गरियाबंद जिला जेल की सुरक्षा को देखते हुए कलेक्टर ने जेल और 2 सौ मीटर परिधि को नो ड्रोन फ्लाई जोन घोषित किया है। ड्रोन उड़ाने वालों पर धारा 188 के तहत कार्रवाई होगी।
गरियाबंद तकनीक के इस दौर में जहां ड्रोन फोटोग्राफी और सर्वेक्षण का बड़ा माध्यम बन चुके हैं, वहीं इन्हीं ड्रोन को लेकर गरियाबंद जिला प्रशासन ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। जिला जेल की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कलेक्टर ने जिला जेल परिसर और उसके चारों ओर 200 मीटर की परिधि को नो ड्रोन फ्लाई जोन घोषित कर दिया है।
इस आदेश के बाद अब प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना अनुमति कोई भी ड्रोन उड़ाना कानून का उल्लंघन माना जाएगा और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

आखिर क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
जानकारी के अनुसार जिला जेल अधीक्षक द्वारा प्रशासन को भेजे गए पत्र में जेल परिसर के ऊपर या आसपास ड्रोन गतिविधियों से सुरक्षा संबंधी संभावित खतरों की ओर ध्यान आकर्षित कराया गया था। इसके बाद मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल कदम उठाया।
प्रशासन का मानना है कि ड्रोन के माध्यम से जेल परिसर की निगरानी, बंदियों तक प्रतिबंधित सामग्री पहुंचाने या अन्य अवैध गतिविधियों की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी वजह से यह निर्णय लिया गया है।
2 सौ मीटर दायरे में ड्रोन उड़ाया तो होगी कार्रवाई
कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार जिला जेल गरियाबंद तथा उसके चारों ओर 200 मीटर की परिधि में किसी भी प्रकार के ड्रोन, यूएवी (Unmanned Aerial Vehicle) या अन्य मानव रहित उड़ान यंत्रों के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के प्रासंगिक प्रावधानों एवं धारा 188 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बंदियों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था को प्राथमिकता
प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय बंदियों की सुरक्षा, जेल की संवेदनशीलता और जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। जेल जैसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील संस्थान के आसपास किसी भी संदिग्ध हवाई गतिविधि को रोकना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
जेल सुरक्षा को लेकर पहली बार हुई पहल
गरियाबंद में पहली बार जेल सुरक्षा को लेकर इस तरह का स्पष्ट और सख्त प्रतिबंध सामने आया है। ड्रोन तकनीक जहां सुविधाएं लेकर आई है, वहीं सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौतियां भी पैदा कर रही है। ऐसे में प्रशासन का यह फैसला भविष्य की संभावित सुरक्षा चुनौतियों को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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