बारुला होली घटना कांड में नया मोड़,रसूख की आड़ में पुलिस पर दबाव बना रहे शराब तस्कर भोजराम नेताम का काला सच आया सामने,जानें कैसे 15 साल की शराबबंदी वाले गांव में नशे का जाल बिछाया गया और क्यों अब पुलिस प्रशासन को निशाना बनाया जा रहा है। देखिए आरोपियों की पूरी क्राइम कुंडली ।
गरियाबंद बारुला गाँव में होली के दिन हुए विवाद के बाद अब गरियाबंद पुलिस प्रशासन एक अजीबोगरीब चुनौती का सामना कर रहा है। एक तरफ पुलिस ने वायरल ऑडियो पर तत्परता दिखाते हुए महज 24 घंटे के भीतर अपने तेज तर्रार माने जाने वाले एसआई को सस्पेंड किया और एडिशनल एसपी पर भी कार्यवाही कर अनुशासन की मिसाल पेश की, तो दूसरी तरफ अब इस कार्रवाई को हथियार बनाकर कुछ सफेदपोश तत्व पुलिस पर दबाव बनाने की कोशिश में जुट गए हैं।
पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू छत्तीसगढ़ युवा क्रांति सेना के जिला अध्यक्ष भोजराम नेताम की सक्रियता है। ग्रामीणों और शिकायतकर्ता सोहन ध्रुव (जनपद अध्यक्ष) के अनुसार, यह विवाद न्याय का नहीं बल्कि वर्चस्व और पुराने काले कारनामों को छिपाने का है। आरोप है कि भोजराम नेताम अपने ऊपर हुई शराब बिक्री की पुरानी कार्यवाही को लेकर संगठन के पद का इस्तेमाल कर पुलिस प्रशासन पर अनैतिक दबाव बना रहे हैं

बारुला होली घटना कांड आदर्श गांव में नशे का कारोबार 15 साल की मर्यादा पर भारी पड़ा रसूख
बारुला गांव की कहानी किसी समय जिले के लिए गर्व का विषय थी, जहाँ 2008 से 2023 तक ग्रामीणों ने एकजुट होकर पूर्ण शराबबंदी लागू रखी थी। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि भोजराम नेताम ने गांव की इस मर्यादा को खंडित किया और लगातार अवैध शराब का कारोबार किया। इसी तस्करी को लेकर भोजराम का गांव वालों से कई बार विवाद भी हो चुका है। पुलिस रिकॉर्ड तस्दीक करते हैं कि भोजराम और उनके परिवार पर शराब तस्करी के 6 अलग-अलग मामले दर्ज हैं। जानकारों का कहना है कि अब इसी आपराधिक छवि को धोने और पुलिस को बैकफुट पर लाने के लिए वायरल ऑडियो मामले का सहारा लेकर थाना प्रभारी को हटाने का बेवजह दबाव बनाया जा रहा है।
क्राइम प्रोफाइल रिकॉर्ड में दर्ज है आरोपियों की कुंडली
पुलिस द्वारा जारी रिकॉर्ड के अनुसार, जो लोग आज पुलिस प्रशासन को घेर रहे हैं, उन पर पहले से ही कई गंभीर मामले दर्ज हैं । भोजराम नेताम संगठन के पद की आड़ में सक्रिय भोजराम और उनके भाइयों पर 6 मामले गरियाबंद थाने में दर्ज है उन पर मारपीट, धमकाने (धारा 296, 115(2) 351 BNS) और शांति भंग करने (धारा 170, 126,135(3) BNSS) के गंभीर मामले दर्ज हैं। गुलाब और कौशल नेताम (भाई) इनके विरुद्ध आबकारी एक्ट की धारा 36(C) और 34(2) के तहत अवैध शराब तस्करी के आधा दर्जन मामले दर्ज हैं, जो इनके व्यापारिक संलिप्तता को दर्शाते हैं।
दो पक्षों की आपसी लड़ाई में पुलिस प्रशासन बना रहे दबाव ?
कुल मिलाकर बारुला का मामला अब दो पक्षों के झगड़े से निकलकर अपराध बनाम कानून की जंग बन चुका है। जहाँ गरियाबंद पुलिस ने अपने अधिकारियों पर गाज गिराकर निष्पक्षता दिखाई है, वहीं अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन स्वयंभू नेताओं के दबाव में झुकता है या कानून का राज कायम रखता है।