संपादक पैरी टाईम्स 24×7 डेस्क गरियाबंद
दुर्ग अफीम खेती मामला भाजपा नेता के खेत में उगी चुनीवी अफीम,10 एकड़ की इस काली खेती पर गरियाबंद कांग्रेस ने मोर्चा खोलते हुए फूंका पुतला और मांगा गृहमंत्री का इस्तीफा,देखिए कैसे सुशासन के राज में उड़ता छत्तीसगढ़ बनाने की तैयारी हो रही है।
गरियाबंद राजनीति में अक्सर आपने सुना होगा कि नेता वोटों की फसल काटते हैं, लेकिन दुर्ग के समोदा गाँव में भाजपा के एक प्रगतिशील नेता ने इस कहावत को कुछ ज्यादा ही गंभीरता से ले लिया। उन्होंने अनाज के बजाय सीधे 10 एकड़ में अफीम की ही खेती लहलहा दी। इस नशीले खुलासे के बाद अब गरियाबंद की सड़कों पर सियासत का धुंआ उठ रहा है। जिला कांग्रेस ने मोर्चा खोलते हुए न केवल नारेबाजी की, बल्कि प्रधानमंत्री का पुतला फूंक कर गृहमंत्री से नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की मांग कर डाली है

दुर्ग अफीम खेती मामला संयोजक जी का मल्टी-टास्किंग अवतार राइस मिल में अफीम का तड़का?
कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुखचंद बेसरा ने प्रेस वार्ता में तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के सुशासन का मॉडल अब खेतों में अनाज नहीं, बल्कि सरकारी संरक्षण वाली अफीम उगा रहा है। आरोपी विनायक ताम्रकार कोई मामूली कार्यकर्ता नहीं, बल्कि भाजपा के राइस मिल प्रसंस्करण प्रकल्प के प्रदेश संयोजक हैं। जनता अब यह सोचकर हैरान है कि क्या प्रदेश संयोजक राइस मिल में अब चावल के साथ अफीम मिलने की कोई गुप्त योजना चला रहे है
जब आपकी तस्वीरें केंद्रीय मंत्रियों और प्रदेश के दिग्गज नेताओं के साथ सोशल मीडिया की शोभा बढ़ा रही हों, तो 10 एकड़ में अफीम उगाना शायद आत्मनिर्भर भारत का ही कोई अघोषित प्रोजेक्ट होगा- सुखचंद बेसरा का तीखा हमला

उड़ता छत्तीसगढ़ की तैयारी पंजाब और गुजरात को पछाड़ने की होड़
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा के राज में छत्तीसगढ़ अब नशे के मामले में पंजाब और गुजरात जैसे राज्यों को पीछे छोड़ने की सराहनीय कोशिश कर रहा है। शहरों के बाहरी इलाकों में स्थित कैफे अब युवाओं को कॉफी नहीं, बल्कि नशा परोसने के केंद्र बन चुके हैं। व्यंग्य करते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पिछली सरकार में जहाँ हुक्का बारों पर ताले जड़े गए थे, वहीं अब डबल इंजन की सरकार में नशा माफिया को शायद ‘ग्रीन कॉरिडोर’ मिल गया है।
पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि खाकी अब अपराध रोकने के बजाय शायद सहयोगी की भूमिका में ज्यादा सहज महसूस कर रही है नैतिकता और जिम्मेदारी जैसे शब्द अब केवल डिक्शनरी की शोभा बढ़ा रहे हैं, इसीलिए गृहमंत्री के इस्तीफे की मांग की जा रही है।

सत्ता का काला सच और सोशल मीडिया की चमक
इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प पहलू वह तस्वीरें हैं, जिनमें आरोपी नेता दिग्गज मंत्रियों और सांसदों के साथ मुस्कराते हुए नजर आ रहे हैं। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि बिना सत्ताधीशों के संरक्षण के, राजधानी की नाक के नीचे इतनी बड़ी मात्रा में ड्रग्स और अफीम का धंधा कैसे पनप रहा है? क्या यह ‘सबका साथ, सबका विकास’ का कोई नया और नशीला संस्करण है?
कांग्रेस की आगामी रणनीति
गरियाबंद कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि यह विरोध केवल पुतला दहन तक सीमित नहीं रहेगा। जब तक इस काली खेती के पीछे बैठे असली चेहरों का नकाब नहीं उतरता, तब तक सड़क से सदन तक लड़ाई जारी रहेगी। अब देखना यह है कि भाजपा अपने इस ‘होनहार’ पदाधिकारी की करतूतों पर क्या सफाई देती है या फिर इसे भी ‘विपक्ष की साजिश’ बताकर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।