चाकू के दम पर हैवानियत गरियाबंद फास्ट ट्रैक पॉक्सो कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी धर्मेन्द्र उर्फ रामा ठाकुर को 20 वर्ष के सश्रम कारावास और 23 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई,पढ़ें पूरी खबर पैरी टाईम्स पर।
गरियाबंद समाज में अक्सर कुछ लोग यह भ्रम पाल लेते हैं कि डर, धमकी और ताकत के दम पर इंसानियत को कुचल देना आसान है। लेकिन गरियाबंद की फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय ने एक ऐसे ही मामले में यह स्पष्ट कर दिया कि कानून की चाल भले धीमी दिखाई दे, लेकिन उसका फैसला अपराधियों के लिए बेहद भारी पड़ता है। नाबालिग बालिका के साथ चाकू की नोक पर दुष्कर्म करने वाले आरोपी धर्मेन्द्र उर्फ रामा ठाकुर (21 वर्ष) को अदालत ने 20 वर्ष के सश्रम कारावास और कुल 23 हजार के अर्थदंड से दंडित किया है।यह फैसला केवल एक आरोपी को सजा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन लोगों के लिए भी कड़ा संदेश है जो महिलाओं और मासूम बच्चियों को कमजोर समझने की भूल करते हैं।

चाकू के दम पर हैवानियत अदालत का सख्त संदेश कानून के हाथ लंबे हैं, दरिंदगी की उम्र छोटी
फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय (पॉक्सो एवं बलात्कार प्रकरण) की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती गंगा पटेल ने उपलब्ध साक्ष्यों, पीड़िता के बयान, चिकित्सकीय रिपोर्ट तथा अन्य गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया।अदालत ने पॉक्सो एक्ट की धारा 4(1) के तहत 20 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 15 हजार अर्थदंड, बीएनएस की धारा 351(3) के तहत 5 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 5 हजार अर्थदंड तथा धारा 115(2) के तहत 1 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 3 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई। न्यायालय ने कुल 23 हजार का अर्थदंड भी लगाया।यह फैसला बताता है कि जब साक्ष्य मजबूत हों और जांच प्रभावी हो, तब कानून अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुंचाने में सक्षम है।
क्या था पूरा मामला?
विशेष लोक अभियोजक हरि नारायण त्रिवेदी के अनुसार, घटना 19 मई 2025 की शाम की है। नाबालिग पीड़िता अकेले नाले की ओर गई थी। आरोप है कि आरोपी धर्मेन्द्र उर्फ रामा ठाकुर ने उसके गले पर चाकू टिकाकर मारपीट की, जान से मारने की धमकी दी और उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया।पीड़िता ने साहस दिखाते हुए घटना की जानकारी अपने परिजनों को दी, जिसके बाद थाना इंदागांव में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया और विवेचना पूरी कर न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया।
मजबूत विवेचना बनी सजा की सबसे बड़ी वजह
मामले की विवेचना उप पुलिस अधीक्षक गरिमा दादर, एसडीओपी विकास पाटले तथा उप निरीक्षक जितेन्द्र कुमार विजयवार ने की। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में 14 साक्षियों के बयान प्रस्तुत किए, जिनके आधार पर आरोपी के खिलाफ अपराध सिद्ध हुआ।यह मामला इस बात का उदाहरण भी है कि संवेदनशील मामलों में समयबद्ध जांच और प्रभावी पैरवी से पीड़ित को न्याय दिलाया जा सकता है।
समाज के लिए सीख
इस फैसले को केवल एक अदालती आदेश मानकर भूल जाना पर्याप्त नहीं होगा। यह समाज को भी आईना दिखाता है कि महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा केवल कानून की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।जो लोग यह सोचते हैं कि डर और हिंसा के दम पर वे किसी की जिंदगी बर्बाद कर बच निकलेंगे, उनके लिए यह फैसला स्पष्ट संदेश है कानून देर से सही, लेकिन अपराध का पूरा हिसाब करता है।