सूंघते-सूंघते पहुंचा जंगल का जासूस! वरुण जैन की टीम ने तालाब, मंदिर और खेतों से ढूंढ निकाली छुपाई गई सागौन की लकड़ियां

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By Sangani

उदंती सीता नदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरुण जैन के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने साहेबिन कछार में बड़ी कार्रवाई कर 4 से 5 घन मीटर अवैध सागौन, साल और बीजा की लकड़ियां जब्त कीं। स्निफर डॉग की मदद से तालाब, मंदिर और खेतों में छिपाई गई लकड़ियां बरामद।

गरियाबंद जिले के उदंती सीता नदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के साहेबिन कछार में मंगलवार को ऐसा दृश्य देखने को मिला, मानो कोई फिल्मी छापेमारी चल रही हो। फर्क सिर्फ इतना था कि यहां हीरो की भूमिका में थे उपनिदेशक वरुण जैन और उनकी संयुक्त वन विभाग टीम, जबकि असली खोजी का काम कर रहा था एक प्रशिक्षित स्निफर डॉग।
बताया जा रहा है कि कार्रवाई की भनक लगते ही कुछ ग्रामीणों ने अवैध लकड़ियों और तैयार फर्नीचर को अलग-अलग स्थानों पर छिपा दिया था। किसी ने खेत को सुरक्षित ठिकाना समझा, तो किसी ने तालाब और मंदिर परिसर को। लेकिन शायद उन्हें अंदाजा नहीं था कि वन विभाग इस बार सिर्फ पैदल नहीं, बल्कि “सूंघकर” भी खोज करने वाला है।

तालाब, मंदिर और खेत… जहां-जहां छुपी थी लकड़ी, वहां-वहां पहुंचा स्निफर डॉग

उपनिदेशक वरुण जैन के नेतृत्व में गठित संयुक्त टीम ने साहेबिन कछार क्षेत्र में व्यापक तलाशी अभियान चलाया। टीम के साथ मौजूद स्निफर डॉग ने कई स्थानों पर छिपाई गई लकड़ियों का पता लगाया।
कार्रवाई के दौरान लगभग 4 से 5 घन मीटर अवैध लकड़ी जब्त की गई। इनमें सबसे अधिक मात्रा सागौन (टीक) की बताई जा रही है। इसके अलावा साल और बीजा प्रजाति की लकड़ियां भी बरामद हुई हैं। टीम ने मौके से कुछ तैयार फर्नीचर भी जब्त किए हैं।

5 जून की कार्रवाई से खुला था पूरा राज

उपनिदेशक वरुण जैन ने बताया कि 5 जून को भी वन विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब ढाई घन मीटर अवैध लकड़ी जब्त की थी। उस दौरान एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया था।
पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर आगे जांच बढ़ाई गई और उसी कड़ी में साहेबिन कछार में यह बड़ी कार्रवाई की गई। जांच में मिले इनपुट इतने सटीक थे कि वन विभाग सीधे उन ठिकानों तक पहुंच गया जहां लकड़ियां छिपाई गई थीं।

वरुण जैन ग्रामीणों से भी आगे निकले

जंगल में शायद यह संदेश तेजी से फैल रहा है कि “लकड़ी छुपाने के नए-नए तरीके खोजो।” लेकिन दूसरी तरफ वन विभाग भी तकनीक, सूचना तंत्र और स्निफर डॉग के साथ मैदान में उतर चुका है। अब सवाल यह है कि अगली बार अवैध लकड़ी छुपाने वाले नया ठिकाना चुनेंगे या फिर जंगल की संपदा को जंगल में ही छोड़ना सीखेंगे?
फिलहाल साहेबिन कछार की कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि वन विभाग की नजरों से बचना आसान नहीं है, खासकर तब जब टीम के साथ एक ऐसा खोजी भी हो जो बोलता कम और सूंघता ज्यादा है।

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