करका के जंगल में 30 हजार पेड़ों का रहस्य, 35 हेक्टेयर वनभूमि पर अतिक्रमण, ड्रोन और सैटेलाइट से खुलेगा पूरा सच ।

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By Sangani

करका के जंगल में 30 हजार पेड़ों का रहस्य उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के करका क्षेत्र में 30 हजार पेड़-पौधों की कटाई का प्रारंभिक अनुमान, 35 हेक्टेयर वनभूमि पर अतिक्रमण और 1100 से ज्यादा पेड़ों पर गड्लिंग के बाद जांच तेज।

गरियाबंद उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के करका क्षेत्र से सामने आई वन कटाई और अतिक्रमण की तस्वीर ने जंगल की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग के प्रारंभिक आकलन में वर्ष 2016 से 2026 के बीच इस इलाके में करीब 30 हजार पेड़-पौधों की कटाई का अनुमान लगाया गया है। वहीं वर्तमान GPS आधारित जांच में करीब 35 हेक्टेयर वनभूमि पर अतिक्रमण सामने आया है। हालांकि अंतिम क्षेत्रफल DGPS ड्रोन मैपिंग पूरी होने के बाद तय किया जाएगा।

करका के जंगल में 30 हजार पेड़ों का रहस्य

करका के जंगल में 30 हजार पेड़ों का रहस्य 2006 में घना जंगल, 2017 के बाद बदलने लगी तस्वीर

करका क्षेत्र की कहानी केवल पेड़ों की कटाई तक सीमित नहीं है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व ने जंगल की पुरानी स्थिति को समझने के लिए ISRO की सैटेलाइट इमेजरी का अध्ययन किया है। विभाग के अनुसार वर्ष 2006 और 2012 की तस्वीरों में यहां घना वन दिखाई देता है। इसके बाद करीब 2017 से वन क्षेत्र के खुले क्षेत्र में बदलने के संकेत मिलने लगे।

बाद की सैटेलाइट तस्वीरों में भी वन क्षरण का क्रम दिखाई देने की बात विभाग ने कही है। इसी आधार पर मैदानी सत्यापन के साथ प्रारंभिक अनुमान लगाया गया है कि हजारों पेड़-पौधे काटे गए।

जंगल में पहुंचे अधिकारी तो मिले 1100 से ज्यादा पेड़ों पर निशान

22 सितंबर को वन विभाग की टीम ने करका क्षेत्र में निरीक्षण किया। इस दौरान 1100 से अधिक पेड़ों पर गड्लिंग और बड़ी संख्या में ताजा कटे पेड़ों के ठूंठ मिलने की जानकारी सामने आई।

अब विभाग GPS और DGPS आधारित ड्रोन मैपिंग के जरिए यह पता लगाने में जुटा है कि अतिक्रमण आखिर कितने क्षेत्र में फैला है और जंगल को कितना नुकसान हुआ है। इसके लिए ड्रोन इमेजरी, सैटेलाइट तस्वीरें, GPS/DGPS कोऑर्डिनेट्स, मैदानी फोटो और अन्य डिजिटल साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

पहले विस्थापन, फिर उसी इलाके में अतिक्रमण का आरोप

करका गांव का इतिहास भी इस पूरे मामले को और महत्वपूर्ण बनाता है। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार करका पहले वन ग्राम था और सोंढूर बांध के निर्माण के बाद 1980 के दशक में इसका विस्थापन किया गया था। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार गांव के 55 लोगों को मुआवजा दिया गया था।

इसके बावजूद बाद में वनभूमि पर दोबारा अतिक्रमण और कटाई की गतिविधियां सामने आने की बात विभाग ने कही है। वर्ष 2016 में भी करीब 22 हेक्टेयर वन क्षेत्र में कथित अतिक्रमण को लेकर 22 लोगों के खिलाफ वन अपराध प्रकरण दर्ज हुआ था। वर्ष 2023 में न्यायालय ने आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था।

जांच के दौरान 50-60 लोगों ने टीम को रोकने का आरोप

22 सितंबर के निरीक्षण के दौरान उप संचालक USTR के नेतृत्व में करीब 20-25 वन अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे थे। विभाग के अनुसार टीम ने एक व्यक्ति से कथित अतिक्रमित वनभूमि पर खेती को लेकर पूछताछ की।

इसके बाद जब टीम कथित अतिक्रमित क्षेत्र की ओर आगे बढ़ी तो करका गांव के करीब 50-60 लोगों द्वारा सरकारी कर्मचारियों को उनके कर्तव्य निर्वहन से रोकने और संबंधित व्यक्ति को मौके से ले जाने का आरोप लगाया गया। पूरी घटना की वीडियोग्राफी भी की गई है और वन विभाग ने इसे कानूनी कार्रवाई के लिए सुरक्षित रखा है।

नया वन अपराध प्रकरण दर्ज, अब डिजिटल सबूतों से जांच

घटना के बाद 23 सितंबर 2026 को POR क्रमांक 20/17 के तहत मुकेश मरकाम, केशनाथ उर्फ गोलू और अन्य के खिलाफ कथित वन अपराध के संबंध में प्रकरण दर्ज किया गया है।

विभाग यह भी जांच कर रहा है कि मामले से जुड़े कुछ लोगों को वर्ष 2015-16 में अन्य स्थानों पर वनाधिकार भूमि आवंटित की गई थी या नहीं। यदि रिकॉर्ड से इसकी पुष्टि होती है तो अतिरिक्त वनभूमि पर कब्जे के कानूनी पहलुओं की जांच की जाएगी।

सिर्फ जंगल नहीं, हाथियों के रास्ते पर भी असर

करका का वन क्षेत्र सामान्य जंगल भर नहीं है। विभाग के अनुसार यह महत्वपूर्ण वन्यजीव आवास और हाथियों के आवागमन वाले परिदृश्य का हिस्सा है। लगातार पेड़ों की कटाई और वनभूमि को कृषि क्षेत्र में बदलने से वन्यजीवों के आवास में विखंडन हो सकता है और पारंपरिक आवागमन मार्ग प्रभावित हो सकते हैं।

इसका असर आसपास के गांवों में मानव-हाथी संघर्ष की संभावनाओं पर भी पड़ सकता है।

65 फीसदी स्टाफ की कमी के बीच 1050 हेक्टेयर वनभूमि मुक्त

USTR के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में करीब 1,050 हेक्टेयर अतिक्रमित वन क्षेत्र को मुक्त कराया गया है। इसके लिए ड्रोन निगरानी, ISRO सैटेलाइट इमेजरी, GPS/DGPS मैपिंग और डिजिटल साक्ष्यों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

खास बात यह है कि रिजर्व में करीब 65 प्रतिशत फील्ड स्टाफ के पद रिक्त बताए गए हैं। इसके अलावा पिछले चार वर्षों में वन एवं वन्यजीव संरक्षण टीमों पर पांच गंभीर हमलों का भी विभाग ने उल्लेख किया है। इसके बावजूद अतिक्रमण और वन विनाश के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने की बात USTR ने कही है।

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