संपादक पैरी टाईम्स 24×7 डेस्क गरियाबंद
उदंती सीता नदी टाइगर रिजर्व में अतिक्रमण की बड़ी साजिश नाकाम कोंडागांव के 53 आरोपी गिरफ्तार हाथी और तेंदुए के रहवास में कुल्हाड़ी लेकर जंगल साफ करने पहुंचे ग्रामीणों को भेजा गया जेल जानिए कैसे वन विभाग की टीम ने घेराबंदी कर दबोचा और क्या है सजा के प्रावधान जाने पूरा मामला पैरी टाईम्स पर
गरियाबंद जंगल में बाघ रहे न रहे पर अतिक्रमण करने वालों का स्वैग हमेशा बरकरार रहता है ताजा मामला उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व का है जहां कोंडागांव के करीब 15 गांवों से आए 53 पर्यावरण प्रेमियों ने सोचा कि टाइगर रिजर्व का कोर एरिया खाली पड़ा है क्यों न वहां हल चला दिया जाए लेकिन अफसोस खेती शुरू होने से पहले ही वन विभाग ने उन्हें जेल की सरकारी रोटियों तक पहुंचा दिया ।

उदंती सीता नदी में प्लानिंग ऐसी कि मास्टरमाइंड भी शरमा जाएं
कोंडागांव के इन 53 ग्रामीणों की हिम्मत की दाद देनी होगी उन्हें लगा कि हाथी और तेंदुए शायद उनके मेहमान बनेंगे हाथ में 53 कुल्हाड़ियां लेकर ये महानुभाव महानदी के कैचमेंट एरिया में लैंड स्केपिंग यानी जंगल की सफाई करने पहुंचे थे उद्देश्य नेक था जंगल काटकर वहां फसल उगाना ताकि वन्यप्राणियों को भी पता चले कि असली बाघ इंसान ही है ।
वन विभाग ने बिगाड़ा पिकनिक का मजा
जैसे ही सीतानदी के घोटबेड़ा परिसर में कुल्हाड़ियों की आवाज गूंजी वन विभाग की कबाब में हड्डी टीम एसडीओ और रेंजर वहां धमक पड़ी बेचारे ग्रामीणों को लगा था कि घने जंगल में उन्हें कौन देखेगा लेकिन टाइगर रिजर्व की संयुक्त टीम ने ऐसी घेराबंदी की कि 53 के 53 भावी किसान अब धमतरी कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं
7 साल का सरकारी हॉलिडे मिलने के आसार
वन विभाग ने भी स्वागत में कोई कसर नहीं छोड़ी वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम की इतनी धाराएं लगा दी हैं कि अब ये लोग अगले 3 से 7 साल तक सलाखों के पीछे बैठकर यह शोध कर पाएंगे कि जंगल में पेड़ काटना स्वास्थ्य के लिए कितना हानिकारक है माननीय मजिस्ट्रेट साहब ने भी इनके साहस को देखते हुए फिलहाल 14 दिनों के लिए जेल का रिमांड थमा दिया है
टाइगर रिजर्व का संदेश अतिथि देवो भव पर कुल्हाड़ी छोड़कर
पिछले 3 सालों में विभाग ने 750 हेक्टेयर से ऐसे कई साहसियों को खदेड़ा है विभाग ने साफ कर दिया है कि अगर आप कुल्हाड़ी लेकर टाइगर रिजर्व में घुसेंगे तो टाइगर मिले न मिले जेल की कोठरी जरूर मिलेगी पते की बात अगर कोंडागांव के इन भाइयों ने इतनी मेहनत अपनी ही जमीन पर की होती तो शायद आज फसल काट रहे होते न कि जेल की सलाखें गिन रहे होते ।