गरियाबंद में सुशासन तिहार या जुबानी जंग का अखाड़ा ? अधिकारियों के देर से पहुंचने और बहानों पर भड़के जनप्रतिनिधि, सुशासन शिविर में कलेक्टर और नेताजी के बीच तकरार तेज ।

Sangani

By Sangani

गरियाबंद में सुशासन तिहार या जुबानी जंग का अखाड़ा पूर्व संसदीय सचिव गोवर्धन मांझी और कलेक्टर भगवान सिंह उइके के बीच तीखी जुबानी जंग,जानें प्रशासनिक कसावट और कानूनी नियमों को लेकर छिड़े इस विवाद की पूरी सच्चाई पैरी टाईम्स पर ।

गरियाबंद छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में इन दिनों सुशासन तिहार का आयोजन चल रहा है, लेकिन जनता की समस्याओं का समाधान होने से पहले यहाँ के प्रशासनिक मुखिया और जनप्रतिनिधियों के बीच ज्ञान का महासंग्राम छिड़ गया है। मुंगझर में आयोजित सुशासन शिविर में उस वक्त माहौल गर्मा गया, जब भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व संसदीय सचिव गोवर्धन मांझी ने मंच से ही गरियाबंद कलेक्टर भगवान सिंह उइके की प्रशासनिक कार्यशैली की धज्जियां उड़ा दीं,अमलिपदर के बाद अब मुंगझर में भी कलेक्टर साहब जनप्रतिनिधि के सीधे टारगेट पर आ गए हैं।

फाइल फोटो

गरियाबंद में सुशासन तिहार या जुबानी जंग का अखाड़ा

गरियाबंद में सुशासन तिहार या जुबानी जंग का अखाड़ा कागजी न्यायालयीन बहानों पर भड़के गोवर्धन मांझी

​अक्सर देखा जाता है कि जब अधिकारी किसी समस्या का समाधान नहीं ढूंढ पाते, तो वे उस पर न्यायालयीन प्रक्रिया का ठप्पा लगाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। मुंगझर शिविर में भी जब जनता अपनी फरियाद लेकर पहुंची, तो कलेक्टर साहब के पास हर मामले को कोर्ट का मामला बताने का बहाना तैयार था। इस पर पूर्व संसदीय सचिव गोवर्धन मांझी का पारा चढ़ गया। उन्होंने मंच से ही दहाड़ते हुए कहा कि हर आवेदन को कोर्ट का मामला बताकर कलेक्टर अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकते।

​मांझी ने कलेक्टर उइके को आईना दिखाते हुए रायपुर के पूर्व कलेक्टर एम. के. राउत का ऐतिहासिक उदाहरण दे डाला। उन्होंने साफ कहा कि प्रशासनिक कसावट और जनता के कामों के प्रति संवेदनशीलता क्या होती है, यह राउत साहब के कार्यकाल से सीखा जाना चाहिए। मांझी ने सीधे शब्दों में कहा कि अधिकारी समय पर शिविर में आएं और जनता की समस्याओं का त्वरित निराकरण करें, न कि फाइलों को अदालती उलझनों में उलझाकर रखें।

जब कलेक्टर ने खोया आपा, तो मांझी ने दिया करारा जवाब

​जनप्रतिनिधि द्वारा जनता की आवाज उठाने पर गरियाबंद कलेक्टर भगवान सिंह उइके इस कदर असहज हो गए कि उन्होंने मर्यादा की लाइन पार करते हुए पूर्व संसदीय सचिव गोवर्धन मांझी को ही ‘ज्ञान नहीं होने’ का सर्टिफिकेट बांट दिया। कलेक्टर का यह बयान उनके प्रशासनिक अहंकार को साफ दर्शाता है। लेकिन राजनीति के मझे हुए खिलाड़ी गोवर्धन मांझी ने इस पर ऐसा तंज कसा कि कलेक्टर साहब बगलें झांकने लगे। मांझी ने पलटवार करते हुए कहा अगर कलेक्टर साहब में इतना ही ज्ञान होता, तो वे सुशासन शिविर में समय पर पहुंच जाते।

सुशासन तिहार की जुबानी जंग से जनता को कितना फायदा ?

​इस करारे जवाब के बाद पंडाल में मौजूद जनता और गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। लोग अब यह पूछ रहे हैं कि जो साहब खुद समय के पाबंद नहीं हैं, वे जनता को सुशासन का पाठ कैसे पढ़ा रहे हैं? गौरतलब है कि यह कोई पहली बार नहीं है; इससे पहले 7 मार्च को अमलिपदर के शिविर में भी मांझी ने कलेक्टर पर फोन न उठाने और अधिकारियों पर कोई नियंत्रण न होने के गंभीर आरोप लगाए थे। सुशासन तिहार में चल रही इस जुबानी जंग को लेकर यह भी चर्चा है कि इसका फायदा आमजनों को मिलेगा या नहीं की ।

यह भी पढ़ें..गरियाबंद सुशासन तिहार या खाली कुर्सियों का मेला ? अमलीपादर में अधिकारियों के रवैये पर भड़के गोवर्धन मांझी मंच पर ही कर दी अधिकारियों की खिंचाई

कृपया शेयर करें

लगातार सही खबर सबसे पहले जानने के लिए हमारे वाट्सअप ग्रुप से जुड़े

Join Now

Join Telegram

Join Now

error: Content is protected !!