गरियाबंद कलेक्टर बी.एस. उइके की सख्ती, पराली जलाने वालों पर जताई नाराजगी, कहा खेत नहीं, भविष्य जल रहा है ।

Sangani

By Sangani

गरियाबंद कलेक्टर बी.एस. उइके की सख्ती पराली जलाने की घटनाओं पर नाराजगी जताते हुए किसानों से अपील की है कि वे खेतों में पराली न जलाएं। प्रशासन ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान शुरू किया है पढ़े पूरी ख़बर पैरी टाईम्स पर।

गरियाबंद जिले में लगातार सामने आ रही पराली जलाने की घटनाओं को लेकर कलेक्टर बी.एस. उइके ने गहरी नाराजगी जताई है। प्रशासन द्वारा जारी जनजागरूकता अभियान के तहत किसानों से अपील की गई है कि वे खेतों में पराली जलाने जैसी परंपरागत लेकिन नुकसानदायक प्रक्रिया को तुरंत बंद करें। कलेक्टर ने साफ कहा कि पराली जलाना केवल खेतों को ही नहीं बल्कि पर्यावरण, स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को भी नुकसान पहुंचा रहा है।

गरियाबंद कलेक्टर बी.एस. उइके की सख्ती

गरियाबंद कलेक्टर बी.एस. उइके की सख्ती,पलारी जलाने को लेकर क्यों नाराज हैं कलेक्टर ?

गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर, पाण्डुका और राजिम क्षेत्र में पराली जलाने का मामला लगातार बढ़ता जा रहा है। धान की रवि फसल कटाई के बाद हजारों एकड़ खेतों में किसानों द्वारा आग लगा दी गई है, जिससे पूरे इलाके में धुएं का घना गुबार छा गया है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि महासमुंद-राजिम मुख्य मार्ग पर कई जगह धुएं के कारण सड़क तक साफ दिखाई नहीं दे रही, जिससे सड़क हादसों की आशंका बढ़ गई है।

वहीं खेतों से उठने वाला धुआं अब गांवों और घरों तक पहुंचने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि धुएं के कारण सांस लेने में परेशानी हो रही है और बच्चों एवं बुजुर्गों को सबसे ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। लगातार बढ़ते प्रदूषण ने लोगों में डर और नाराजगी दोनों बढ़ा दी है।

पराली जलाना नुकसान ही नुकसान कलेक्टर बी.एस. उइके

कलेक्टर बी.एस. उइके ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि खेत की पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता धीरे-धीरे समाप्त होती है। इससे खेत की उत्पादकता कम हो जाती है और किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। इसके साथ ही हवा में प्रदूषण बढ़ता है, जिससे सांस और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक खेती में अब पराली प्रबंधन के कई विकल्प मौजूद हैं, जिनका उपयोग कर किसान खेत की उर्वरता बनाए रख सकते हैं और अतिरिक्त खर्च से भी बच सकते हैं।

प्रशासन ने शुरू किया जागरूकता अभियान

गरियाबंद जिला प्रशासन द्वारा गांव-गांव में जागरूकता पोस्टर और संदेशों के माध्यम से किसानों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि यदि समय रहते पराली जलाने पर रोक नहीं लगी तो इसका असर पर्यावरण के साथ-साथ कृषि उत्पादन पर भी पड़ेगा।
कलेक्टर ने किसानों से भावुक अपील करते हुए कहा कि “खेत की पराली न जलाएं, यह केवल खेत नहीं बल्कि हमारे भविष्य को नुकसान पहुंचाती है। आइए, हम सब मिलकर गरियाबंद को स्वच्छ, हरित और समृद्ध बनाएं।”

पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रशासन की अपील

जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे पराली जलाने के बजाय वैकल्पिक उपाय अपनाएं और पर्यावरण संरक्षण में अपनी भागीदारी निभाएं। प्रशासन का मानना है कि जागरूकता और सामूहिक प्रयास से ही इस समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

पराली जलाने से होने वाले बड़े नुकसान

मिट्टी की उर्वरता कम होती है


फसल की पैदावार घटती है


वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ता है


पशुओं के लिए चारा कम हो जाता है


किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है


स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है

यह भी देखे … गरियाबंद पुलिस का ताबड़तोड़ एक्शन…3 KM तक पीछा कर पकड़ी गांजा तस्करी की कार, तो वही देवभोग पुलिस ने लगातार दूसरे दिन पकड़ा गांजा तस्कर को ।

कृपया शेयर करें

लगातार सही खबर सबसे पहले जानने के लिए हमारे वाट्सअप ग्रुप से जुड़े

Join Now

Join Telegram

Join Now

error: Content is protected !!