3 पहचान 1 जमीन और चौंकाने वाली पावर रजिस्ट्री,उप पंजीयक कार्यालय की नाक के नीचे नकली हरि बेच गया ढाई एकड़ भूमि, मामले को लेकर तत्कालीन उप पंजीयक के बयान ने खड़े किए सवाल ?

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By Sangani

3 पहचान 1 जमीन और चौंकाने वाली पावर रजिस्ट्री गरियाबंद के बजाड़ी में ढाई एकड़ जमीन की कथित फर्जी रजिस्ट्री का मामला सामने आया,जिसमें उप पंजीयक कार्यकाल की अनदेखी और लापरवाही दोनों सामने आई है इस मामले में डिजिटल सिस्टम से नहीं, गांव पहुंचे नामांतरण इश्तिहार और सरपंच की आपत्ति से खुला पहचान का खेल पढ़े पूरी ख़बर पैरी टाईम्स पर।

गरियाबंद सरकार ने जमीन की खरीदी-बिक्री में पारदर्शिता लाने के लिए पंजीयन व्यवस्था को डिजिटल बनाया। कंप्यूटर आए, दस्तावेज अपलोड होने लगे, फोटो खिंचने लगी और सरकारी सिस्टम हाईटेक हो गया। लेकिन अमलीपदर तहसील के बजाड़ी गांव में ढाई एकड़ जमीन की एक रजिस्ट्री ने डिजिटल व्यवस्था को ऐसा सवाल दिया है, जिसका जवाब अब देवभोग उप पंजीयक कार्यालय की जांच तलाश रही है। वही इस पूरे मामले को लेकर तत्कालीन उप पंजीयक चितेश देवांगन बोले कि रजिस्ट्री के दौरान उन्हें किसी तरह की कोई शंका नहीं हुई इसलिए उन्होंने पंजीयन कर दिया यह बयान बेहद चौंकाने वाले हैं। जमीन एक मृत किसान की, आधार नंबर पड़ोसी युवक का और रजिस्ट्री में फोटो कथित तौर पर किसी तीसरे व्यक्ति का! इसके बावजूद दस्तावेज सरकारी प्रक्रिया की सीढ़ियां चढ़ते गए और जमीन की रजिस्ट्री हो गई।
जिस कथित खेल को पंजीयन कार्यालय की प्रक्रिया नहीं पकड़ सकी, उसे गांव पहुंचा एक साधारण नामांतरण इश्तिहार और सरपंच यशोदा नेताम की नजर ने रोक दिया। आप।कह सकते है डिजिटल सिस्टम फाइल पढ़ता रहा, गांव की सरपंच ने चेहरा पहचान लिया

3 पहचान 1 जमीन और चौंकाने वाली पावर रजिस्ट्री

3 पहचान 1 जमीन और चौंकाने वाली पावर रजिस्ट्री 80 साल पुरानी जमीन का अचानक निकला 39 साल का मालिक

पूरा मामला बजाड़ी ग्राम के खसरा नंबर 12 में मौजूद करीब ढाई एकड़ कृषि भूमि का है। राजस्व रिकॉर्ड में जमीन हरिसिंह के नाम से जुड़ी बताई गई है। ग्रामीणों का दावा है कि करीब 80 वर्षों से यह जमीन गांव की जानकारी में पड़त थी और ग्राम देवी की सेवा करने वाले तुकाराम कुम्हार परिवार को दान में दिए जाने की बात भी गांव में प्रचलित रही है।
15 अप्रैल 2025 को यही जमीन उरमाल निवासी शांति लाल जैन के नाम करीब डेढ़ लाख रुपये में बेच दी गई। पंजीयन प्रक्रिया पूरी हुई, दस्तावेज स्वीकार हुए और रजिस्ट्री पर सरकारी मुहर लग गई।
इसके बाद नामांतरण के लिए इश्तिहार बजाड़ी पहुंचा।
इश्तिहार में विक्रेता का नाम और पता देखकर सरपंच यशोदा नेताम ने असहमति जता दी। सरपंच प्रतिनिधि दुर्बल नेताम के मुताबिक, जिस व्यक्ति को जमीन का मालिक बताया गया, वह बताए गए पते पर रहता ही नहीं था। गांव में भी उसे किसी ने भूमि स्वामी के रूप में कभी देखा नहीं। बस यहीं से सरकारी कागजों में दर्ज हरि की पहचान गांव में सवाल बन गई।

