दिल्ली के जंतर-मंतर से गरियाबंद तक गूंजा भूपेश बघेल का नरसिंह अवतार का सियासी शंखनाद, सत्ता का हिरण्यकश्यप कौन ? अमलीपदर से दिया बड़ा सियासी संदेश ।

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By Sangani

गरियाबंद के अमलीपदर में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने Gen Z को नरसिंह अवतार बताते हुए मोदी सरकार पर बड़ा राजनीतिक हमला बोला, पंडित युवराज पांडेय की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था पर भी दी अहम प्रतिक्रिया पढ़ें पूरी खबर पैरी टाईम्स पर।

गरियाबंद छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने तीखे लेकिन प्रतीकात्मक बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। गरियाबंद जिले के अमलीपदर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे बघेल ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं के प्रदर्शन को पौराणिक संदर्भ से जोड़ते हुए ऐसा राजनीतिक तंज कसा, जिसकी चर्चा अब प्रदेश की सियासत में तेज हो गई है।पंडित युवराज पांडेय के आमंत्रण पर अमलीपदर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार भगवान नरसिंह ने हिरण्यकश्यप के अहंकार का अंत किया था, उसी प्रकार Gen Z (नई पीढ़ी) ने अपने लोकतांत्रिक विरोध के माध्यम से नरेंद्र मोदी सरकार के अहंकार पर प्रहार किया है। बघेल का यह बयान सीधे तौर पर केंद्र सरकार पर राजनीतिक हमला माना जा रहा है

Gen Z बना नरसिंह अवतार बयान से गरमाई राजनीतिक बहस

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने संबोधन में कहा कि देश का युवा अब केवल दर्शक नहीं, बल्कि लोकतंत्र का सक्रिय प्रहरी बन चुका है। उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए युवा प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि जब सत्ता में अहंकार बढ़ जाता है, तब बदलाव की ताकत जनता के बीच से ही निकलती है। उन्होंने Gen Z को उसी बदलाव का प्रतीक बताते हुए इसे “नरसिंह अवतार” की संज्ञा दी।उनका यह बयान राजनीतिक रूप से जितना आक्रामक था, उतना ही प्रतीकात्मक भी माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इसे आने वाले समय की सियासी रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

पंडित युवराज पांडेय को राजनीति पर दी नसीहत

अमलीपदर में पंडित युवराज पांडेय की बढ़ती लोकप्रियता और उनके संभावित राजनीतिक भविष्य को लेकर पूछे गए सवाल पर भी भूपेश बघेल ने खुलकर प्रतिक्रिया दी।उन्होंने छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कथावाचक पवन दीवान का उदाहरण देते हुए कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में जो सम्मान मिलता है, राजनीति में आने के बाद वह अक्सर प्रभावित हो जाता है। उनका कहना था कि संस्कृति और अध्यात्म समाज को जोड़ने का माध्यम हैं, जबकि राजनीति का स्वभाव अलग है। इसलिए ऐसे निर्णय बेहद सोच-समझकर लेने चाहिए।यह बयान राजनीतिक सलाह के साथ-साथ एक सकारात्मक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।H2: सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठाए सवालपूर्व मुख्यमंत्री ने पंडित युवराज पांडेय की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी और लगातार बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम होना आवश्यक है। उन्होंने इस दिशा में प्रशासन को भी गंभीरता से विचार करने की सलाह दी।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किया भव्य स्वागत

गरियाबंद मुख्यालय से लेकर अमलीपदर तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह पूर्व मुख्यमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया। कई स्थानों पर फूल-मालाओं और नारों के साथ उनका अभिनंदन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे।कार्यक्रम के अंत में भूपेश बघेल ने श्री जगन्नाथ मंदिर पहुंचकर भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। उन्होंने कहा कि जैसे ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ के दर्शन का विशेष महत्व है, वैसे ही अमलीपदर का श्री जगन्नाथ मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। उन्होंने यहां दर्शन को आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

सियासी संदेश या भविष्य की रणनीति?

अमलीपदर से दिए गए भूपेश बघेल के बयान ने साफ संकेत दिया कि कांग्रेस अब युवाओं के मुद्दों को धार्मिक प्रतीकों और सांस्कृतिक संदर्भों के साथ जोड़कर अपनी राजनीतिक धार को और मजबूत करने की कोशिश कर रही है। वहीं पंडित युवराज पांडेय को दी गई सलाह ने यह भी स्पष्ट किया कि बघेल धार्मिक नेतृत्व और सक्रिय राजनीति के बीच एक स्पष्ट दूरी बनाए रखने की वकालत करते हैं।अब यह देखना दिलचस्प होगा कि Gen Z के नरसिंह अवतार वाला यह बयान आने वाले दिनों में प्रदेश और राष्ट्रीय राजनीति में कितना असर छोड़ता है।

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