गरियाबंद में अर्नब चक्रवात का कहर चक्रवात के असर से गरियाबंद की सातों तहसीलों में दो दिनों में 448.8 मिमी बारिश दर्ज हुई,राजिम में सबसे ज्यादा बारिश, किसानों की बढ़ी चिंता पढ़े पूरी ख़बर पैरी टाईम्स पर ।
गरियाबंद अर्नव चक्रवात का असर गरियाबंद जिले में भी देखने को मिल रहा है। बीते दो दिनों से मौसम में आए बदलाव और लगातार हो रही बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिले की सातों तहसीलों में 29 और 30 अक्टूबर को कुल 448.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इनमें राजिम तहसील में सबसे ज्यादा बारिश हुई। लगातार बारिश के चलते खेतों में खड़ी धान की फसल पर संकट गहराने लगा है और किसानों को भारी नुकसान की आशंका सता रही है।

गरियाबंद में अर्नब चक्रवात का कहर 2 दिनों में 448.8 मिमी बारिश, 29 अक्टूबर को सबसे ज्यादा बरसे बादल
कलेक्टर कार्यालय की भू-अभिलेख शाखा से जारी दैनिक वर्षा रिपोर्ट के अनुसार, 29 अक्टूबर को जिले में कुल 311.1 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। वहीं 30 अक्टूबर को 137.7 मिमी बारिश हुई। इस तरह दो दिनों में जिले की सातों तहसीलों में कुल 448.8 मिमी बारिश दर्ज की गई। दोनों दिनों को मिलाकर तहसीलवार औसत बारिश 64.1 मिमी रही।

राजिम में सबसे ज्यादा बारिश, गरियाबंद तहसील में भी बरसे बादल
तहसीलवार आंकड़ों पर नजर डालें तो राजिम में दो दिनों के दौरान सर्वाधिक 75.6 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके बाद फिंगेश्वर में 69 मिमी, मैनपुर में 64.2 मिमी, अमलीपदर में 63.5 मिमी, देवभोग में 62.6 मिमी, गरियाबंद में 57.9 मिमी और छुरा में 56 मिमी बारिश हुई।
आंकड़े साफ बताते हैं कि चक्रवात के प्रभाव से जिले के लगभग सभी क्षेत्रों में बारिश का असर देखने को मिला है।
किसानों की फसल पर आफत, नुकसान की आशंका से बढ़ी चिंता
लगातार बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में खड़ी धान की फसल और कटाई की तैयारी कर रहे किसानों के सामने अब मौसम बड़ी चुनौती बनकर खड़ा हो गया है। बारिश के कारण खेतों में पानी भरने और फसल के भीगने से नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
किसानों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में बेमौसम बारिश उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फेर सकती है। अब निगाहें मौसम के अगले रुख और प्रशासन द्वारा संभावित फसल नुकसान के आकलन पर टिकी हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि चक्रवात की बारिश से प्रभावित किसानों को राहत कब मिलेगी और फसल नुकसान का आकलन करने के लिए प्रशासन कब मैदान में उतरेगा?