गरियाबंद में पटाखों की दुकान भी VIP.. आम व्यापारियों के लिए गांधी मैदान, सत्ता पक्ष के रसूखदारों ने शहर के बीचों-बीच खोली दुकान ?

Sangani

By Sangani

गरियाबंद में पटाखों की दुकान गरियाबंद में गांधी मैदान के आदेश के बावजूद पोस्ट ऑफिस के पीछे पटाखा दुकान संचालित। क्या जिला प्रशासन करेगा कार्रवाई या होगी खानापूर्ति पढ़े पूरी ख़बर पैरी टाईम्स पर।

गरियाबंद गरियाबंद जिले में लगता है नियम-कानून भी हैसियत देखकर अपना रास्ता तय करते हैं। आम आदमी दुकान लगाए तो उसे फायर सेफ्टी से लेकर जीएसटी तक के नियम याद दिलाए जाते हैं, लेकिन अगर दुकान के पीछे राजनीतिक रसूख हो तो शायद नियमों की किताब खुद ही बंद हो जाती है। कम से कम जिला मुख्यालय में पोस्ट ऑफिस के पीछे संचालित हो रही पटाखा दुकान को देखकर तो कुछ ऐसा ही सवाल उठता है।

गरियाबंद में पटाखों की दुकान

गरियाबंद में पटाखों की दुकान , जिला प्रशासन का फरमान गांधी मैदान, लेकिन शहर के बीचों-बीच किसका शासन?

मामला दीपावली के दौरान पटाखा दुकानों के संचालन का है। जिला प्रशासन ने 4 नवंबर को बाकायदा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर स्पष्ट कर दिया कि गरियाबंद में पटाखा दुकानों का संचालन केवल गांधी मैदान में होगा। सघन और घनी आबादी वाले इलाकों में पटाखा दुकान लगाने की अनुमति नहीं है। आदेश बिल्कुल साफ है, नियम भी स्पष्ट हैं और सुरक्षा की चिंता भी जायज है। लेकिन लगता है कि इस आदेश की एक प्रति शहर के कुछ खास लोगों तक पहुंचना बाकी रह गई है।

क्योंकि जिला प्रशासन के इस आदेश के बावजूद पोस्ट ऑफिस के पीछे शहर के बीचों-बीच पटाखों की दुकान संचालित हो रही है। यहां भारी मात्रा में पटाखे रखकर खुलेआम बिक्री की जा रही है। अब सवाल यह है कि जब गांधी मैदान के अलावा कहीं दुकान लगाने की अनुमति नहीं है तो फिर यह दुकान किस नियम और किस अनुमति के तहत चल रही है? या फिर यहां प्रशासन के आदेश से ज्यादा किसी और का आदेश प्रभावी है?

आम व्यापारियों के लिए नियमों की पूरी किताब, कुछ दुकानों के लिए नियमों की छुट्टी?

दिलचस्प बात यह है कि गांधी मैदान में दुकान लगाने वाले छोटे व्यापारियों को फायर सेफ्टी, जीएसटी और दूसरे जरूरी नियमों का पालन करना पड़ रहा है। यानी आम व्यापारियों के लिए नियमों की पूरी किताब खुली हुई है, लेकिन शहर के बीचों-बीच दुकान संचालित करने वालों के मामले में लगता है कि किताब का पन्ना ही पलटना भूल गए हैं।

आखिर यह कैसा समान कानून है, जहां किसी को मैदान में जगह मिलती है तो किसी को शहर के बीचों-बीच अपनी दुकान सजाने की छूट? क्या प्रशासन के नियमों में भी कोई VIP श्रेणी है, जिसमें कुछ लोगों को विशेष छूट मिल जाती है?

पिछले साल भी उठी थी शिकायत, इस बार फिर वही कहानी

यह कोई नया मामला भी नहीं है। पिछले साल दीपावली के दौरान भी इसी दुकान को लेकर शिकायत की गई थी और समाचार पत्रों में प्रमुखता से खबर प्रकाशित हुई थी। इसके बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई। इस बार भी जिला प्रशासन के अधिकारियों से फोन पर संपर्क किया गया तो उनका कहना था कि घनी आबादी में पटाखा दुकान खोलने की कोई अनुमति नहीं दी गई है।

यानी प्रशासन की नजर में अनुमति नहीं है, लेकिन जमीन पर दुकान बदस्तूर संचालित है। इसे प्रशासनिक व्यवस्था की विडंबना कहें या नियमों के पालन का अनोखा मॉडल?

अब देखना है कार्रवाई होगी या सिर्फ कागजों पर चलेगा प्रशासन का डंडा!

अब देखना दिलचस्प होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में वास्तव में कोई ठोस कार्रवाई करता है या फिर कार्रवाई के नाम पर केवल दिखावे की खानापूर्ति करके अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है। क्योंकि मामला सिर्फ नियम तोड़ने का नहीं, बल्कि शहर की सुरक्षा का भी है। पटाखों के भंडारण और बिक्री में जरा सी लापरवाही बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

फिलहाल शहर के आम व्यापारियों के मन में एक सवाल जरूर है कि क्या गरियाबंद में नियम सबके लिए बराबर हैं या फिर कुछ लोगों के लिए नियमों में भी VIP व्यवस्था लागू है? अब प्रशासन को तय करना है कि कानून का डंडा रसूख देखकर चलेगा या नियमों के मुताबिक?

यह भी पढ़ें…गरियाबंद में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, हड़ताल पर गए कई पटवारी निलंबित, गिरदावरी और नक्शा-बटांकन में लापरवाही पड़ी भारी ।

कृपया शेयर करें

लगातार सही खबर सबसे पहले जानने के लिए हमारे वाट्सअप ग्रुप से जुड़े

Join Now

Join Telegram

Join Now

error: Content is protected !!