सिर्फ धान के भरोसे कितने दिन ? 12 साल पहले लिया एक फैसला, आज ग्राफ्टेड बैंगन ने बदल दी किसान कंदर्प नायक की तकदीर ।

Sangani

By Sangani

सिर्फ धान के भरोसे कितने दिन गरियाबंद के देवभोग विकासखंड के किसान कंदर्प नायक ने धान की पारंपरिक खेती छोड़कर ग्राफ्टेड बैंगन की आधुनिक खेती अपनाई। 12 साल पहले लिया गया यह फैसला आज लाखों किसानों के लिए प्रेरणा बन गया है। जानिए कैसे ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और आधुनिक तकनीक ने बदल दी उनकी आर्थिक स्थिति।

गरियाबंद खेती में कुछ नहीं रखा… यह वाक्य अक्सर सुनने को मिलता है। लेकिन गरियाबंद जिले के देवभोग विकासखंड के ग्राम करचिया के किसान कंदर्प नायक की कहानी इस सोच पर हल्क को दूर भी करती है और बड़ा जवाब भी देती है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि समस्या खेती में नहीं, बल्कि पुराने तरीके से खेती करने की सोच में है।
करीब 12 साल पहले तक कंदर्प नायक भी हजारों किसानों की तरह केवल धान की पारंपरिक खेती पर निर्भर थे। हर साल मेहनत भरपूर होती थी, लेकिन आमदनी इतनी नहीं कि परिवार की जरूरतें आसानी से पूरी हो सकें। बच्चों की पढ़ाई, घरेलू खर्च और खेती की बढ़ती लागत उनके लिए लगातार चुनौती बनी हुई थी। ऐसे समय में उन्होंने शिकायत करने के बजाय बदलाव का रास्ता चुना।

सिर्फ धान के भरोसे कितने दिन धान से हटकर आधुनिक खेती की ओर बढ़ाया कदम

उद्यानिकी विभाग के संपर्क में आने के बाद कंदर्प नायक ने आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी ली। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत उन्होंने ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और ग्राफ्टेड बैंगन की खेती शुरू की। शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन उन्होंने जोखिम लेने का साहस दिखाया।
आज वही फैसला उनकी सबसे बड़ी ताकत बन चुका है। आधुनिक तकनीक अपनाने से पानी की बचत हुई, पौधों में रोग कम लगे, उत्पादन बढ़ा और खेती की लागत भी नियंत्रित रही। परिणामस्वरूप उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और खेती अब उनके लिए सिर्फ गुजारे का साधन नहीं, बल्कि सम्मानजनक आय का माध्यम बन गई।

1 एकड़ की खेती बनी प्रेरणा की मिसाल

वर्तमान में कंदर्प नायक 1 एकड़ क्षेत्र में ग्राफ्टेड बैंगन की सफल खेती कर रहे हैं। उद्यानिकी विभाग द्वारा समय-समय पर दिए जाने वाले प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन ने उनकी खेती को और अधिक मजबूत बनाया है।
सबसे बड़ी बात यह है कि खेती से बढ़ी आय का लाभ केवल आर्थिक स्थिति तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने अपने बच्चे को आईसीएआर, नई दिल्ली में उच्च शिक्षा दिलाने का सपना भी साकार किया। यह उपलब्धि बताती है कि यदि खेती में वैज्ञानिक सोच और नई तकनीक जुड़ जाए तो खेत से निकलने वाली फसल भविष्य भी संवार सकती है।

खेती नहीं बदली, सोच बदल गई

अक्सर कहा जाता है कि खेती घाटे का सौदा है। लेकिन कंदर्प नायक की सफलता यह संदेश देती है कि घाटे का कारण हमेशा खेती नहीं होती, बल्कि कई बार पुराने तरीकों से चिपके रहना भी होता है।
उन्होंने धान की पारंपरिक खेती को पूरी तरह छोड़ने के बजाय आधुनिक उद्यानिकी को अपनाकर आय का नया रास्ता बनाया। यही कारण है कि आज उनकी कहानी आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।

उद्यानिकी विभाग की योजनाओं का मिला लाभ

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत उपलब्ध सुविधाओं और उद्यानिकी विभाग के तकनीकी सहयोग ने कंदर्प नायक की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी तकनीकों ने जल संरक्षण के साथ उत्पादन बढ़ाने में मदद की। विभाग का मानना है कि यदि अधिक किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाएं तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और मजबूत हो सकती है।
कंदर्प नायक की कहानी केवल एक किसान की सफलता नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि बदलते समय में खेती भी बदलनी होगी। आधुनिक तकनीक, सरकारी योजनाओं का सही उपयोग और सीखने की इच्छा हो तो खेत केवल अनाज ही नहीं, बेहतर भविष्य भी उगा सकते हैं।

यह भी पढ़ें..FIR दर्ज होते ही हाथों-हाथ मिलेगी कॉपी गरियाबंद पुलिस की नई डिजिटल व्यवस्था से बदलेगा थानों का पूरा सिस्टम

कृपया शेयर करें

लगातार सही खबर सबसे पहले जानने के लिए हमारे वाट्सअप ग्रुप से जुड़े

Join Now

Join Telegram

Join Now

error: Content is protected !!