​गरियाबंद सुशासन तिहार या खाली कुर्सियों का मेला? अमलीपदर में अधिकारियों के रवैये पर भड़के गोवर्धन मांझी, मंच पर ही कर दी खिंचाई ।

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By Sangani

गरियाबंद सुशासन तिहार अमलीपदर में सुशासन तिहार के दौरान पूर्व संसदीय सचिव गोवर्धन मांझी ने कलेक्टर और अधिकारियों पर फोन न उठाने और बेलगाम होने का आरोप लगाया,खाली कुर्सियों पर भी उठाए सवाल पढ़े पूरी ख़बर पैरी टाईम्स पर।

गरियाबंद जिले के अमलीपदर में आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम उस समय हंगामे की भेंट चढ़ गया, जब पूर्व संसदीय सचिव गोवर्धन मांझी का धैर्य जवाब दे गया…..मंच पर कलेक्टर, एसपी और जिला पंचायत अध्यक्ष की मौजूदगी में मांझी ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने भरी सभा में अधिकारियों को बेलगाम बताते हुए यहाँ तक कह दिया कि अधिकारी अब जनप्रतिनिधियों के फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझते।

​गरियाबंद सुशासन तिहार

गरियाबंद सुशासन तिहार साहब,फोन तो उठा लीजिए

​मंच से जनता को संबोधित करते हुए गोवर्धन मांझी का गुस्सा सातवें आसमान पर था। उन्होंने सीधे कलेक्टर भगवान सिंह उईके की ओर इशारा करते हुए कहा, कलेक्टर साहब, कम से कम फोन तो उठा लिया कीजिए। मांझी ने आरोप लगाया कि जिले के अधिकारी पूरी तरह से निरंकुश हो चुके हैं। वे न तो फोन उठाते हैं और न ही अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं।

खाली कुर्सियों ने खोली पोल

​सुशासन का दावा करने वाले इस आयोजन में जब गोवर्धन मांझी की नजर खाली पड़ी कुर्सियों पर पड़ी, तो उन्होंने प्रचार-प्रसार की कमी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि शासन की योजनाओं का बखान करने के लिए आयोजित इस कार्यक्रम की सूचना आम जनता तक पहुँची ही नहीं है, यही कारण है कि पंडाल खाली पड़ा है।

पुरानी बीमारी अधिकारियों का कॉल इग्नोर करना कोई नई बात नहीं

​अमलीपदर के मंच पर जो आक्रोश पूर्व संसदीय सचिव गोवर्धन मांझी ने व्यक्त किया, वह कोई इत्तेफाक या इकलौती घटना नहीं है। गरियाबंद जिले में अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा फोन न उठाना अब एक पुरानी बीमारी बन चुकी है। जनप्रतिनिधियों की अनदेखी जिले के कई छोटे-बड़े जनप्रतिनिधि पूर्व में भी यह शिकायत कर चुके हैं कि विकास कार्यों या जनसमस्याओं के समाधान के लिए जब वे अधिकारियों को फोन लगाते हैं, तो या तो फोन रिसीव नहीं होता या उसे काट दिया जाता है। पत्रकारों से दूरी लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडियाकर्मियों को भी इसी समस्या से जूझना पड़ता है। विश्वसनीय जानकारी या किसी गंभीर मुद्दे पर प्रशासन का पक्ष जानने के लिए जब पत्रकार संपर्क करते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारी अक्सर मौन साध लेते हैं। शिकायतों का अंबार गाहे-बगाहे कलेक्ट्रेट की बैठकों में भी यह मुद्दा गूंजता रहा है, लेकिन अमलीपदर की घटना ने यह साबित कर दिया है कि शासन के सख्त निर्देशों के बावजूद गरियाबंद का प्रशासनिक अमला अब भी अपनी कार्यशैली बदलने को तैयार नहीं है।

प्रशासनिक अमले में मचा हड़कंप

​मंच पर जिले के तमाम आला अधिकारी कलेक्टर और एसपी सहित जिला पंचायत अध्यक्ष मौजूद थे। पूर्व संसदीय सचिव के इन तीखे तेवरों ने अधिकारियों को असहज कर दिया। कार्यक्रम में मौजूद लोग भी इस मंच युद्ध को देखकर दंग रह गए मांझी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि अधिकारी इसी तरह जनता और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी करेंगे, तो सुशासन का सपना कभी पूरा नहीं हो सकता।

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