गरियाबंद में सांपों की शोभायात्रा..आस्था, परंपरा और सर्प संरक्षण का अनोखा संगम, ऋषि पंचमी पर देवरी में निकली सांपों की शोभायात्रा ।

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By Sangani

गरियाबंद में सांपों शोभायात्रा राजिम क्षेत्र के देवरी गांव में ऋषि पंचमी पर सांवरा समाज ने सांपों की पूजा कर अनोखी शोभायात्रा निकाली। जानिए वर्षों पुरानी परंपरा पढ़े पूरी ख़बर पैरी टाईम्स पर।

गरियाबंद/राजिम आमतौर पर सांपों का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर पैदा हो जाता है, लेकिन गरियाबंद जिले के राजिम क्षेत्र के ग्राम देवरी में ऋषि पंचमी के दिन नजारा बिल्कुल अलग होता है। यहां सांवरा समाज के लोग सर्पों को आस्था और श्रद्धा का प्रतीक मानते हुए उनकी पूजा-अर्चना करते हैं और फिर ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच सर्पों की अनोखी शोभायात्रा निकालते हैं। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उसी उत्साह के साथ निभाई जा रही है।

गरियाबंद में सांपों शोभायात्रा

गरियाबंद में सांपों की शोभायात्रा ऋषि पंचमी पर धार्मिक माहौल


ऋषि पंचमी के अवसर पर देवरी में सुबह से ही धार्मिक माहौल नजर आया। समाज के लोगों ने सर्पों की विधि-विधान से पूजा की। इसके बाद सर्पों को लेकर पारंपरिक तरीके से शोभायात्रा निकाली गई। ढोल और नगाड़ों की गूंज के बीच गांव की गलियों से गुजरती शोभायात्रा को देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ जुटी। लोगों ने इस अनोखे आयोजन को श्रद्धा और कौतूहल के साथ देखा।

सांवरा पाठशाला में हर साल सर्पदंश ने बचाव और उपचार का दिया जाता है प्रशिक्षण

देवरी की इस परंपरा को खास बनाने वाली एक और महत्वपूर्ण कड़ी गुरु सांवरा पाठशाला है। बताया जाता है कि यहां सालभर सर्पदंश से बचाव और उपचार से जुड़ा पारंपरिक प्रशिक्षण दिया जाता है। समाज के लोगों को सर्पों की पहचान, उनके व्यवहार और सर्पदंश की स्थिति में किए जाने वाले प्राथमिक उपचार के बारे में प्रशिक्षण दिया जाता है। ऋषि पंचमी के दिन प्रशिक्षण पूरा करने वाले लोगों के लिए दीक्षांत समारोह का आयोजन भी परंपरा का हिस्सा है।

सर्प के प्रति भय नहीं उनके महत्व को समझते है सांवरा समाज

स्थानीय स्तर पर यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं माना जाता। सांवरा समाज के लिए यह उनकी सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा हुआ है। समाज के लोगों का मानना है कि सर्पों के प्रति भय के बजाय उनके महत्व को समझना जरूरी है। इसी सोच के साथ पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा में सर्पों की पूजा की जाती है और उनके प्रति सम्मान प्रकट किया जाता है।

पूजा अर्चना के बाद सांपों को जंगल में छोड़ दिया जाता है

देवरी में ऋषि पंचमी पर होने वाले इस आयोजन की एक खास बात यह भी बताई जाती है कि पूजा और शोभायात्रा के बाद सर्पों को जंगल में छोड़ दिया जाता है। यानी धार्मिक आयोजन पूरा होने के बाद उन्हें उनके प्राकृतिक वातावरण में वापस पहुंचाने की परंपरा निभाई जाती है। इससे आयोजन में आस्था के साथ प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता का पहलू भी जुड़ जाता है।

सालों से निभाई जा रही परम्परा के ग्रामीण बनते है गवाह

ग्रामीणों के मुताबिक देवरी में सर्पों की पूजा और शोभायात्रा का यह आयोजन कई वर्षों से ऋषि पंचमी के दिन होता आ रहा है। समय के साथ आधुनिकता बढ़ने के बावजूद समाज ने अपनी इस परंपरा को बनाए रखा है। यही वजह है कि हर साल ऋषि पंचमी के मौके पर देवरी की यह अनोखी परंपरा लोगों के आकर्षण का केंद्र बनती है। धार्मिक आस्था, पारंपरिक प्रशिक्षण और सर्पों के प्रति सम्मान को एक साथ जोड़ने वाला देवरी का यह आयोजन गरियाबंद की लोक संस्कृति की अलग तस्वीर पेश करता है। ऋषि पंचमी के दिन निकली सर्पों की शोभायात्रा ने एक बार फिर वर्षों पुरानी इस परंपरा को लोगों के बीच चर्चा का विषय बना दिया।

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