गरियाबंद पंचायत न्यूज़ छत्तीसगढ़ के देवभोग में भ्रष्टाचार का अनूठा कारनामा,ग्राम पंचायत चिचिया में कागजों पर तो पानी टंकी बन गई, लेकिन जमीन पर वह गायब है। इस अदृश्य विकास की गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज कराने थाने पहुँचीं पूर्व जिला पंचायत सदस्य धनमती यादव। पढ़ें सिस्टम पर चोट करती यह विशेष रिपोर्ट पैरी टाईम्स पर।
गरियाबंद\देवभोग भारत में अब तक आपने इंसानों, पालतू जानवरों और कीमती सामानों की गुमशुदगी की खबरें सुनी होंगी। लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि सीमेंट, कंक्रीट और पाइपों से बना पूरा का पूरा निर्माण कार्य ही गायब हो जाए? छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के देवभोग क्षेत्र में कुछ ऐसा ही चमत्कार हुआ है, जिसने सरकारी सिस्टम की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

गरियाबंद पंचायत न्यूज़ कागजों पर पाइप लाइन बिछी, धरातल पर सन्नाटा
मामला ग्राम पंचायत चिचिया का है। यहाँ वित्तीय वर्ष 2024-25 में जिला पंचायत विकास निधि से दासोपरा के शिव मंदिर के पास पानी टंकी स्थापना और पाइप लाइन विस्तार के लिए 3 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत हुई थी। इसके साथ ही, 1 लाख रुपये पेयर ब्लॉक (Payer Blocks) बिछाने के लिए भी दिए गए थे।
सरकारी फाइलों की मानें तो पैसा निकल चुका है और काम चकाचक पूरा हो चुका है। लेकिन जब पूर्व जिला पंचायत सदस्य धनमती यादव धरातल पर मुआयना करने पहुँचीं, तो वहां न तो पानी की टंकी थी और न ही पाइप लाइन का कोई नामोनिशान। ऐसा लग रहा है मानो ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव ने किसी जादूगर की तरह लाखों के निर्माण कार्य को हवा में ही गायब कर दिया।
थाने में दर्ज कराई गुमशुदगी की रिपोर्ट
भ्रष्टाचार के इस नायाब तरीके से हैरान होकर धनमती यादव सीधे देवभोग थाना पहुँच गईं। उन्होंने पुलिस से गुहार लगाई है कि पंचायत के उस खोए हुए निर्माण कार्य को ढूँढा जाए, जो फाइलों में तो जीवित है पर जमीन पर कहीं दिखाई नहीं दे रहा। यह अपने आप में एक अनोखा विरोध प्रदर्शन है, जो सिस्टम के बंदरबाट पर करारा तंज कसता है।
जिम्मेदारों का गोलमोल जवाब
जब इस अदृश्य निर्माण के बारे में जनपद सीईओ डी. एस. भगत से पूछा गया, तो उन्होंने हमेशा की तरह सरकारी रटा-रटाया जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जिन पंचायतों में कार्य अधूरे हैं या शुरू नहीं हुए, उन्हें नोटिस जारी किया गया है और वसूली की प्रक्रिया की जाएगी। वहीं, थाना प्रभारी फैजुल शाह होदा ने इसे क्षेत्राधिकार से बाहर का मामला बताते हुए धारा 155 के तहत मामला काट कर दिया है।
भ्रष्टाचार का नया मॉडल डिजिटल निर्माण
चिचिया पंचायत का यह मामला यह समझने के लिए काफी है कि कैसे सरपंच और सचिव के संरक्षण में सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है। साल भर से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी काम शून्य है, जबकि राशि का आहरण (Withdrawal) हो चुका है। जनता अब पूछ रही है कि आखिर वो कौन सी ‘जादुई छड़ी’ है, जिससे बिना ईंट-गारा लगाए कागजों पर विकास की गंगा बह जाती है?
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गुमशुदा निर्माण कार्य को खोज पाता है या यह फाइल भी वक्त की धूल में कहीं दबकर रह जाएगी।
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