गांव बनाम कानून 14 नामों पर चली ग्राम सभा की कलम ग्राम सभा की बैठक में लिया गया एक फैसला अब चर्चा का विषय बन गया है,परंपरा, पहचान और अधिकारों के बीच छिड़ी इस बहस में अब प्रशासन की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है।
गरियाबंद छत्तीसगढ़ के कोंकेर जिले के बड़े तेवड़ा गांव में धर्मांतरण का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। विशेष ग्राम सभा में पूर्व सरपंच सहित 14 मतांतरित व्यक्तियों के अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र निरस्त करने का प्रस्ताव पारित किया गया है। ग्राम सभा का दावा है कि संबंधित लोग अब गोंड समाज की परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं का पालन नहीं करते, इसलिए उन्हें अनुसूचित जनजाति का लाभ नहीं मिलना चाहिए।
ग्राम सभा में पारित प्रस्ताव को अब जिला प्रशासन और कलेक्टर को भेजने की तैयारी की जा रही है। गांव के इस फैसले ने क्षेत्र में सामाजिक और कानूनी बहस को फिर से तेज कर दिया है।

गांव बनाम कानून 14 नामों पर चली ग्राम सभा की कलम,पेसा कानून के तहत हुई विशेष ग्राम सभा
जानकारी के अनुसार 18 मई को बड़े तेवड़ा गांव में पेसा कानून 1996 एवं छत्तीसगढ़ पेसा नियम 2022 के प्रावधानों के तहत विशेष ग्राम सभा आयोजित की गई थी। इसी बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया कि धर्म परिवर्तन कर चुके 14 व्यक्तियों के ST प्रमाण पत्रों की समीक्षा कर उन्हें निरस्त किया जाए।
ग्राम सभा का आरोप है कि संबंधित व्यक्तियों ने पारंपरिक जनजातीय रीति-रिवाजों, पूजा-पाठ, जात्रा और सांस्कृतिक मान्यताओं से दूरी बना ली है तथा ईसाई धर्म का पालन कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया गया हवाला
ग्राम सभा के प्रस्ताव में मार्च 2025 में आए सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय का भी उल्लेख किया गया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि धर्म परिवर्तन के बाद अनुसूचित जनजाति की पात्रता को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट हुई है, इसलिए प्रशासन को मामले में कार्रवाई करनी चाहिए।
हालांकि अंतिम निर्णय प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही लिया जाएगा। ST प्रमाण पत्र निरस्त करने का अधिकार ग्राम सभा के पास नहीं बल्कि सक्षम प्रशासनिक प्राधिकरण के पास होता है।
पहले भी चर्चा में रहा है बड़ा तेवड़ा
बड़ा तेवड़ा गांव पिछले वर्ष दिसंबर 2025 में हुए धर्मांतरण विवाद और हिंसक घटनाओं के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था। उस दौरान शव दफनाने को लेकर विवाद हुआ था, जिसमें कई लोग घायल हुए थे और प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा था।
अब ग्राम सभा के नए प्रस्ताव ने एक बार फिर इस संवेदनशील मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
प्रशासन के सामने अब बड़ा सवाल
ग्राम सभा का प्रस्ताव प्रशासन तक पहुंचने के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कानूनी कसौटी पर यह प्रस्ताव कितना टिकता है। गांव की परंपराओं, संविधानिक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है