गरियाबंद पुलिस की अनोखी पहल ने गर्मी की छुट्टियों में बच्चों के लिए लाइब्रेरी, कॉमिक्स और खेल सामग्री की शुरुआत की,मोबाइल-टीवी से दूर रखने की अनोखी पहल की हर तरफ चर्चा।
गरियाबंद एक तरफ जहां गर्मी की छुट्टियों में ज्यादातर बच्चे मोबाइल गेम, रील्स और टीवी की दुनिया में खोए नजर आते हैं, वहीं दूसरी तरफ गरियाबंद पुलिस ने बच्चों को मोबाइल जेल से बाहर निकालने के लिए एक दिलचस्प और सकारात्मक अभियान शुरू किया है। पुलिस लाइन स्थित लाइब्रेरी अब सिर्फ किताबों की अलमारी नहीं रही, बल्कि बच्चों के लिए कॉमिक्स क्लब और नॉलेज जोनबन चुकी है।
गरियाबंद पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर की पहल पर पुलिस कॉलोनी में रहने वाले बच्चों के लिए लाइब्रेरी में कॉमिक्स, ज्ञानवर्धक कहानियां और महापुरुषों की जीवनियां उपलब्ध कराई गई हैं। उद्देश्य साफ है बच्चों को मोबाइल और टीवी स्क्रीन से दूर कर पढ़ाई और रचनात्मक गतिविधियों की ओर जोड़ना।

गरियाबंद पुलिस की अनोखी पहल,मोबाइल छोड़ो, मैदान पकड़ो मिशन ने खींचा बच्चों का ध्यान
गरियाबंद पुलिस की यह पहल सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रही। बच्चों के शारीरिक विकास को ध्यान में रखते हुए खेल सामग्री भी वितरित की गई है। अब शाम होते ही पुलिस कॉलोनी में बच्चे मोबाइल स्क्रीन पर बैटल नहीं बल्कि मैदान में असली खेल खेलते दिखाई दे रहे हैं।
गरियाबंद वासियों का कहना है कि आज कल छुट्टियों में बच्चे घंटों मोबाइल में व्यस्त रहते थे, लेकिन अब कॉमिक्स पढ़ने और खेलकूद में हिस्सा लेने लगे हैं। इससे बच्चों में अनुशासन, टीम भावना और रचनात्मक सोच विकसित होगी।
पुलिस अधीक्षक बोले बचपन स्क्रीन में नहीं, संस्कारों में दिखना चाहिए
इस पहल पर पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर ने कहा कि पुलिस कर्मियों की ड्यूटी इतनी व्यस्त रहती है कि वे अपने बच्चों को पर्याप्त समय नहीं दे पाते। ऐसे में यह कोशिश की गई है कि बच्चों का समय सही दिशा में बीते और वे मोबाइल-टीवी की लत से दूर रहकर किताबों और खेलों से जुड़ें। उनका मानना है कि किताबें बच्चों को सोचने की ताकत देती हैं, जबकि खेल उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाते हैं।
पुलिस कॉलोनी में दिखा नई पीढ़ी सुधार अभियान का असर
गरियाबंद पुलिस की इस पहल की अब हर तरफ चर्चा हो रही है। परिजनों और बच्चों ने जिला पुलिस प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि यह कदम बच्चों के भविष्य के लिए बेहद जरूरी और प्रेरणादायक है