मैनपुर कांग्रेस नजरबंद काला झंडा निकला ही नहीं, लोकतंत्र पहले ही नजरबंद हो गया.. मैनपुर में कांग्रेस नेताओं को घर बैठाने पर सियासत गरम ।

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By Sangani

मैनपुर कांग्रेस नजरबंद भाजपा सांसद को काला झंडा दिखाने की सूचना पर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रामकृष्ण ध्रुव सहित दर्जनों कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस ने नजरबंद किया, पढ़ें पूरी राजनीतिक खबर पैरी टाईम्स पर।

गरियाबंद जिला स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव के मंच पर शिक्षा की बात हो रही थी, लेकिन मैनपुर की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा उस “काले झंडे” की रही, जो कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने से पहले ही पुलिस की कार्रवाई के कारण चर्चा का विषय बन गया। भाजपा सांसद को काला झंडा दिखाने की कथित तैयारी की सूचना मिलते ही मैनपुर पुलिस सक्रिय हो गई और ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रामकृष्ण ध्रुव सहित दर्जनों कांग्रेस कार्यकर्ताओं को नजरबंद कर दिया।

मैनपुर कांग्रेस नजरबंद

मैनपुर कांग्रेस नजरबंद भाजपा सांसद को काला झंडा दिखाने की थी तैयारी

गरियाबंद के राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। व्यंग्यात्मक अंदाज में लोग यह कहते नजर आए कि इस बार काला झंडा नहीं, बल्कि विरोध का अधिकार ही घर के भीतर नजरबंद हो गया। हालांकि प्रशासन की ओर से इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया एहतियाती कदम माना जा रहा है।

जिला स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव से पहले पुलिस की कार्रवाई

जानकारी के अनुसार, जिला स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव में भाजपा सांसद के शामिल होने का कार्यक्रम तय था। इसी दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा विभिन्न मुद्दों को लेकर काला झंडा दिखाकर विरोध दर्ज कराने की तैयारी की सूचना पुलिस को मिली। सूचना मिलते ही पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रामकृष्ण ध्रुव समेत कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को उनके घरों पर ही नजरबंद कर दिया, जिससे वे कार्यक्रम स्थल तक नहीं पहुंच सके।

कार्यक्रम में जनक ध्रुव शामिल फिर भी कांग्रेसियों के विरोध की चर्चा

इधर, कार्यक्रम में कांग्रेस विधायक जनक ध्रुव भी शामिल हुए। ऐसे में एक ओर सत्ता पक्ष और विपक्ष के जनप्रतिनिधि एक ही आयोजन में मौजूद रहे, वहीं दूसरी ओर विपक्ष के कई स्थानीय नेता कार्यक्रम से पहले ही पुलिस की निगरानी में रहे। यही विरोधाभास पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक बहस का विषय बना रहा है।
घटना के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी गई। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराना संवैधानिक अधिकार है और यदि किसी प्रकार का विरोध होने की आशंका थी तो सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जा सकती थी। दूसरी ओर, प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने और कार्यक्रम को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए यह कदम उठाया गया।

शाला प्रवेश उत्सव बना राजनीतिक अखाड़ा

मैनपुर की इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या विरोध की राजनीति अब सूचना मिलने भर से सीमित कर दी जाएगी, या फिर लोकतांत्रिक असहमति के लिए पर्याप्त स्थान बचा रहेगा। फिलहाल इस पूरे मामले ने शाला प्रवेश उत्सव से अधिक राजनीतिक हलकों में चर्चा बटोर ली है।
कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा स्थानीय राजनीति में और तूल पकड़ सकता है। कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश बताकर सरकार को घेरने की तैयारी कर सकती है, जबकि सरकार के इशारों पर चलने।वाला प्रशासन अपनी कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की सामान्य प्रक्रिया बताता रहेगा। अब देखने वाली बात यह होगी कि यह नजरबंदी केवल एक दिन की कार्रवाई साबित होती है या आने वाले समय की राजनीति में नया मुद्दा बन जाती है

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