उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व का गजसंकेत ऐप अब मुआवज़ा प्रक्रिया भी करेगा ऑनलाइन। ग्रामीणों को WhatsApp और SMS पर मिलेगा हर अपडेट, 30 दिन में भुगतान का लक्ष्य पढ़े पूरी ख़बर पैरी टाईम्स पर।
गरियाबंद छत्तीसगढ़ के जंगलों में अब हाथियों का खतरा सिर्फ डर नहीं, बल्कि राहत की नई उम्मीद भी लेकर आएगा। लंबे समय से हाथियों के उत्पात, फसल नुकसान और मुआवज़े में देरी से परेशान ग्रामीणों के लिए अब बड़ी राहत की खबर सामने आई है। Udanti Sitanadi Tiger Reserve ने अपने चर्चित CG Elephant Alert App गजसंकेत को अब नए और हाईटेक अवतार में लॉन्च करने की तैयारी कर ली है

अब मुआवज़े के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं
नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब ग्रामीणों को रेंज ऑफिस और पटवारी कार्यालय के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। वनरक्षक खुद ऑनलाइन क्लेम दर्ज करेंगे और जरूरी दस्तावेज व फोटो सीधे पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे।
सबसे खास बात यह है कि अब मुआवज़े की पूरी प्रक्रिया WhatsApp और SMS अलर्ट के जरिए ग्रामीणों तक पहुंचेगी। यानी दावा किस अधिकारी के पास है, कब मंजूर हुआ और कब ट्रेजरी पहुंचा हर अपडेट मोबाइल पर मिलेगा।

30 दिन में मुआवज़ा देने का टारगेट
वन विभाग ने दावा प्रक्रिया को तेज करने के लिए 30 दिन की समय-सीमा तय की है। यानी अगर फसल, मवेशी या घर को नुकसान हुआ तो महीनों इंतजार करने की मजबूरी अब कम हो सकती है।
ग्रामीण अब रियल टाइम ट्रैकिंग के जरिए अपने मुआवज़े की स्थिति भी देख सकेंगे। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
पहले हाथियों की सूचना देता था ऐप, अब दिलाएगा राहत भी
गजसंकेत ऐप को शुरुआत में हाथियों की गतिविधियों की जानकारी देने के लिए बनाया गया था। यह ऐप Voice SMS और रियल टाइम ट्रैकिंग के जरिए ग्रामीणों को पहले से अलर्ट करता है ताकि मानव-हाथी संघर्ष कम हो सके।
मार्च 2023 में शुरू हुआ यह सिस्टम अब सिर्फ छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है। मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, झारखंड, तेलंगाना, कर्नाटक और ओडिशा जैसे राज्य भी इसे अपना चुके हैं।
जंगलों में टेक्नोलॉजी का नया प्रयोग
उदंती सीता नदी के उपनिदेशक वरुण जैन का मानना है कि यह नई तकनीक जंगलों में रहने वाले ग्रामीणों और प्रशासन के बीच भरोसा मजबूत करेगी। साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में भी यह बड़ा कदम साबित हो सकता है।