गरियाबंद खनिज विभाग का नया कारनामा, हाथ आई 10 हाइवा और 3 चैन माउंटेन मशीनें आखिर कहाँ गुम हो गईं ? रहमदिली या रेत के रसूख के आगे टेके घुटने ?

Sangani

By Sangani

संपादक पैरी टाईम्स 24×7 डेस्क गरियाबंद

गरियाबंद खनिज विभाग का नया कारनामा हथखोज में 10 हाइवा और 3 चैन माउंटेन मशीनों को पकड़ने के बाद भी खनिज विभाग बैरंग क्यों लौटा ? क्या ये विभाग की नाकामी है या किसी बड़ी मिलीभगत का हिस्सा ?

गरियाबंद कहते हैं कि कर्तव्य की राह पर चलते हुए कभी-कभी अदृश्य हो जाना भी एक कला है, और इस कला में गरियाबंद का खनिज विभाग धीरे-धीरे विश्वविद्यालई स्तर की दक्षता हासिल कर रहा है। ताजा मामला फिंगेश्वर ब्लॉक के हथखोज रेत खदान का है, जहाँ विभाग की टीम कार्रवाई के नाम पर पिकनिक मनाने गई थी या फिर सिर्फ मौसम का हाल जानने, यह अब चर्चा का विषय बन गया है।

गरियाबंद खनिज विभाग का नया कारनामा

गरियाबंद खनिज विभाग का नया कारनामा मोबाइल बंद, पर किस्मत खुली!

​सूत्रों की मानें तो इस बार विभाग ने पैरी टाईम्स की कल की खबर जिसमें बताया कि विभाग का विभीषण कैसे कार्यवाही की जानकारी लीक कर रहा है जानने के बाद पूरी गोपनीयता बरतने का स्वांग रचा था,

कर्मचारियों और अधिकारियों के मोबाइल फोन बंद थे शायद इसलिए ताकि खनन माफियाओं को शुभकामनाएं न भेज सकें। लेकिन विडंबना देखिए, फोन बंद होने के बावजूद अदृश्य शक्तियों ने रेत खदान तक यह खबर पहुँचा ही दी कि सरकारी मेहमान आ रहे हैं।

नए खनिज इंस्पेक्टर की अगुवाई में गई थी टीम ?

​चर्चा है कि हथखोज घाट पर टीम नए खनिज इंस्पेक्टर की अगुवाई में गई थी और मौके पर लगभग 10 हाइवा और 3 चैन माउंटेन मशीनें अवैध उत्खनन की सेवा में लीन पाई गईं। कायदे से यहाँ कार्रवाई का चाबुक चलना था, लेकिन हुआ इसके ठीक उलट, सूत्रों का दावा है कि टीम वहां पहुँची, मशीनों के दर्शन किए और फिर अतिथि देवो भव। की परंपरा को निभाते हुए बिना किसी लिखा-पढ़ी के बैरंग लौट आई।

क्रेडिट की जंग और महासमुंद का भूत

​इस पूरे घटनाक्रम में सबसे हास्यास्पद मोड़ तब आया, जब गरियाबंद के जिम्मेदारों ने ऊपरी गलियारों में यह ज्ञान वर्धन किया कि कार्रवाई तो महासमुंद की टीम ने की है। अब इसे विभाग की उदारता कहें या अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का कौशल, कि वे अपनी संभावित कार्रवाई का श्रेय पड़ोसी जिले को दे रहे थे। हालांकि, जब महासमुंद के अधिकारी फागुलाल नागेश (जो पूर्व में गरियाबंद रह चुके है ) इस सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने साफ कह दिया साहब, हमें तो पता ही नहीं कि हम गरियाबंद में कब कार्रवाई कर आए ।

सवालों के घेरे में जिम्मेदारों की चुप्पी

​एक छोटा सा वीडियो भी गलियारों में तैर रहा है, जिसे हथखोज खदान का बताया जा रहा है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी भविष्य के गर्त में है। इस पूरे महासंग्राम पर जब खनिज इंस्पेक्टर कोमल ध्रुव का पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो हमेशा की तरह उनका फोन मौन व्रत पर मिला। आखिर व्यस्तता भी कोई चीज होती है, और जब मामला रेत और रसूख का हो, तो चुप्पी ही सबसे सुरक्षित ढाल मानी जाती है।

रात 1 बजे के बाद शुरू होता है रेत का असली खेल

जिले के रेत सिंडिकेट का टाइम-टेबल भी बड़ा दिलचस्प है। गरियाबंद के चौबेबांधा, नागझर और पिताइबन्ध जैसे इलाकों में अवैध रेत खदानों का साम्राज्य फल-फूल रहा है। यहाँ विभाग की कार्यशैली किसी शिफ्ट की तरह चलती है। जिम्मेदार खनिज अधिकारी रात 12 बजे तक सड़कों पर मुस्तैदी का दिखावा करते हैं, टॉर्च जलाते हैं और मानों दुनिया को बताते हैं कि वे जाग रहे हैं। जैसे ही घड़ी की सुइयां 12 पार करती हैं, विभाग अपनी इतिश्री कर चैन की नींद सो जाता है। और ठीक इसी समय, यानी रात 1 से सुबह 4 बजे के बीच, असली खेल शुरू होता है। जब दुनिया सोती है, तब इन खदानों में मशीनों का शोर गूँजता है और तड़के सूरज निकलने से पहले लाखों की रेत ठिकाने लगा दी जाती है। यह मैनेजमेंट इतना सटीक है कि विभाग की आँखें तभी खुलती हैं जब रेत के ट्रक सुरक्षित दूरी तय कर चुके होते हैं।

प्रशासन की नाकामी या सहमति ?

हथखोज की रेत खदान अब केवल खनिज संपदा की निकासी का केंद्र नहीं रही, बल्कि जिला प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल का केंद्र बन गई है,जिले में ऐसा मामला शायद पहली बार सामने आया है जब मशीनों को पकड़कर छोड़ देना या देखकर अनदेखा कर देना, किस मैनेजमेंट का हिस्सा है, यह तो विभाग ही जाने,पर फिलहाल इतना तय है कि गरियाबंद में अवैध उत्खनन रोकने के दावे कागजों पर जितने मजबूत हैं, जमीन पर उतने ही रेतीले साबित हो रहे हैं।

​अब देखना यह है कि क्या वरिष्ठ अधिकारी इस खाली हाथ लौटने की बहादुरी पर कोई संज्ञान लेंगे, या फिर अगली बार टीम फिर किसी खदान पर जाएगी और हवा खाकर वापस आ जाएगी ।

यह भी देखे …गरियाबंद खनिज विभाग की मैम साहब छुट्टी पर और विभाग के छोटे सफेदपोश ड्यूटी पर सत्ता वाले माननीय…

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