चीतल शिकार मामला तीर-धनुष से जंगल का डिनर,चीतल का शिकार कर पकाई सब्जी, लेकिन वन विभाग की टीना ने बिगाड़ दिया पूरा स्वाद ।

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By Sangani

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के अमाड़ गांव में चीतल के शिकार का बड़ा खुलासा,एंटी पोचिंग टीम ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर मांस, तीर-धनुष और अन्य शिकार सामग्री जब्त की।

गरियाबंद उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के घने जंगलों में वन्यजीवों की सुरक्षा को चुनौती देने वाले शिकारियों पर वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। गुप्त सूचना के आधार पर एंटी पोचिंग टीम ने ग्राम अमाड़ में दबिश देकर चीतल के शिकार का खुलासा किया और दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जंगल में शिकार करने वालों की चालाकी अब ज्यादा दिन नहीं चलने वाली।

एंटी पोचिंग टीम को सूचना के बाद कार्रवाई


जानकारी के अनुसार 21 जून 2026 को एंटी पोचिंग टीम को सूचना मिली थी कि अमाड़ क्षेत्र में वन्यप्राणी का शिकार किया गया है। सूचना मिलते ही उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की टीम, डॉग स्क्वाड और वन परिक्षेत्र उत्तर उदंती (मैनपुर) के कर्मचारियों ने संयुक्त कार्रवाई शुरू की। तलाशी के दौरान नरेश कुमार भुंजिया और बालाराम सोरी के घरों से चीतल के मांस की सब्जी, खून से सने तीर, खरगोश फंदे, मयूर पंख, बाज पंख, धनुष और अन्य शिकार सामग्री बरामद की गई।

पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया जुर्म


पूछताछ में आरोपी नरेश कुमार ने स्वीकार किया कि उसने 17 जून को तारीपानी घाट क्षेत्र में तीर-धनुष से चीतल का शिकार किया था। इसके बाद वन विभाग की टीम आरोपियों को घटनास्थल लेकर गई और पूरे घटनाक्रम की पुष्टि की।
वन विभाग ने दोनों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर उन्हें जिला एवं अपर सत्र न्यायालय गरियाबंद में पेश किया। जब्त किए गए मांस के नमूनों को फोरेंसिक जांच के लिए स्कूल ऑफ वाइल्डलाइफ फोरेंसिक एंड हेल्थ, जबलपुर भेजा गया है।

अधिकारियों के साथ टीना की भूमिका भी रही अहम


इस कार्रवाई में एंटी पोचिंग टीम के नोडल अधिकारी गोपाल कश्यप, परिक्षेत्र अधिकारी ज्योति ध्रुव, परिक्षेत्र सहायक पुनाराम साहू सहित वन विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। डॉग स्क्वाड की सदस्य टीना ने भी जांच और साक्ष्य जुटाने में अहम योगदान दिया।
वन विभाग की इस कार्रवाई को उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में बड़ी सफलता माना जा रहा है। जंगल के बेजुबान जीवों पर निशाना साधने वालों के लिए यह कार्रवाई एक कड़ा संदेश है कि अब शिकार का खेल छिपाना आसान नहीं होगा।

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