छत्तीसगढ़ के एक जिले की दो तस्वीरें, बार्डर पर तस्करों पर शिकंजा कस रही पुलिस, लेकिन NDPS कोर्ट के लिए राजधानी पर निर्भर जिला ।

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By Sangani

छत्तीसगढ़ के एक जिले की दो तस्वीरें गरियाबंद में NDPS कोर्ट की मांग तेज, एक साल में 10 करोड़ का गांजा जब्त और 117 आरोपी गिरफ्तार,जानिए पुलिस को रायपुर की पेशी से क्यों हो रही परेशानी पढ़े पूरी ख़बर पैरी टाईम्स पर ।

गरियाबंद ओडिशा सीमा से लगा गरियाबंद जिला मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहा है। पुलिस की कार्रवाई में बड़ी मात्रा में गांजा जब्त हो रहा है, आरोपी गिरफ्तार किए जा रहे हैं और तस्करी में इस्तेमाल वाहनों पर भी शिकंजा कसा जा रहा है। लेकिन इसी तस्वीर का दूसरा पहलू यह है कि इन मामलों की न्यायिक प्रक्रिया के लिए गरियाबंद के पास अब तक अपना विशेष NDPS कोर्ट नहीं है। नतीजा यह कि कार्रवाई गरियाबंद में होती है, लेकिन कई मामलों की न्यायिक प्रक्रिया के लिए पुलिस को रायपुर तक सफर करना पड़ता है।

यही गरियाबंद की न्यायिक व्यवस्था की एक जिले की दो तस्वीरें सामने रखता है एक तरफ अपराध के खिलाफ तेज कार्रवाई और दूसरी तरफ उसी कार्रवाई को आगे बढ़ाने के लिए स्थानीय स्तर पर जरूरी न्यायिक सुविधा का अभाव।

छत्तीसगढ़ के एक जिले की दो तस्वीरें

छत्तीसगढ़ के एक जिले की दो तस्वीरें कार्रवाई में आगे, न्यायिक सुविधा में पीछे

ओडिशा सीमा से लगे गरियाबंद में गांजा तस्करी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। सितंबर 2025 से अगस्त 2026 तक जिले में NDPS एक्ट के तहत 58 प्रकरण दर्ज किए गए और 117 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। इस दौरान करीब 1,760 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया, जिसकी कीमत लगभग 10 करोड़ रुपये बताई जा रही है। कार्रवाई के दौरान 28 दोपहिया और 18 चारपहिया वाहन भी जब्त किए गए। देवभोग, अमलीपदर और मैनपुर जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए NDPS मामलों की न्यायिक व्यवस्था को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है।

दूसरी तस्वीर कार्रवाई के बाद लंबा न्यायिक सफर

गरियाबंद में विशेष NDPS कोर्ट नहीं होने के कारण मामलों की सुनवाई के लिए रायपुर जाना पड़ता है। देवभोग और अमलीपदर जैसे दूरस्थ इलाकों से रायपुर की दूरी करीब 200 से 250 किलोमीटर तक है। आरोपियों को पेशी पर ले जाने के लिए पुलिस वाहन और अतिरिक्त बल की व्यवस्था करनी पड़ती है। एक आरोपी को रायपुर ले जाने और वापस लाने में करीब 8 से 10 हजार रुपये तक खर्च आने का दावा किया गया है। लंबी यात्रा में सुरक्षा जोखिम के साथ पुलिस बल का बड़ा हिस्सा परिवहन ड्यूटी में भी लगा रहता है, जिसका असर स्थानीय पुलिसिंग पर पड़ सकता है।

