नपा घेराव में गजब का सियासी गणित,कांग्रेस की मांग नालंदा परिसर बनाओ, उनके ही पार्षद बोले बने लेकिन यहां नहीं ? अध्यक्ष ने देवनिन तालाब से मटन मार्केट तक गिनाईं अड़चनें, बोले डेढ़ साल में 25 करोड़ के काम स्वीकृत ।

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By Sangani

नपा घेराव में गजब का सियासी गणित गरियाबंद नगर पालिका घेराव पर अध्यक्ष रिखी यादव का पलटवार,नालंदा परिसर, देवनिन तालाब और विकास कार्यों पर उठाए सवाल, 25 करोड़ के कार्यों का दावा पढ़ें पूरी खबर पैरी टाईम्स पर

गरियाबंद नगर पालिका की राजनीति में घेराव के बाद अब जवाबी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस ने 20 सूत्रीय मांगों को लेकर नगर पालिका का घेराव किया तो अगले दिन अध्यक्ष रिखी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एक-एक मुद्दे पर अपना पक्ष रखा। उनके बयान से शहर के विकास की ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसमें मांगें भी हैं, योजनाएं भी हैं, बजट भी है, लेकिन कई कामों के रास्ते में विरोध, विस्थापन और अधिकार क्षेत्र जैसी अड़चनें खड़ी हैं। अध्यक्ष ने कांग्रेस के आंदोलन को दिखावा बताते हुए सवाल किया कि जब विकास कार्यों का विरोध हो रहा है तो उनके लिए वैकल्पिक जगह कौन बताएगा?

नपा घेराव में गजब का सियासी गणित

नपा घेराव में गजब का सियासी गणित नालंदा परिसर चाहिए, लेकिन बने कहां ? यही है असली सवाल

कांग्रेस ने नालंदा परिसर का निर्माण जल्द शुरू कराने की मांग उठाई। इस पर पालिका अध्यक्ष ने कहा कि जिस जगह को इसके लिए चिह्नित किया गया है, वहां पहले आपत्तिनाथ के द्वारा विरोध किया गया था जिसके बाद वंहा से हटाकर इसे गायत्री मंदिर के सामने शिफ्ट करने की योजना बनाई गई मगर कांग्रेस के ही पार्षद विरोध कर रहे हैं। व्यावसायिक परिसर को लेकर भी स्थानीय लोगों की आपत्ति सामने आई है।

अब राजनीति का यह गणित भी दिलचस्प है। मांगपत्र में निर्माण जल्द कराने की बात और चिह्नित जगह पर विरोध की स्थिति के बीच अध्यक्ष ने विरोध करने वालों से विकल्प बताने को कहा है। यानी विकास की गाड़ी आगे बढ़े तो सही, लेकिन उसे खड़ा कहां करना है, यह सवाल अब भी अपनी जगह कायम है।

देवनिन तालाब, बजट पुराना, इंतजार जारी

देवनिन तालाब के विकास पर अध्यक्ष ने कहा कि इसके लिए बजट कांग्रेस शासनकाल में ही आया था, लेकिन काम शुरू नहीं हो पाया। उन्होंने इसकी वजह तालाब क्षेत्र में रहने वाले लोगों का विस्थापन बताया। अध्यक्ष के मुताबिक, पहले गहरीकरण का काम पूरा होगा और उसके बाद सौंदर्यीकरण कराया जाएगा।

उधर, नया तालाब के गहरीकरण को लेकर उन्होंने कहा कि इसके लिए नगर पालिका को अलग से फंड नहीं मिलता। ऐसे में उपलब्ध संसाधनों से व्यवस्था बनाकर काम कराया जा रहा था। यानी तालाबों की कहानी में कहीं बजट का पुराना हिसाब है तो कहीं संसाधनों की कमी और कहीं विस्थापन की बाधा। शहर को इंतजार है कि ये अड़चनें कब दूर होंगी।

शौचालय से मटन मार्केट तक, शिकायतों पर जवाब और कार्यवाही तैयार

सार्वजनिक शौचालय में महिलाओं से अभद्रता और अधिक वसूली की शिकायतों पर अध्यक्ष ने कहा कि पहले ठेकेदार बदला गया था। नए ठेकेदार के खिलाफ भी शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। मटन मार्केट की गंदगी पर उन्होंने नगर पालिका की ओर से नियमित सफाई कराने का दावा करते हुए व्यापारियों की जिम्मेदारी भी याद दिलाई।

वहीं, वार्ड-5 में करीब तीन करोड़ रुपये के विकास कार्यों को लेकर कांग्रेस की शिकायत पर जांच कराने की बात कही। अध्यक्ष के अनुसार, इंजीनियरों के माध्यम से तकनीकी पहलुओं की जांच कराई जाएगी। वार्ड-6 के वॉलीबॉल मैदान को खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए आवंटित करने के मामले में उन्होंने कहा कि इसका फैसला कलेक्टर के अधिकार क्षेत्र में है।

श्रद्धांजलि योजना पर अध्यक्ष भी विपक्ष के साथ

श्रद्धांजलि योजना पिछले तीन-चार वर्षों से बंद होने की बात स्वीकार करते हुए अध्यक्ष ने कहा कि इसे दोबारा शुरू कराने के लिए वह मुख्यमंत्री और प्रशासन से लगातार मांग कर रहे हैं। यानी इस मुद्दे पर विपक्ष की मांग और अध्यक्ष की इच्छा एक ही दिशा में दिखाई देती है। अब देखना यह है कि योजना दोबारा शुरू कराने की मांग कब नतीजे तक पहुंचती है।

25 करोड़ के कार्यों का दावा, जनता को नतीजों का इंतजार

प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिखी यादव ने अपने डेढ़ साल के कार्यकाल में करीब 25 करोड़ रुपये के विकास कार्य स्वीकृत कराने का दावा किया। उन्होंने कहा कि कई कार्य प्रगतिरत हैं और कांग्रेस का घेराव दिखावे के लिए किया गया।

लेकिन शहर की जनता के लिए असली सवाल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे का है। नालंदा परिसर कब बनेगा, देवनिन तालाब का सौंदर्यीकरण कब शुरू होगा, शौचालयों की शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई कब होगी और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच में क्या सामने आएगा? इन सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि विकास के दावों का असर जमीन पर कितना दिखाई देता है।

शहर को घेराव और पलटवार से आगे बढ़कर समाधान चाहिए। विरोध हो तो विकल्प सामने आएं, योजनाएं बनें तो समयसीमा तय हो और बजट स्वीकृत हो तो उसका असर जनता को दिखाई भी दे। आखिर विकास की असली परीक्षा प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं, शहर की सड़कों, तालाबों और नागरिक सुविधाओं में होती है।

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