उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन विभाग की कहानी विश्व पर्यावरण दिवस 2026 पर उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व की जांबाज कहानी,जानिए कैसे 4 जानलेवा हमलों और 550 शिकारियों को दबोचकर मुक्त कराया 2500 एकड़ जंगल और लौटे दुर्लभ जीव।
गरियाबंद विश्व पर्यावरण दिवस पर उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व से एक बेहद रोमांचक और हैरतअंगेज कामयाबी की कहानी सामने आई है जहां उदंती सीता नदी के उपनिदेशक वरुण जैन की टीम ने अपनी जान जोखिम में डालकर तस्करों और भू-माफियाओं के चंगुल से वनों को मुक्त कराया है। पिछले चार सालों में महानदी कैचमेंट एरिया से करीब 2500 एकड़ यानी 956 हेक्टेयर अवैध कब्जा हटाया गया है जिसकी कुल सरकारी कीमत लगभग 573 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस खतरनाक महाअभियान के दौरान मुस्तैद वनकर्मियों की जांबाज टीम पर माफियाओं द्वारा 4 बार जानलेवा हमले भी किए गए लेकिन टीम पीछे नहीं हटी।

उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के 550 से अधिक अतिक्रमण कारियों को भेजा जेल
इस बड़े एंटी पोचिंग और गश्ती अभियान के तहत अब तक 550 से अधिक शातिर शिकारियों, अंतरराज्यीय तस्करों और रसूखदार अतिक्रमणकारियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। वन विभाग ने न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पड़ोसी राज्य ओडिशा और महाराष्ट्र की सीमाओं में घुसकर बड़े खुफिया ऑपरेशन चलाए हैं। इस हैरतअंगेज कार्रवाई का नतीजा यह हुआ कि कभी बंदूकों की गूंज से दहलने वाला यह पूरा जंगल आज पूरी तरह शांत और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित हो चुका है।

अतिक्रमण हटते ही अपने घर वापस लौटे दुर्लभ प्रजाति के जीव
जंगल सफारी और घने जंगलों के बीच अब सबसे बड़ा चमत्कार यह हुआ है कि यहाँ पहली बार कैमरे में बेहद दुर्लभ पैंगोलिन की लाइव मौजूदगी रिकॉर्ड हुई है। इसके साथ ही सुदूर पश्चिमी घाट में मिलने वाली मालाबार पाइड हॉर्नबिल और ठंडे हिमालयी पर्वतों में पाया जाने वाला दुर्लभ ट्राइकारिनेट हिल टर्टल यानी पहाड़ी कछुआ भी अब यहाँ अठखेलियां करता दिख रहा है। उड़न गिलहरी, माउस डियर, ऊदबिलाव और चौसिंगा जैसे लुप्तप्राय जीवों का कुनबा बढ़ने से अब इलाके में अचानक इको-पर्यटन और स्थानीय रोजगार की बाढ़ आ गई है।
इस क्षेत्र में अब वीविंग द कैनोपी कवर और हार्निबल रेस्टोरेंट की पहल
इस पूरे वन क्षेत्र को हाईटेक बनाने के लिए आधुनिक तकनीक जैसे थर्मल ड्रोन सर्विलांस, एआई कैमरे और विशेष हाथी ट्रैकिंग अलर्ट ऐप का सहारा लिया जा रहा है जिससे मानव-वन्यप्राणी द्वन्द्व में भारी कमी आई है। इसके अलावा जंगल में उड़ने वाली गिलहरियों के लिए विशेष वीविंग द कैनोपी कवर और पक्षियों के लिए हॉर्नबिल रेस्टोरेंट जैसी अनोखी और दिलचस्प पहल शुरू की गई है। स्थानीय ग्रामीणों, युवा वन सुरक्षा समितियों और महिला स्व-सहायता समूहों के इस जन आंदोलन से यह रिजर्व अब देश के सबसे बड़े कार्बन सिंक के रूप में उभर रहा है जो पृथ्वी के बढ़ते तापमान को रोकने में गेमचेंजर साबित होगा।
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