गरियाबंद में रेत का अवैध उत्खनन..सीएम की सख्ती पर भारी चौबेबांधा का रेत सिंडिकेट..आखिर क्यों शुरू हो जाता है खनन ? देखे वीडियो ।

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By Sangani

गरियाबंद में रेत का अवैध उत्खनन चौबेबांधा रेत खदान में कथित अवैध खनन पर खनिज विभाग ने एक मशीन और एक हाइवा जब्त की, लेकिन खनिज विभाग की इस कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे है जाने क्यों पढ़िए Pairi Times 24×7 की विशेष रिपोर्ट।

गरियाबंद मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश, एनजीटी के नियम, खनिज विभाग की कार्रवाई और प्रशासनिक बैठकों की लंबी फेहरिस्त के बावजूद यदि कोई चीज़ चौबेबांधा में सबसे ज्यादा सक्रिय दिखाई दे रही है, तो वह है अवैध रेत खनन,हालात ऐसे हैं कि मानो प्रशासन और खनन माफियाओं के बीच कोई अनकहा समझौता चल रहा हो आप कार्रवाई कीजिए, हम थोड़ी देर रुक जाते हैं, फिर काम शुरू कर देंगे।

गरियाबंद में रेत का अवैध उत्खनन

गरियाबंद में रेत का अवैध उत्खनन दौरे पर आये सीएम ने दिए थे कड़े निर्देश

मुख्यमंत्री के गरियाबंद दौरे के दौरान अवैध रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर कड़े निर्देश दिए गए थे। उम्मीद थी कि प्रशासन इन निर्देशों को गंभीरता से लेगा और जिले में चल रहे अवैध खनन पर अंकुश लगेगा। लेकिन मुख्यमंत्री के लौटते ही चौबेबांधा रेत खदान में गतिविधियां फिर से शुरू हो गईं। स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार अब तो स्थिति यह है कि पहले जहां खनन केवल रात के अंधेरे में होता था, वहीं अब दिनदहाड़े भी नदी का सीना चीरकर रेत निकाली जा रही है।

एनजीटी के नियमों पर सवाल…

एक तरफ स्वीकृत कुरुसकेरा रेत खदान को एनजीटी के नियमों के तहत 9 जून से 15 अक्टूबर तक बंद कर दिया गया है। दूसरी तरफ चौबेबांधा में कथित रूप से अवैध रूप से संचालित खदान पर नियमों का कोई असर दिखाई नहीं दे रहा। सवाल यह उठ रहा है कि जब वैध खदानें नियमों का पालन कर रही हैं तो अवैध खदानों को यह विशेष छूट आखिर किसके संरक्षण में मिल रही है?

कार्रवाई या औपचारिकता ?

पिछले कई दिनों से लगातार जारी अवैध उत्खनन और शुक्रवार शाम को चौबेबाँधा रेत खदान से रेत निकालने का वीडियो सामने आया था इधर लगातार शिकायतों और वीडियो सामने आने के बाद खनिज विभाग ने को मौके से हर बार की तरह केवल एक चैन माउंटेन मशीन और एक हाइवा वाहन मिला और हर बार की तरह इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे है खनिज विभाग 11 तारीख को कार्यवाही की बात कर रहा है जबकि जो वीडियो सामने आए है वह 12 तारीख की शाम का है, हालांकि विभागीय रिकॉर्ड में यह कार्रवाई निश्चित रूप से दर्ज हो गई होगी, लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि टीम के लौटते ही कुछ समय बाद खदान में फिर से गतिविधियां शुरू हो गईं।
यह पहला मौका नहीं बताया जा रहा जब विभागीय टीम कार्रवाई कर वापस लौटी हो और उसके बाद खनन दोबारा शुरू हो गया हो। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या कार्रवाई वास्तव में अवैध खनन रोकने के लिए हो रही है या केवल कागजी उपलब्धि दिखाने के लिए?

प्रशासन मौन, नदी परेशान…

स्थानीय लोगों का कहना है कि खदान चालू होने की जानकारी ट्रैक्टर चालकों, हाइवा मालिकों, ग्रामीणों और पत्रकारों तक को है, लेकिन प्रशासन बार-बार यही कहता है कि खदान बंद है। यदि खदान बंद है तो फिर वहां से निकलती रेत, चलती मशीनें और वायरल होते वीडियो आखिर किस कहानी का हिस्सा हैं?
खनिज विभाग के नए प्रावधानों के अनुसार ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज की जा सकती है। संबंधित ग्राम पंचायत के सरपंच को भी धारा 80 के तहत नोटिस जारी करने का प्रावधान है। जरूरत पड़ने पर अवैध खनन स्थल को स्थायी रूप से बंद भी कराया जा सकता है। लेकिन अब तक ऐसी कोई कठोर कार्रवाई सामने नहीं आई है।

नदी पूछ रही है जवाब…

चौबेबांधा की नदी इन दिनों शायद यही सोच रही होगी कि उसे बचाने के लिए बनाए गए नियम आखिर लागू कब होंगे। एक तरफ प्रशासन कार्रवाई के दावे कर रहा है, दूसरी तरफ खनन माफिया लगातार सक्रिय दिखाई दे रहे हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि मुख्यमंत्री के निर्देशों का वास्तविक असर जमीन पर कब दिखाई देता है या फिर चौबेबांधा में कार्रवाई और अवैध खनन का यह आंख-मिचौली खेल आगे भी इसी तरह चलता रहेगा।

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