भाषा की दीवार तोड़कर न्याय तक पहुंची मासूम की आवाज गरियाबंद में हिंदी नहीं समझने वाली नाबालिग पीड़िता का गोंडी-हल्बी में बयान दर्ज हुआ,दुष्कर्म के मामले में सौतेले पिता को अभियोजन पक्ष ने दिलवाई आजीवन कारावास की सजा पढ़े पूरी ख़बर पैरी टाईम्स पर।
गरियाबंद न्याय की उम्मीद में उठी एक मासूम की आवाज के सामने भाषा की दीवार भी बाधा नहीं बन सकी। हिंदी न समझने और न बोल पाने वाली नाबालिग ने जब अपने साथ हुई ज्यादती की पीड़ा गोंडी और हल्बी भाषा में बयां की, तब उसकी बात समझने के लिए दो महिला अनुवादकों की मदद ली गई। उनकी सहायता से पीड़िता का बयान पुलिस और न्यायालय तक पहुंचा। आखिरकार मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन की प्रभावी पैरवी के आधार पर गरियाबंद की जिला एवं सत्र न्यायाधीश गंगा पटेल ने विशेष फास्ट ट्रैक अदालत ने आरोपी सौतेले पिता को उसके शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
एआई जनरेटेड प्रतीकात्मक इमेज

भाषा की दीवार तोड़कर न्याय तक पहुंची मासूम की आवाज हिंदी नहीं समझती थी पीड़िता, दो महिला अनुवादकों ने की मदद
मामले के अनुसार, पीड़िता के चचेरे भाई को एक दिन पड़ोसी ने फोन कर जानकारी दी कि बच्ची के साथ उसका सौतेला पिता मारपीट करता है। सूचना मिलते ही परिजन आरोपी के घर पहुंचे। वहां पीड़िता ने अपने साथ हो रही ज्यादती का खुलासा किया। उसने बताया कि आरोपी मारपीट और धमकी देकर उसके साथ जबरदस्ती गलत काम करता है। परिजनों ने बच्ची को अपने साथ ले जाने की कोशिश की, लेकिन आरोपी ने उसे ले जाने से मना कर दिया। इसके बाद अमलीपदर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई।
गोंडी और हल्बी भाषा में दर्ज हुए बयान, सामने आई एक साल की प्रताड़ना
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की और पीड़िता को आरोपी के घर से थाने लाकर पूछताछ की। लेकिन यहां एक बड़ी चुनौती सामने आई। पीड़िता हिंदी भाषा समझने और बोलने में सक्षम नहीं थी। ऐसे में उसकी पीड़ा और बयान को सही अर्थों में समझना जरूरी था। पुलिस ने गोंडी और हल्बी भाषा का ज्ञान रखने वाली दो महिला अनुवादकों की सहायता ली। उनके सहयोग से पीड़िता के बयान दर्ज कराए गए। पीड़िता ने बताया कि करीब एक वर्ष से आरोपी उसके साथ मारपीट कर दुष्कर्म करता था और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी देता था।
पड़ोसी की सूचना से खुला मामला, परिजनों की शिकायत पर अमलीपदर पुलिस ने की कार्रवाई
विशेष लोक अभियोजक हरि नारायण त्रिवेदी के अनुसार, पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार किया तथा न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अपराध प्रमाणित करने के लिए कुल 12 गवाहों के बयान कराए गए। अदालत ने पीड़िता और गवाहों के कथनों के साथ उम्र संबंधी रेडियोलॉजिकल जांच तथा चिकित्सा रिपोर्ट का भी परीक्षण किया।
12 गवाहों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने सुनाया फैसला
प्रकरण में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विशेष न्यायालय की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश गंगा पटेल ने आरोपी को दोषसिद्ध पाया। अदालत ने पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत उसे उसके शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि पीड़िता की भाषा को समझने के लिए अपनाई गई संवेदनशील प्रक्रिया ने मासूम की बात न्यायालय तक पहुंचाने में मदद की, अभियोजन पक्ष ने साबित किया कि न्याय कि पीड़ित की भाषा कोई भी हो, उसकी आवाज को सुनना और उसे न्याय दिलाने का रास्ता सुनिश्चित करना न्याय व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
यह भी पढ़ें….गरियाबंद के जंगलों की सुरक्षा का मॉडल बना देशभर की मिसाल, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार ।