गरियाबंद पुलिस ने स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में साइबर जागरूकता शिविर आयोजित कर छात्रों को OTP फ्रॉड, सोशल मीडिया सुरक्षा, POCSO Act, घरेलू हिंसा और हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी।
गरियाबंद में बढ़ते साइबर अपराधों और बच्चों की सुरक्षा को लेकर पुलिस ने एक अनूठी पहल की। पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर के निर्देशन में गरियाबंद साइबर सेल और महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त टीम ने स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में विशेष साइबर जागरूकता शिविर आयोजित किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने भाग लिया।इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने बच्चों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने के आसान लेकिन बेहद महत्वपूर्ण तरीके बताए। अधिकारियों ने कहा कि आज के समय में साइबर ठग सबसे ज्यादा छात्रों और युवाओं को निशाना बना रहे हैं, इसलिए जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।

OTP से लेकर सोशल मीडिया तक… हर खतरे से कराया रूबरू
शिविर में साइबर टीम ने छात्रों को समझाया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ कभी भी OTP, बैंक खाता, आधार नंबर या अन्य व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। सोशल मीडिया पर फोटो और निजी जानकारी पोस्ट करने से पहले सोच-समझकर निर्णय लें।इसके अलावा ऑनलाइन लॉटरी, गेमिंग फ्रॉड, फर्जी लिंक और संदिग्ध मैसेज से दूर रहने की सलाह दी गई। यदि कोई भी व्यक्ति साइबर अपराध का शिकार होता है तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की जानकारी भी दी गई।
Good Touch-Bad Touch से लेकर POCSO Act तक दी महत्वपूर्ण जानकारी
महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने छात्र-छात्राओं को POCSO Act, Good Touch-Bad Touch, घरेलू हिंसा और बाल विवाह जैसे संवेदनशील विषयों पर सरल भाषा में जागरूक किया।बच्चों को बताया गया कि यदि उनके साथ किसी भी प्रकार का उत्पीड़न या हिंसा होती है तो चुप रहने के बजाय तुरंत अपने अभिभावकों, शिक्षकों या पुलिस को जानकारी दें। साथ ही 112, 1091 (महिला हेल्पलाइन) और 1098 (चाइल्ड हेल्पलाइन) की उपयोगिता भी विस्तार से समझाई गई।
पुलिस अधीक्षक बोले- जागरूक बच्चे ही सुरक्षित समाज की नींव
पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर ने कहा कि स्कूली बच्चे देश और समाज का भविष्य हैं। उन्हें सुरक्षित वातावरण और डिजिटल दुनिया के खतरों की सही जानकारी देना पुलिस की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि तकनीक के इस दौर में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, इसलिए बच्चों को डिजिटल लिटरेसी देना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। घरेलू हिंसा और बाल अपराधों पर खुलकर चर्चा करने से बच्चों का पुलिस पर भरोसा भी मजबूत होगा।
छात्रों को दिए गए सुरक्षा के अहम संदेश
किसी भी व्यक्ति को OTP, बैंक या आधार संबंधी जानकारी साझा न करें।सोशल मीडिया पर निजी जानकारी सोच-समझकर पोस्ट करें।संदिग्ध लिंक, ऑनलाइन लॉटरी और गेमिंग फ्रॉड से बचें।साइबर अपराध होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करें।घरेलू हिंसा या उत्पीड़न की स्थिति में चुप न रहें।जरूरत पड़ने पर 112, 1091 और 1098 हेल्पलाइन का उपयोग करें।