पैरी टाईम्स 24×7 डेस्क गरियाबंद
गरियाबंद कृषि महाविद्यालय साहब कॉलेज है या शटलकॉक फिंगेश्वर कृषि महाविद्यालय विवाद में फंसी विधायक की साख और कलेक्टर गरियाबंद का नॉट रिचेबल रवैया जनता की चेतावनी और प्रशासनिक लापरवाही पर तीखा कटाक्ष पूरी रिपोर्ट देखें पैरी टाईम्स पर।
गरियाबंद राजनीति में वादे हवा की तरह होते हैं आते हैं महसूस होते हैं और फिर गायब हो जाते हैं फिंगेश्वर के कृषि महाविद्यालय का मामला भी अब इसी हवा में झूल रहा है जनता हैरान है कि जिस विधायक को उन्होंने अपनी आवाज बनाकर सदन भेजा था उनके रहते हुए आखिर प्रशासन ने फिंगेश्वर का हक किरवई की झोली में कैसे डाल दिया

गरियाबंद कृषि महाविद्यालय विधायक जी की आवाज या सिर्फ खानापूर्ति
हाल ही में जब नाराज जनता राजिम विधायक के निवास पहुंची तो विधायक जी ने यह कहा कि कलेक्टर के आदेश पर एक टीम फिंगेश्वर गई थी टीम ने रिपोर्ट दी कि फिंगेश्वर में पर्याप्त जगह नहीं है इसलिए किरवई को चुन लिया गया । मैं इस मामले में कलेक्टर से बात करूंगा सवाल यह उठता है कि क्या विधायक जी इतने बेबस हैं कि उनके विधानसभा क्षेत्र की किस्मत एक छोटी सी प्रशासनिक टीम की रिपोर्ट तय कर रही है जनता पूछ रही है विधायक जी सदन में दहाड़ना तो ठीक है लेकिन धरातल पर आपकी पकड़ इतनी ढीली क्यों है कि प्रशासन आपकी नाक के नीचे आदेश बदल देता है क्या यह वाकई प्रशासनिक मजबूरी थी या फिर जनता को शांत करने के लिए विधायक जी का एक सुरक्षित एग्जिट रूट
नॉट रीचेबल जिला प्रशासन
इस पूरे मामले के असली पटकथा लेखक कलेक्टर भगवान दास उइके अपनी ही दुनिया में मस्त हैं जब इस संवेदनशील मुद्दे पर उनका पक्ष जानने के लिए उन्हें कॉल किया गया तो उन्होंने फोन उठाना भी जरूरी नहीं समझा गरियाबंद में कलेक्टर साहब से बात करना अदृश्य शक्तियों से संपर्क साधने जैसा है फोन बजता रहता है लेकिन साहब मौन साधना में लीन रहते हैं यह गरियाबंद का पुराना रिकॉर्ड है साहब न कॉल उठाते हैं न कॉल बैक करते हैं शायद उनके प्रोटोकॉल में जनता और मीडिया के सवालों का जवाब देना आउट ऑफ सिलेबस है जब जिले का मुखिया ही साइलेंट मोड पर हो तो विकास की घंटी भला कैसे बजेगी
जनता का अल्टीमेटम पहिए थमेंगे
फिंगेश्वर की जनता अब विधायक के आश्वासनों और कलेक्टर की फाइलों के बीच पिसने को तैयार नहीं है उनकी मांगें साफ़ हैं किरवई का आदेश रद हो फिंगेश्वर की जमीन पर ही कॉलेज बने विधायक की जवाबदेही केवल सदन में बोलना काफी नहीं परिणाम चाहिए अगर कागजों का खेल बंद नहीं हुआ तो सड़कों पर संग्राम होगा
जनता देख रही शासन प्रशासन एक दूसरे के पाले में गेंद डाल रहे
ऐसा लगता है कि प्रशासन फिंगेश्वर को एक ऐसी शटलकॉक समझ बैठा है जिसे विधायक और कलेक्टर मिलकर एक दूसरे के पाले में फेंक रहे हैं एक तरफ जनभावनाओं का सैलाब है तो दूसरी तरफ नॉट रीचेबल साहब का अहंकार अब देखना यह है कि क्या यह विवाद की फसल फिंगेश्वर में लहलहाएगी या आश्वासनों की फाइल में दबकर दम तोड़ देगी ।
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