका अर्थ है कि वाहन को हमेशा के लिए सरकारी संपत्ति घोषित कर दिया जाता है। फर्म पर प्रतिबंध बार-बार नियमों की धज्जियां उड़ाने वाली फर्म या संचालक के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के साथ-साथ उन्हें भविष्य में किसी भी वैध व्यापारिक गतिविधि से प्रतिबंधित किया जा सकता है। जुर्माने का बढ़ता स्वरूप नियमों के अनुसार, हर बार पकड़े जाने पर जुर्माने की राशि को पिछली बार के मुकाबले कई गुना बढ़ाया जा सकता है, ताकि यह उल्लंघन करने वालों के लिए सबक बन सके। पुलिसिया कार्रवाई अवैध उत्खनन को सरकारी संपत्ति की चोरी मानकर संबंधित फर्म के विरुद्ध पुलिस में प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज कराई जा सकती है।
कब तक मिलेगा अभयदान
वारसी ट्रेडर्स द्वारा बार-बार दोहराई जा रही इन गलतियों के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या प्रशासन इस बार केवल जुर्माने तक सीमित रहता है या राजसात जैसी कड़ी कार्रवाई की ओर कदम बढ़ाता है।
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