गरियाबंद खनिज विभाग में डिजिटल विभीषण ,जानिए कैसे विभाग के अंदर बैठा एक छोटा कर्मचारी छापेमारी की लाइव लोकेशन रेत माफिया को भेजकर शासन को लगा रहा लाखों का चूना, पढ़ें पूरी रिपोर्ट पैरी टाईम्स पर ।
गरियाबंद कहते हैं कि जब सैंया भए कोतवाल, तो डर काहे का? लेकिन गरियाबंद खनिज विभाग में मामला थोड़ा उल्टा है। यहाँ साहब तो छुट्टी पर हैं, और अदना सा कर्मचारी कोतवाल बना बैठा है। जिले में इन दिनों रेत के अवैध कारोबार का ऐसा डिजिटल नेटवर्क चल रहा है कि विभाग की छापेमारी टीम पहुंचने से पहले ही माफिया को लोकेशन मिल जाती है। नतीजा? शासन को रोजाना लाखों का चूना और अधिकारियों के हाथ सिर्फ खाली सूखी रेत।

गरियाबंद खनिज विभाग की मैम साहब छुट्टी पर, विभाग सिस्टम के भरोसे
गरियाबंद खनिज विभाग में इन दिनों गजब का तालमेल देखने को मिल रहा है। नियमित जिला अधिकारी का तबादला हुआ, नई महिला अधिकारी आईं, लेकिन वे वर्तमान में छुट्टी पर हैं। अब कमान इंस्पेक्टर और नए नवेले अधिकारियों के पास है, जिन्हें जिले के भूगोल का शायद उतना इल्म नहीं जितना विभाग के उस खास छोटे कर्मचारी को है, जो माफियाओं का गूगल मैप बना हुआ है।
सूत्र बताते हैं कि जैसे ही गरियाबंद से छापेमारी टीम की गाड़ी स्टार्ट होती है, इस विभीषण का फोन घनघना उठता है। जब तक टीम मौके पर पहुंचती है, चैन माउंटेन मशीनें और गाड़ियां ऐसे गायब हो जाती हैं जैसे गधे के सिर से सींग और जैसे ही टीम बैरंग लौटती है, फिर से खेल शुरू हो जाता है। अब आप सोच सकते है इस छोटे से कर्मचारी कैसे पूरे जिला प्रशासन को अपनी उंगलियों पर नचा रखा है ।
युवा नेता को सत्ता का रसूख और मारपीट वाला इतिहास
खबर तो यह भी है कि इस पूरे खेल के पीछे सत्ता पक्ष के उन कथित युवा रसूखदारों का हाथ है, जिनका नाम अक्सर सुर्खियों में रहता है। चर्चा है कि पितईबंध खदान का संचालन वही माननीय कर रहे हैं, जिन्होंने कुछ समय पहले राजिम के एक पत्रकार साथी के साथ अपनी ताकत का प्रदर्शन किया था।
अब चूंकि सत्ता का हाथ सिर पर है और विभाग का छोटा प्यादा वजीर बना बैठा है, तो जनप्रतिनिधि की आड़ में लगे है शासन को लूटने में ।
इसके अलावा चौबेबांधा, नागझर और पितईबंध की खदानों से रेत की चोरी डंके की चोट पर हो रही है। चालाकी देखिए कि पितईबंध से रेत निकालकर रायपुर के रास्ते भेजी जा रही है, ताकि गरियाबंद प्रशासन की नजरों से बचा जा सके।
प्रशासन का मौन व्रत और राजस्व की होली
हैरानी की बात यह है कि अवैध खनन की शिकायतों पर जिम्मेदार अधिकारी फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझते,नए अधिकारी होने का फायदा उठाकर विभाग के ही कुछ लोग शासन के राजस्व की होली जला रहे हैं। जब रक्षक ही भक्षक के साथ व्हाट्सएप ग्रुप में एक्टिव हो, तो फिर गरियाबंद की नदियों का भगवान भी कुछ नहीं कर सकते है।
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