नदी को समझ बैठे तस्करों का डिलीवरी पार्टनर, सागौन से बनाई राफ्ट और ओडिशा भेजने निकले… Smart Surveillance ने खोल दिया पुष्पा 2.0 का राज ।

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By Sangani

गरियाबंद के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में सागौन तस्करी के ‘पुष्पा 2.0’ प्लान का खुलासा हुआ नदी के बहाव से लकड़ी ओडिशा भेजने की तैयारी थी, 3 आरोपी गिरफ्तार।

गरियाबंद जंगल से सागौन काटकर उसे नदी के बहाव के सहारे ओडिशा पहुंचाने का ऐसा ‘जुगाड़ू प्लान’ सामने आया है, जिसे देखकर शायद फिल्मी तस्करी के लेखक भी एक बार सोच में पड़ जाएं। तस्करों ने सागौन के लट्ठे को नदी के रास्ते ओडिशा पहुंचाने की तैयारी की थी, लेकिन उनका पूरा प्लान फिल्मी पर्दे पर चलने से पहले ही स्मार्ट सर्विलांस के कैमरे में कैद हो गया।

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन विभाग ने अंतरराज्यीय सागौन तस्करी गिरोह का खुलासा करते हुए छत्तीसगढ़ और ओडिशा से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं मामले में तीन अन्य आरोपी अभी फरार बताए गए हैं।

सागौन काटा, लट्ठा छिपाया और नदी को बना दिया फ्री ट्रांसपोर्ट सर्विस

मामला 22 अगस्त का है। उत्तर उदंती परिक्षेत्र के कुर्रुभाटा बीट के कक्ष क्रमांक-03 में गश्त के दौरान वन विभाग को उदंती नदी किनारे सागौन के पेड़ का कटा हुआ ठूंठ मिला। पास ही सागौन का एक लट्ठा अर्जुन के पेड़ की जड़ों से रस्सी के सहारे बंधा मिला।

इसके बाद वन विभाग ने स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम सक्रिय कर इलाके की निगरानी बढ़ा दी। 26 अगस्त को सर्विलांस में दो संदिग्ध लोग सागौन के लट्ठे के आसपास गतिविधियां करते नजर आए। तकनीकी निगरानी और मैदानी जांच के बाद उनकी पहचान भोजलाल नागेश और गंगाराम विश्वकर्मा के रूप में हुई।

जांच में जो कहानी सामने आई, वह किसी ‘देसी वॉटरवे लॉजिस्टिक्स’ से कम नहीं थी। आरोपियों ने सागौन के लट्ठे को लकड़ी की अस्थायी बेड़ी यानी राफ्ट बनाकर उदंती नदी के बहाव के सहारे ओडिशा भेजने की योजना बनाई थी। यानी न ट्रक का खर्च, न टोल टैक्स की चिंता बस नदी का बहाव और तस्करी का जुगाड़ ।

ओडिशा में बैठा लॉजिस्टिक पार्टनर भी पकड़ाया

जांच आगे बढ़ी तो तस्करी नेटवर्क का कनेक्शन ओडिशा तक पहुंचा। वन विभाग के मुताबिक शोभाचंद्र नायक की भूमिका अंतरराज्यीय लकड़ी तस्करी नेटवर्क में सामने आई। गरियाबंद पुलिस की मदद से उसे ओडिशा से गिरफ्तार किया गया।

वन विभाग के अनुसार, आरोपी पर पहले भी वन अपराध से जुड़ा मामला था और वह वांटेड रह चुका था। जांच में उस पर छत्तीसगढ़ के लोगों को सागौन कटाई का कॉन्ट्रैक्ट देने और तस्करी के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट उपलब्ध कराने का आरोप सामने आया है।

वन विभाग के स्मार्ट सर्विलांस ने बिगाड़ दिया पूरा पुष्पा 2.0 प्लान

तस्करों ने शायद सोचा होगा कि जंगल के बीच नदी का रास्ता उनकी तस्करी का सबसे सुरक्षित रास्ता बनेगा। लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि इस बार ‘पुष्पा झुकेगा नहीं’ से पहले Smart Surveillance भी नहीं झुकेगा । भारी बारिश और मुश्किल मानसूनी परिस्थितियों के बावजूद टाइगर रिजर्व की पेट्रोलिंग टीम और स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम सक्रिय रहे। तकनीकी निगरानी, मैदानी सूचना और पुलिस के सहयोग से संदिग्ध गतिविधियों को चिन्हित कर आरोपियों तक पहुंच बनाई गई।

नदी में छिपा था सागौन, कानून की नजर से नहीं बच पाया

वन विभाग के अनुसार, मुख्य आरोपी के घर की तलाशी में आरा और चिरान की गई साल लकड़ी बरामद हुई, जबकि सागौन का लट्ठा नदी के भीतर छिपाया गया था। दूसरे आरोपी के कब्जे से संबंधित करीब 0.95 घनमीटर सागौन का लट्ठा नदी में छिपा मिला।

चूंकि मामला टाइगर रिजर्व के कोर एरिया से जुड़ा है, इसलिए आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 और भारतीय वन अधिनियम, 1927 की संबंधित धाराओं के तहत वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया है। आरोपियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, गरियाबंद के समक्ष पेश किया गया, जहां न्यायिक प्रक्रिया के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। फिलहाल तीन आरोपी जेल पहुंच चुके हैं और तीन अन्य फरार हैं। वन विभाग की टीमें उनकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। यानी सागौन को नदी के रास्ते ‘विदेश’ नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्य ओडिशा पहुंचाने का प्लान था लेकिन स्मार्ट निगरानी ने तस्करों की पूरी ‘नदी वाली डिलीवरी सर्विस’ बीच रास्ते ही बंद कर दी।

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