छत्तीसगढ़-ओडिशा बॉर्डर पर सीआरपीएफ ने ढेकुनपानी जंगल से 70 जिलेटिन रॉड्स और विस्फोटक बरामद कर नक्सलियों की बड़ी साजिश को नाकाम किया,पढ़ें पूरी रिपोर्ट पैरी टाईम्स पर….
गरियाबंद छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सरहद पर तैनात सुरक्षाबलों ने एक बार फिर नक्सलियों के खूनी इरादों को मिट्टी में मिला दिया है। एंटी-नक्सल ऑपरेशन के तहत ओडिशा कोमना पुलिस कैंप की CRPF टीम ने सोनाबेड़ा अभ्यारण्य के ढेकुनपानी जंगल में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। जवानों ने जंगल के भीतर छिपाकर रखे गए भारी विस्फोटक जखीरे को बरामद कर नक्सलियों द्वारा बिछाए गए डेथ ट्रैप (मौत के जाल) को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।

छत्तीसगढ़-ओडिशा बॉर्डर में सोनाबेड़ा के जंगलों में मिली विस्फोटक कामयाबी
सुरक्षाबलों को खुफिया जानकारी मिली थी कि सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षाबलों के मूवमेंट को बाधित करने के लिए नक्सलियों ने भारी मात्रा में विस्फोटक डंप किया है। इसी इनपुट के आधार पर सीआरपीएफ की टीम ने ढेकुनपानी के जंगलों में सघन सर्चिंग ऑपरेशन चलाया। सर्चिंग के दौरान जवानों ने पत्थरों और झाड़ियों के बीच छिपाकर रखे गए सामान को बरामद किया।

सीमावर्ती इलाकों में अलर्ट, बैकफुट पर माओवादी
इस बड़ी बरामदगी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव के कारण नक्सली अब सीधे मुठभेड़ के बजाय आईईडी और विस्फोटकों का सहारा ले रहे हैं। सोनाबेड़ा अभ्यारण्य का इलाका अपनी भौगोलिक बनावट के कारण हमेशा से संवेदनशील रहा है, लेकिन सीआरपीएफ की इस त्वरित कार्रवाई ने सीमा पार से संचालित होने वाली साजिशों को बड़ा झटका दिया है।
सर्चिंग अभियान में आई तेजी
घटना के बाद गरियाबंद (छत्तीसगढ़) और कोमना (ओडिशा) पुलिस ने आपसी समन्वय बढ़ा दिया है। ढेकुनपानी के जंगलों में अभी भी अतिरिक्त टुकड़ियों द्वारा सर्चिंग की जा रही है ताकि अन्य संभावित डंप का पता लगाया जा सके। स्थानीय पुलिस प्रशासन का कहना है कि वे आगामी दिनों में सीमावर्ती क्षेत्रों में गश्त और बढ़ाएंगे ताकि ग्रामीणों और जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
जब्त की गई सामग्री की सूची
- 70 नग जिलेटिन: जो किसी भी बड़े निर्माण या वाहन को उड़ाने के लिए पर्याप्त है।
- 3 स्टील कंटेनर: जिनका इस्तेमाल आईईडी (IED) असेंबल करने के लिए किया जाना था।
- 4 बंडल इलेक्ट्रॉनिक वायर: विस्फोट को रिमोट या इलेक्ट्रिक कंट्रोल देने के लिए।