गरियाबंद में खाद के लिए अब लाइन नहीं,लगानी पड़ेगी बल्कि FSS प्रणाली शुरू हो गई है। किसान मोबाइल ऐप से खाद बुकिंग कर QR टोकन प्राप्त करेंगे और बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद निर्धारित दर पर खाद ले सकेंगे पढ़ें पूरी खबर पैरी टाईम्स पर।
गरियाबंद खाद के लिए सुबह-सुबह सोसायटी के सामने चप्पल रखकर नंबर लगाने और यह पूछते घूमने का दौर शायद अब धीरे-धीरे पुरानी कहानी बनने वाला है कि भैया, खाद कब आही ? गरियाबंद के किसानों के लिए सरकार ने अब खाद वितरण में डिजिटल तड़का लगा दिया है। जिले में फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल (FSS) प्रणाली की शुरुआत हो गई है। यानी अब किसान मोबाइल से खाद की बुकिंग करेंगे, टोकन पाएंगे और निर्धारित केंद्र से खाद उठाएंगे।
भारत सरकार के उर्वरक एवं रसायन मंत्रालय, संचालनालय उर्वरक नई दिल्ली ने गरियाबंद जिले को FSS प्रणाली के लिए पायलट जिला चुना है। जिले में 7 जुलाई 2026 से इस नई डिजिटल व्यवस्था का शुभारंभ किया गया है।

गरियाबंद में खाद के लिए अब लाइन नहीं, ऑनलाइन खाद के लिए मोबाइल से मिलेगा टोकन
नई व्यवस्था में किसानों को सबसे पहले Google Play Store से Framework for Fertilizer Sale एप्लीकेशन डाउनलोड करना होगा। ऐप में किसान अपनी भूमि और फसल से जुड़ी जानकारी दर्ज करेंगे। इसके बाद नजदीकी उर्वरक विक्रय केंद्र का चयन कर खाद की आवश्यकता के अनुसार बुकिंग की जा सकेगी।बुकिंग पूरी होते ही किसान को QR कोड वाला टोकन मिलेगा। यह टोकन तीन दिनों तक मान्य रहेगा। अब यहां सरकार ने भी डिजिटल नियम थोड़ा सख्त रखा है तीन दिन में खाद नहीं उठाया तो टोकन खुद ही बोलेगा, मोर काम खतम यानी QR टोकन स्वतः निरस्त हो जाएगा।
QR स्कैन होगा, बायोमेट्रिक लगेगा और निर्धारित दर पर मिलेगा
खादकिसान टोकन लेकर चयनित उर्वरक विक्रय केंद्र पहुंचेंगे। यहां POS मशीन से QR कोड स्कैन किया जाएगा और बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद निर्धारित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा।सरकार का दावा है कि किसान बुकिंग के बाद आगामी दो दिनों में संबंधित विक्रय केंद्र से खाद प्राप्त कर सकेंगे। इससे किसानों का समय बचेगा, केंद्रों पर अनावश्यक भीड़ कम होगी और उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने में भी मदद मिलेगी।
अब सवाल सिर्फ इतना मोबाइल और नेटवर्क किसान का साथ दें
व्यवस्था सुनने में आधुनिक और किसानों के लिए राहत भरी है। खाद वितरण में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में यह बड़ा कदम साबित हो सकता है। बस गांव में मोबाइल नेटवर्क ठीक रहे, ऐप बिना अटके चले और किसान को समय पर खाद मिल जाए तो समझिए डिजिटल खेती की गाड़ी सही पटरी पर दौड़ पड़ी।
एप्लीकेशन संचालन में किसी तरह की समस्या आने पर किसान नोडल अधिकारी सहायक संचालक कृषि अनिल कुमार कौशिक और ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी जसपाल साहू से संपर्क कर सकते हैं।कुल मिलाकर गरियाबंद में खाद वितरण अब पहले आओ-पहले पाओ से आगे बढ़कर मोबाइल चलाओ-टोकन पाओ की राह पर है। यदि यह प्रयोग सफल रहा तो किसानों की लाइन छोटी और खाद वितरण की पारदर्शिता जरूर बड़ी हो सकती है।
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