जिला बना, लेकिन न्यायिक ढांचा अब भी अधूरा…

वरिष्ठ अधिवक्ता साबिर मुर्तजा खान के मुताबिक, वर्ष 2006 में अधिवक्ताओं की मांग पर ADJ कोर्ट की स्थापना हुई थी। इसके बाद वर्ष 2011 में गरियाबंद को नया जिला बनाया गया और जिला न्यायालय स्थापित करने का आदेश भी हुआ। हालांकि, भवन और स्टाफ क्वार्टर की कमी के कारण आज तक जिला न्यायालय की स्थापना पूरी तरह नहीं हो सकी।

उन्होंने बताया कि 13 जुलाई को अधिवक्ताओं का प्रतिनिधिमंडल चीफ जस्टिस से मिलने गया था, जहां गरियाबंद की इस समस्या से उन्हें अवगत कराया गया। अधिवक्ताओं की मांग है कि जिले की न्यायिक व्यवस्था को आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के साथ मजबूत किया जाए।

रायपुर कोर्ट में पहले ही केस का बोझ जिसके चलते सुनवाई में होता है विलंब

जिले में नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेस (NDPS) एक्ट के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत (Special Court) नहीं होने के कारण न्यायिक प्रक्रिया में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिले में दर्ज होने वाले सभी मादक पदार्थ संबंधी मामलों की सुनवाई के लिए पुलिस, गवाहों, वकीलों और विचाराधीन बंदियों को देवभोग से लगभग 200 से 250 किलोमीटर दूर रायपुर जाना पड़ता है। इससे न केवल समय और सरकारी संसाधनों की बर्बादी हो रही है, बल्कि त्वरित न्याय की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।

सुनवाई में विलंब रायपुर की विशेष अदालत में पहले से ही मामलों का भारी बोझ है। दूर-दराज से गवाहों और विवेचकों (IO) के समय पर न पहुंच पाने के कारण मामलों के निराकरण में अनावश्यक देरी होती है। स्थानीय वकीलों को कठिनाई जिला अधिवक्ता संघ गरियाबंद के सदस्यों को भी इन मामलों की पैरवी के लिए राजधानी का रुख करना पड़ता है, जिससे स्थानीय स्तर पर विधिक कार्य प्रभावित होता है।

NDPS कोर्ट से बदल सकती है दूसरी तस्वीर

गरियाबंद में विशेष NDPS कोर्ट की स्थापना होने से पुलिस को आरोपियों की पेशी के लिए बार-बार रायपुर जाने की जरूरत कम होगी। इससे समय, ईंधन, वाहन और पुलिस बल की बचत होगी। लंबी दूरी की यात्रा से जुड़े सुरक्षा जोखिम कम होंगे और पुलिस का समय स्थानीय कानून-व्यवस्था तथा अपराध नियंत्रण में लगाया जा सकेगा।

स्थानीय स्तर पर NDPS मामलों की सुनवाई होने से न्यायिक प्रक्रिया को भी गति मिलने की उम्मीद है। साथ ही रायपुर स्थित विशेष न्यायालय पर मामलों का दबाव कम हो सकता है।

अब दोनों तस्वीरों को एक करने की जरूरत

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य में गरियाबंद जिले के समक्ष बने जिलों में गरियाबंद ही ऐसा जिला जहां आज भी NDPS कोर्ट नहीं है जिले की पहली तस्वीर बताती है कि पुलिस मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ लगातार मजबूती से कार्रवाई कर रही है। दूसरी तस्वीर बताती है कि इस कार्रवाई के बाद की न्यायिक प्रक्रिया के लिए अभी भी जिले को बाहर का रुख करना पड़ रहा है।

ऐसे में गरियाबंद NDPS कोर्ट की मांग केवल एक नई अदालत खोलने की मांग नहीं, बल्कि पुलिस कार्रवाई, न्यायिक प्रक्रिया और सरकारी संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल को एक ही जिले में जोड़ने की पहल है। जिले में NDPS कोर्ट और मजबूत जिला न्यायिक ढांचा तैयार होता है तो गरियाबंद की ये दोनों तस्वीरें एक-दूसरे की पूरक बन सकती हैं।

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