सड़क पर बिछी अर्थी, रोती महिलाएं और जुटी भीड़ सड़क पर निकली एक ऐसी अर्थी, जिसे देखकर लोग रुक गए, आखिर किसकी थी यह शव यात्रा और क्यों उमड़ी भीड़? सच जानकर हर कोई हैरान रह गया।पढ़े पूरी ख़बर पैरी टाईम्स पर
गरियाबंद/फिंगेश्वर आमतौर पर शव यात्रा किसी इंसान की अंतिम विदाई के लिए निकाली जाती है, लेकिन फिंगेश्वर में शुक्रवार को एक ऐसी अर्थी निकली जिसने राह चलते लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। यह किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि समाज को धीरे-धीरे निगल रहे नशे की प्रतीकात्मक शव यात्रा थी।

सड़क पर बिछी अर्थी, रोती महिलाएं और जुटी भीड़,अनोखा जागरूकता अभियान बना चर्चा का विषय
गायत्री परिवार फिंगेश्वर द्वारा आयोजित इस अनोखे जागरूकता अभियान में कार्यकर्ताओं ने नशे की प्रतीकात्मक अर्थी कंधों पर उठाकर नगर के प्रमुख मार्गों से यात्रा निकाली। इस दौरान लोगों को नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दुष्परिणामों की जानकारी दी गई।
अभियान का उद्देश्य लोगों के मन में गहरी छाप छोड़ना
अभियान का उद्देश्य केवल संदेश देना नहीं था, बल्कि लोगों का ध्यान उस समस्या की ओर आकर्षित करना था, जो कई परिवारों की खुशियां छीन रही है। यात्रा के दौरान कार्यकर्ताओं ने बताया कि नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ परिवार और समाज की सामाजिक संरचना को भी कमजोर करता है।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भी इस पहल की सराहना की। कई नागरिकों का कहना था कि जब पारंपरिक समझाइश असर नहीं कर रही हो, तब ऐसे रचनात्मक और प्रतीकात्मक प्रयास लोगों के मन पर गहरी छाप छोड़ते हैं।
अभियान को मिला लोगो का भारी समर्थन
दिलचस्प बात यह रही कि जहां एक ओर युवा सेल्फी लेते नजर आए, वहीं दूसरी ओर बुजुर्ग इस अभियान के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की बात करते दिखाई दिए। कुछ लोगों ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर नशे की अर्थी सचमुच उठ जाए, तो कई घरों में खुशियों का पुनर्जन्म हो जाएगा।
गायत्री परिवार के पदाधिकारियों ने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य नशामुक्त समाज का निर्माण करना है। उन्होंने लोगों से नशे से दूर रहने और अपने परिवार तथा समाज को स्वस्थ एवं सुरक्षित बनाने में सहयोग करने की अपील की।
गायत्री परिवार ने दिखाया नशे के नुकसान का असली आईना
फिंगेश्वर की निकाली गई यह प्रतीकात्मक शव यात्रा केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने वाला संदेश बनकर सामने आई, जिसने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर असली अर्थी किसकी निकलनी चाहिए इंसान की या नशे की?