गरियाबंद के जंगलों की सुरक्षा का मॉडल बना देशभर की मिसाल उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व को नेक्सस ऑफ गुड वार्षिक पुरस्कार 2026 से नवाजा गया, सैटेलाइट, ड्रोन और खुफिया तंत्र के सहारे वन्यजीव अपराधों से लेकर अवैध खनन और तस्करी तक पर शिकंजा कसने की पहल को मिली राष्ट्रीय पहचान।
गरियाबंद जंगलों की सुरक्षा अब सिर्फ गश्त लगाने और शिकारियों को पकड़ने तक सीमित नहीं रह गई है। बदलते दौर में वन और वन्यजीवों को बचाने के लिए तकनीक, खुफिया जानकारी और संगठित अपराधों के नेटवर्क तक पहुंचना जरूरी हो गया है। इसी सोच के साथ विकसित किए गए अभिनव लैंडस्केप सिक्योरिटी मॉडल ने छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। रिजर्व को इस नवाचार के लिए प्रतिष्ठित 5वें नेक्सस ऑफ गुड वार्षिक पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया है।

गरियाबंद के जंगलों की सुरक्षा का मॉडल बना देशभर की मिसाल की सुरक्षा के लिए तकनीक और खुफिया तंत्र का इस्तेमाल
इस मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता इसका बहुआयामी स्वरूप है। इसमें सैटेलाइट इमेजरी, ड्रोन सर्विलांस, GIS मैपिंग और डिजिटल साक्ष्यों का इस्तेमाल कर संवेदनशील वन क्षेत्रों की निगरानी की जाती है। इसके साथ ही मैदानी स्तर पर खुफिया सूचनाओं का नेटवर्क विकसित कर विशेष अभियान चलाए जाते हैं।
रिजर्व की इस कार्यप्रणाली में अवैध शिकार, वन भूमि पर अतिक्रमण, मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध हथियारों के नेटवर्क, विस्फोटक सामग्री के जरिए वन्यजीवों के शिकार, अंतरराज्यीय लकड़ी तस्करी और अवैध खनन जैसी गतिविधियों को एक साथ निशाने पर रखा गया है।
दूसरे राज्यों की एजेंसियों से भी समन्वय
संगठित अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई के लिए उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की टीम ने वन विभाग तक सीमित रहने के बजाय अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ भी समन्वय स्थापित किया है। वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB), राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) और राज्य पुलिस जैसी एजेंसियों के सहयोग से अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
इसका उद्देश्य केवल किसी एक अपराधी को पकड़ना नहीं, बल्कि उन पूरे नेटवर्क तक पहुंचना है, जिनकी वजह से जंगल, वन्यजीव और प्राकृतिक संसाधन लगातार खतरे में रहते हैं।
प्रतिष्ठित जूरी ने किया चयन
इस पुरस्कार के लिए चयन पूर्व UPSC अध्यक्ष दीपक गुप्ता की अध्यक्षता वाली प्रतिष्ठित जूरी ने किया। वर्ष 2026 में देशभर से 26 व्यक्तियों और संस्थाओं को उनके नवाचारपूर्ण एवं अनुकरणीय कार्यों के लिए सम्मानित किया गया है।
नेक्सस ऑफ गुड फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अनिल स्वरूप ने व्यक्तिगत रूप से जूरी के निर्णय की जानकारी देते हुए टाइगर रिजर्व के उप संचालक और पूरी टीम को बधाई दी।
वनकर्मियों की मेहनत को मिला राष्ट्रीय सम्मान
यह पुरस्कार किसी एक अधिकारी या विभाग की उपलब्धि नहीं, बल्कि उन वनकर्मियों और मैदानी टीमों के समर्पण की पहचान है, जो दुर्गम जंगलों में कठिन परिस्थितियों के बीच वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा में जुटे रहते हैं।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की यह उपलब्धि बताती है कि यदि आधुनिक तकनीक, मजबूत खुफिया तंत्र, स्थानीय स्तर पर सहभागिता और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल हो तो पर्यावरणीय अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
गरियाबंद और धमतरी के जंगलों से निकला यह सुरक्षा मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा और पहचान हासिल कर चुका है। यह सम्मान निश्चित रूप से उन वनकर्मियों के हौसले को बढ़ाएगा, जिनकी मेहनत से जंगलों की प्राकृतिक विरासत और वन्यजीवों का भविष्य सुरक्षित रखने की लड़ाई लगातार जारी है।