सिस्टम ने आधार देखा, गांव ने आदमी खोजा फिर खुल गई पहचान की परत

मामले की पड़ताल में सामने आए तथ्य पंजीयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। रजिस्ट्री दस्तावेज में भूमि स्वामी का नाम हरिसिंह नागेश पिता लक्ष्मण बताया गया है। लेकिन दस्तावेज में दर्ज आधार नंबर की जांच करने पर वह बजाड़ी के वार्ड क्रमांक 2 निवासी हरिराम नागेश पिता जयमल नागेश से जुड़ा बताया गया।
कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। रजिस्ट्री के दौरान अपलोड विक्रेता की तस्वीर की पड़ताल में कथित विक्रेता की पहचान हरिराम के पड़ोसी भंवर लाल नागेश पिता लखन नागेश के रूप में हुई।
यानी आरोपों के मुताबिक जमीन हरिसिंह की, आधार हरिराम का और चेहरा भंवर लाल का
भंवर लाल से जमीन बिक्री के संबंध में सवाल किए जाने पर उसने विक्रय करना स्वीकार करते हुए दावा किया कि उसका उर्फ नाम भी हरिसिंह है। आरोप है कि पिता के नाम में समानता का फायदा उठाकर कथित रूप से आधार कार्ड में छेड़छाड़ की गई।
खरीदार से मिला चेक भी ग्रामीण बैंक में मौजूद खाते के जरिए भुनाए जाने की जानकारी सामने आई है।

पहले बेटी बनाकर जमीन पाने की कोशिश, फिर खुद हरि बनकर बिक्री

इस ढाई एकड़ जमीन की कहानी वर्ष 2025 की रजिस्ट्री से काफी पहले शुरू हो चुकी थी।
जानकारी के अनुसार जमीन से जुड़े वास्तविक हरिसिंह नागेश देवभोग तहसील के कैठपदर निवासी थे। उनकी मार्च 2018 में करीब 70 वर्ष की उम्र में मृत्यु हो चुकी थी।
आरोप है कि मार्च 2022 में भंवर लाल की पत्नी प्रभंजली ने मैनपुर तहसील में फौती दर्ज कराने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। आवेदन में मृत हरिसिंह को अपना पिता बताते हुए राजस्व रिकॉर्ड में नाम चढ़ाने की कोशिश की गई।
लेकिन उस समय भी इश्तिहार जारी हुआ और प्रयास सफल नहीं हो सका।
अब सवाल उठ रहा है कि जब रिश्तेदारी वाला रास्ता बंद हुआ तो क्या इसके बाद पहचान वाला दरवाजा खोजा गया? पत्नी कथित तौर पर बेटी बनकर जमीन तक नहीं पहुंच सकी और तीन साल बाद पति पर खुद हरि बनकर जमीन बेचने का आरोप लग गया।

गांव की एक आपत्ति ने बचाया नामांतरण, अब उप पंजीयक कार्यालय की बारी

मामला सामने आने के बाद देवभोग प्रभारी सहायक पंजीयक अजय चंद्रवंशी ने जांच शुरू कर दी है। उनके मुताबिक संबंधित रजिस्ट्री के समय आधार ई-केवाईसी का प्रावधान नहीं था। प्रस्तुतकर्ता और गवाहों के आधार पर पंजीयन प्रक्रिया पूरी की जाती थी।
फौती दर्ज कराने की कोशिश, राजस्व रिकॉर्ड में नाम-पते की स्थिति, कथित जाली आधार तैयार करने और रजिस्ट्री के दस्तावेज प्रस्तुत करने वाले सभी लोग जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं। प्रथम दृष्टया मामला कूटरचना से जुड़ा माना जा रहा है।

चितेश देवांगन बोले जांच के दौरान कोई शंका नहीं हुई इसलिए कर दी रजिस्ट्री

तत्कालीन सहायक पंजीयक और वर्तमान गरियाबंद तहसीलदार चितेश देवांगन का कहना है कि रजिस्ट्री के समय क्रेता और विक्रेता दोनों से पूछताछ की गई थी। आधार कार्ड देखकर मिलान भी किया गया, लेकिन उस समय किसी प्रकार की शंका नहीं हुई। शंका होती तो पंजीयन रोका जाता। इस पूरे मामले में उप पंजीयक कार्यालय की लापरवाही से भी इंकार नहीं किया जा सकता है
दूसरी ओर सूत्रों के हवाले से उप पंजीयक कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अधिकारी की अनुपस्थिति में ऑपरेटर स्तर पर सत्यापन की चर्चा सामने आई है। जांच में इसकी पुष्टि होना अभी बाकी है।
फिलहाल बजाड़ी की यह कहानी सरकारी डिजिटल व्यवस्था के सामने एक सीधा सवाल छोड़ गई है जिस आदमी को पूरा गांव जमीन मालिक नहीं मानता था, उसे रजिस्ट्री की प्रक्रिया ने मालिक कैसे मान लिया?
.कंप्यूटर, फोटो और दस्तावेजों से लैस सिस्टम कथित नकली हरि को नहीं पकड़ सका, लेकिन गांव पहुंचा कागज का एक इश्तिहार पूरा भंवरजाल खोल गया ।

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