मुख्यमंत्री के स्वागत में पंचायतों की परेड..25 सौ लोगों की भीड़ जुटाने का सरकारी गणित, सचिवों पर मेहमाननवाज़ी मिशन का जिम्मा ।

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By Sangani

मुख्यमंत्री के स्वागत में पंचायतों की परेड गरियाबंद के पुलिस ग्राउंड में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रस्तावित कार्यक्रम के लिए फिंगेश्वर जनपद पंचायत ने 25 सौ लोगों को जुटाने का लक्ष्य तय किया है। पंचायत सचिवों को भीड़ लाने, बैठाने और नाश्ता तक सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

गरियाबंद जिले में 17 जून को प्रस्तावित मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के लोकार्पण एवं भूमिपूजन कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। लेकिन इस बार चर्चा मंच, भाषण या विकास कार्यों की नहीं, बल्कि उन सरकारी कर्मचारियों की हो रही है जिन्हें कार्यक्रम में भीड़ जुटाने का जिम्मा सौंपा गया है। जनपद पंचायत फिंगेश्वर द्वारा जारी आदेश के अनुसार विभिन्न ग्राम पंचायतों के सचिवों और कर्मचारियों को वाहन प्रभारी बनाकर गांवों से लोगों को कार्यक्रम स्थल तक लाने, बैठाने और कार्यक्रम समाप्त होने के बाद वापस पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है। इतना ही नहीं, आदेश में आगंतुकों के लिए पानी और नाश्ता पैकेट की व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया है।

मुख्यमंत्री के स्वागत में पंचायतों की परेड

मुख्यमंत्री के स्वागत में पंचायतों की परेड,विकास का कार्यक्रम या भीड़ प्रबंधन का महाअभियान ?

आदेश में कुल 71 ग्राम पंचायतों से लोगों को लाने की व्यवस्था बनाई गई है। कहीं 30 तो कहीं 50 प्रतिभागियों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। दस्तावेज के अनुसार कार्यक्रम में लगभग 25 सौ लोगों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है गांवों में वर्षों से लंबित समस्याओं पर लोगों को इकट्ठा करना कठिन होता है, लेकिन जब बात वीआईपी कार्यक्रम की हो तो पूरा प्रशासनिक अमला सक्रिय हो जाता है। सचिव से लेकर तकनीकी सहायक और डेटा एंट्री ऑपरेटर तक सबकी ड्यूटी तय कर दी जाती है।

लोकतंत्र में भीड़ का महत्व या भीड़ में लोकतंत्र?

राजनीतिक कार्यक्रमों में भीड़ हमेशा शक्ति प्रदर्शन का माध्यम रही है। हालांकि प्रशासनिक दस्तावेज में इसे सफल आयोजन की तैयारी कहा गया है, लेकिन सवाल यह भी उठता है कि क्या सरकारी कर्मचारियों का मूल कार्य अब विकास योजनाओं के साथ-साथ भीड़ प्रबंधन भी बनता जा रहा है? ग्रामीणों को कार्यक्रम तक पहुंचाने के लिए अलग-अलग प्रभारी अधिकारी नियुक्त किए गए हैं और चेक पोस्ट तक बनाए गए हैं ताकि आने वाले वाहनों और लोगों की एंट्री दर्ज की जा सके।

मुख्यमंत्री आएंगे, तो भीड़ भी आएगी… और भीड़ लाने की जिम्मेदारी किसकी

कहते हैं कि लोकतंत्र में जनता सबसे बड़ी ताकत होती है। लेकिन गरियाबंद के इस आदेश को देखकर लगता है कि जनता को ताकत बनाने के लिए पहले उसे बसों में बैठाकर कार्यक्रम स्थल तक पहुंचाना भी जरूरी है। अब देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री के भाषण से ज्यादा चर्चा विकास कार्यों की होती है या फिर उन 25 सौ कुर्सियों की, जिन्हें भरने के लिए पूरा तंत्र मैदान में उतर चुका है।

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