नेताजी की पटाखा दुकान के आगे गरियाबंद कलेक्टर-एसडीएम नतमस्तक, शिकायत के 24 घंटे बाद भी कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा ।

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By Sangani

नेताजी की पटाखा दुकान के आगे गरियाबंद कलेक्टर-एसडीएम नतमस्तक गरियाबंद में घनी आबादी के बीच संचालित पटाखा दुकान पर शिकायत के लगभग 24 घंटे बाद भी कार्रवाई नहीं,गांधी मैदान के व्यापारियों ने प्रशासन के दोहरे मापदंड पर उठाए सवाल पढ़ें पूरी खबर पैरी टाईम्स पर

गरियाबंद लगता है गरियाबंद जिला प्रशासन के नियमों की भी अपनी अलग व्यवस्था है। आम व्यापारियों के लिए नियम सख्त हैं, गरीब और मजबूर लोगों के लिए कार्रवाई तत्काल है, लेकिन जब मामला किसी रसूखदार नेताजी के परिवार से जुड़ी पटाखा दुकान का हो तो शायद नियमों की फाइल भी मेज पर पहुंचकर आराम करने लगती है। शहर में कुछ ऐसा ही नजारा इन दिनों देखने को मिल रहा है। 3 दिन की दिवाली में घनी आबादी वाले इलाके में संचालित पटाखा दुकान को लेकर शिकायत हुए 22 घंटे से अधिक समय बीत चुका है, एसडीएम से लेकर कलेक्टर तक मामला पहुंच चुका है, लेकिन कार्रवाई अब तक नदारद है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर प्रशासन के हाथ किसके सामने बंधे हुए हैं?

नेताजी की पटाखा दुकान के आगे गरियाबंद कलेक्टर-एसडीएम नतमस्तक

नेताजी की पटाखा दुकान के आगे गरियाबंद कलेक्टर-एसडीएम नतमस्तक शिकायत के बाद भी कार्यवाही नहीं

दरअसल, दीपावली के मद्देनजर जिला प्रशासन ने 4 नवंबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया था कि गरियाबंद में पटाखा दुकानों का संचालन केवल गांधी मैदान में किया जाएगा। घनी आबादी वाले क्षेत्रों में पटाखा दुकान लगाने की अनुमति नहीं होने की बात भी कही गई थी। लेकिन प्रशासन के इन निर्देशों के बीच पोस्ट ऑफिस के पीछे शहर के बीचों-बीच एक पटाखा दुकान धड़ल्ले से संचालित होती दिखाई दे रही है। दुकान में भारी मात्रा में पटाखों का भंडारण और बिक्री किए जाने को लेकर सुरक्षा संबंधी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

गरियाबंद कलेक्टर और एसडीएम को फोन से शिकायत के बाद भी कार्यवाही नहीं

इस मामले को लेकर खबर प्रकाशित होने से पूर्व कलेक्टर रणबीर शर्मा और नोडल अधिकारी गरियाबंद एसडीएम तक शिकायत भी पहुंचाई गई, अधिकारियों ने फोन पर यह स्पष्ट किया था कि घनी आबादी वाले क्षेत्र में पटाखा दुकान संचालन की अनुमति नहीं दी गई है। इसके बावजूद शिकायत के 24 घंटे बाद भी दुकान पर कार्रवाई नहीं होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय स्तर पर इस दुकान को भाजपा नेता के परिवार से जुड़ा बताया जा रहा है। ऐसे में राजनीतिक रसूख के आरोपों ने पूरे मामले को और गरमा दिया है।

गांधी मैदान में नियमों की परीक्षा, शहर में नियमों की छुट्टी

इस पूरे मामले का सबसे दिलचस्प और दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह है कि गांधी मैदान में प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए छोटे-छोटे व्यापारी अपनी दुकानें लगाकर बैठे हैं। उन्हें फायर सेफ्टी सहित जरूरी औपचारिकताओं और नियमों का पालन करना पड़ रहा है। लेकिन शहर के बीचों-बीच संचालित दुकान पर कार्रवाई नहीं होने के आरोपों के बीच बाजार का गणित भी बिगड़ता नजर आ रहा है। गांधी मैदान के व्यापारियों का कहना है कि जब एक ही शहर में कुछ दुकानदारों को नियमों के दायरे में रखा जाएगा और कुछ को खुले बाजार में बिक्री का अवसर मिलता रहेगा तो बराबरी का कारोबार कैसे होगा? गांधी मैदान में दुकानदार ग्राहकों का इंतजार कर रहे हैं, जबकि शहर के बीचों-बीच स्थित दुकान पर भीड़ जुटने की बात सामने आ रही है।

गरीब की दुकान पर फुर्ती, रसूखदार के मामले में सुस्ती क्यों?

गरियाबंद की जनता अब यह जानना चाहती है कि प्रशासन की कार्रवाई का पैमाना आखिर क्या है? क्या नियमों का पालन केवल उन लोगों के लिए अनिवार्य है जिनके पास राजनीतिक पहुंच नहीं है? क्या किसी संभावित हादसे का खतरा भी दुकान संचालक की राजनीतिक पहचान देखकर तय होगा? मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से भी सवाल है कि क्या उनकी सरकार में प्रशासनिक नियम सभी नागरिकों और व्यापारियों पर समान रूप से लागू होते हैं या फिर राजनीतिक रसूख के आगे व्यवस्था का रुख बदल जाता है?

Pairi Times 24×7 की गरियाबंद के नागरिकों और व्यापारियों से अपील है

यदि भविष्य में नियमों का पालन नहीं करने के आरोप में आम लोगों या छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई होती है तो प्रशासन से यह सवाल जरूर पूछें कि जिस पटाखा दुकान की शिकायत पहले की गई थी, वहां कार्रवाई क्यों नहीं हुई? एसडीएम और कलेक्टर से पूछा जाना चाहिए कि जब घनी आबादी में पटाखा दुकान की अनुमति नहीं थी तो शिकायत के बावजूद कार्रवाई में देरी क्यों हुई?

आखिर प्रशासन को यह स्पष्ट करना ही होगा कि गरियाबंद में कानून का राज चलेगा या रसूख का? क्योंकि पटाखों में बारूद होना सामान्य बात है, लेकिन प्रशासनिक व्यवस्था में पक्षपात का बारूद भर जाए तो उसका विस्फोट कहीं ज्यादा खतरनाक हो सकता है।

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