गरियाबंद के नन्हें समाज सुधारक बारूला के बच्चों ने शिक्षा, नशामुक्ति, साइबर अपराध और यातायात जागरूकता पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर समाज को नई दिशा दी। SP वेदव्रत सिरमौर ने बच्चों को सम्मानित कर उनका उत्साह बढ़ाया।
गरियाबंद आज के दौर में जहां बड़े-बड़े लोग सोशल मीडिया पर लंबी-लंबी बातें कर समाज सुधार का दावा करते हैं, वहीं गरियाबंद जिले के ग्राम बारूला के कुछ नन्हें बच्चों ने बिना किसी बड़े मंच और प्रचार के ऐसा काम कर दिखाया, जिसकी चर्चा अब पुलिस विभाग तक पहुंच गई है।खेलने-कूदने की उम्र में ये बच्चे गांव-गांव जाकर नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को जागरूक कर रहे हैं। इनके संदेश सीधे जनता से जुड़े हैं शिक्षा का महत्व, नशामुक्ति, यातायात नियमों का पालन और साइबर अपराधों से बचाव जैसे विषय इनके नाटकों का केंद्र हैं

गरियाबंद के नन्हें समाज सुधारक,बच्चों की सोच देख पुलिस अधीक्षक भी हुए प्रभावित
जब गरियाबंद पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर को इन बच्चों के प्रयासों की जानकारी मिली, तो उन्होंने स्वयं बच्चों से मुलाकात करने की इच्छा जताई। मुलाकात के दौरान SP ने बच्चों के अनुभव सुने और उनके सामाजिक सरोकारों की खुलकर सराहना की।कहा जा सकता है कि जहां कई बार बड़े लोग जागरूकता अभियानों को केवल भाषणों तक सीमित रख देते हैं, वहीं बारूला के इन बच्चों ने अभिनय के जरिए सीधे लोगों के दिल तक पहुंचने का रास्ता चुन
समाज बदलने के लिए उम्र नहीं, सोच चाहिए
कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और ग्राम बारूला के बच्चों ने साबित कर दिया है कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए उम्र नहीं, बल्कि अच्छी सोच और मजबूत इरादों की आवश्यकता होती है।उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन ऐसे सभी प्रयासों का स्वागत करता है, जो समाज को सही दिशा देने का काम करते हैं।H2: सम्मान के साथ बढ़ा हौसलाकार्यक्रम के अंत में सभी बाल कलाकारों को सम्मानित और पुरस्कृत किया गया। यह सम्मान केवल पुरस्कार नहीं, बल्कि उन बच्चों के लिए प्रेरणा है जो समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए सकारात्मक बदलाव की अलख जगा रहे हैं।अगर यही जज्बा बना रहा, तो आने वाले समय में ये बच्चे केवल मंच पर कलाकार नहीं, बल्कि समाज के सच्चे जागरूक नागरिक के रूप में भी पहचान बनाएंगे।
बच्चे बड़ों से बड़े बन गए
कभी-कभी समाज को आईना दिखाने के लिए बड़े नेताओं या बड़े मंचों की जरूरत नहीं पड़ती। ग्राम बारूला के इन बच्चों ने साबित कर दिया कि अगर सोच साफ हो, तो एक छोटा सा नुक्कड़ नाटक भी हजारों शब्दों के भाषण पर भारी पड़ सकता है।