सरकारी दफ्तरों से थकी सड़क की फरियाद छत्तीसगढ़ के एक गांव में 21 साल से अधूरी सड़क को लेकर सरपंच और ग्रामीणों ने मां दंतेश्वरी के दरबार में अर्जी लगाई, दान पेटी में मिली सड़क की फरियाद ने खींचा ध्यान पढ़ें पूरी खबर पैरी टाईम्स पर।
गरियाबंद दंतेवाड़ा के डेंगलरास गांव के ग्रामीणों ने जब देख लिया कि 21 साल से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के दफ्तर में फाइलें सिर्फ धूल फांकती हैं, तो उन्होंने अपनी किस्मत का ताला सरकारी दफ्तर के बजाय मां दंतेश्वरी की दानपेटी में खोलने का फैसला किया। मंदिर की दानपेटी खुली तो नकदी के साथ एक ऐसी अर्जी निकली, जिसने सिस्टम के गाल पर करारा तमाचा जड़ दिया। अर्जी में श्रद्धालुओं ने भगवान से मन्नत मांगी है हे माता, अफसरों को सद्बुद्धि दो ताकि हमारे गांव की 4 किलोमीटर सड़क पूरी हो सके।

सरकारी दफ्तरों से थकी सड़क की फरियाद 21 साल से अब तो देवी मां ही बचाएं
कतियाररास से डेंगलरास तक की यह सड़क पिछले दो दशकों से विकास का इंतजार कर रही है। कागजों में तो सड़क फेस-वन के तहत WBM स्तर तक बन चुकी है, लेकिन धरातल पर हालत यह है कि बारिश आते ही सड़क दलदल में तब्दील हो जाती है। बीमार को अस्पताल ले जाना हो या राशन लाना, ग्रामीणों के लिए हर सफर एक जंग बन जाता है। सिस्टम का आलम यह है कि इंसान तो इंसान, अब शायद देवी मां को ही अवतार लेकर ठेकेदारों और इंजीनियरों से गिट्टी-अलकतरा बिछवाना पड़े।
नेताओं के पोस्टर और दफ्तरों के चक्कर बेनतीजा ।
ऐसा नहीं है कि ग्रामीणों ने लोकतांत्रिक तरीकों का इस्तेमाल नहीं किया। महीने भर पहले ही सरपंच और ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा के पोस्टर हाथों में थामकर PMGSY कार्यालय का घेराव किया था। लेकिन जब इन बड़े साहब लोगों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी, तो ग्रामीणों को समझ आ गया कि सरकारी मशीनरी से ज्यादा भरोसा दैवीय शक्ति पर ही किया जा सकता है।
मंदिर समिति ने नदी में विसर्जित की अर्जी, क्या जागेगा प्रशासन?
मां दंतेश्वरी मंदिर समिति ने दानपेटी से निकली इस अर्जी को पढ़ने के बाद धार्मिक परंपरा के अनुसार पवित्र नदी में विसर्जित तो कर दिया, लेकिन यह अर्जी अब पूरे बस्तर संभाग में प्रशासनिक नाकामी की जीती-जागती मिसाल बन चुकी है। अब देखना यह होगा कि माता रानी के दरबार में लगी इस गुहार के बाद लोक निर्माण विभाग और संबंधित अधिकारियों की नींद खुलती है या वे अब भी इसी इंतजार में हैं कि सड़क भी ऊपर से चमत्कार होकर अपने आप बन जाए।
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