बधाई हो अब राजिम के तालाब में भी प्लॉट बनेंगे गरियाबंद के राजिम में कृषि भूमि पर अवैध प्लाटिंग का बड़ा खेल सामने आया है। केतकी तालाब के बाद अब दानी तालाब और सरकारी सिंचाई नहर तक पाटकर कॉलोनी बसाने के आरोप लगे हैं। कलेक्टर भगवान सिंह उइके तक शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं पढ़ें पूरी खबर पैरी टाईम्स पर।
गरियाबंद जिले के धार्मिक नगर राजिम, जिसे छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहा जाता है, इन दिनों किसी और वजह से चर्चा में है। यहां अब आस्था से ज्यादा अवैध प्लाटिंग का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। हालात ऐसे हैं कि कृषि भूमि को कॉलोनी में बदलने की होड़ में तालाब और सरकारी सिंचाई नहर तक सुरक्षित नहीं बची है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भू-माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि सरकारी संपत्तियों पर भी बुलडोजर चलाने से उन्हें कोई डर नहीं है। अगर यही रफ्तार रही तो आने वाले दिनों में शायद राजिम के तालाबों का नाम भी लेक व्यू कॉलोनी और नहरों का नाम मुख्य सड़क रख दिया जाए।

बधाई हो अब राजिम के तालाब में भी प्लॉट बनेंगे केतकी तालाब के बाद अब दानी तालाब भी निशाने पर
स्थानीय शिकायतकर्ता ने केतकी तालाब की पटाई का वीडियो साक्ष्य लेकर कलेक्टर तक शिकायत पहुंचाई। आरोप है कि इसके बावजूद तालाब पाटने वालों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब लोगों का कहना है कि भू-माफियाओं की नजर दानी तालाब पर है, जिसे धीरे-धीरे मिट्टी डालकर खत्म करने की कोशिश की जा रही है।नगरवासियों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाली पीढ़ियां शायद नक्शों में तालाब ढूंढती नजर आएंगी।
सरकारी नहर भी बनी कॉलोनी का रास्ता
राजिम-गरियाबंद मार्ग पर हाईवे किनारे कृषि भूमि पर पहले से विकसित की जा रही कृष्णा नगर कॉलोनी के बाद अब उसका दूसरा चरण तैयार किया जा रहा है। आरोप है कि इसके लिए सरकारी सिंचाई नहर तक को पाटकर रास्ता बना दिया गया है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस नहर से किसानों की फसलें सिंचित होनी थीं, वह अब प्लॉट खरीदारों के लिए प्रवेश मार्ग कैसे बन गई?
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन भी बेअसर?
जलाशयों और सरकारी भूमि की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट कई बार स्पष्ट दिशा-निर्देश दे चुका है। इसके बावजूद यदि तालाबों और नहरों पर अतिक्रमण जारी है तो यह केवल पर्यावरण का ही नहीं बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था का भी गंभीर प्रश्न बनता जा रहा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि धार्मिक नगरी राजिम में ही जल स्रोतों की यह स्थिति है तो अन्य क्षेत्रों में हालात का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
राजनीतिक संरक्षण के आरोप, प्रशासन पर उठ रहे सवाल
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि प्रभावशाली राजनीतिक संरक्षण मिलने के कारण अवैध प्लाटिंग का कारोबार बेखौफ जारी है। यही वजह है कि शिकायतें होने के बाद भी कार्रवाई जमीन पर दिखाई नहीं देती।हालांकि जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि पहले भी कार्रवाई की जा चुकी है और आवश्यक कदम उठाए गए हैं। लेकिन लगातार सामने आ रहे नए मामलों ने प्रशासन के दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या बोले स्थानीय लोग?
शिकायतकर्ता नेतराम धृतलहरे ने आरोप लगाया कि तालाबों की लगातार पटाई की जा रही है और शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही।वहीं पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष पवन सोनकर ने भी इस पूरे मामले में प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि सार्वजनिक जल स्रोतों और सरकारी संपत्तियों को बचाना शासन और प्रशासन की जिम्मेदारी है।
सवालों के घेरे में प्रशासन कलेक्टर तक शिकायत पहुंची, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं?
केतकी तालाब की पटाई का वीडियो और अन्य साक्ष्य लेकर शिकायतकर्ता ने कलेक्टर भगवान सिंह उइके से शिकायत की थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायत के बावजूद तालाब पाटने वालों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब केतकी तालाब के बाद दानी तालाब और सरकारी सिंचाई नहर पर भी अतिक्रमण के आरोप लग रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब शिकायत और सबूत पहले से प्रशासन के पास थे, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई? नगरवासियों का कहना है कि यदि पहली शिकायत पर सख्ती दिखाई जाती, तो आज भू-माफियाओं के हौसले इतने बुलंद नहीं होते।
अब सबसे बड़ा सवाल…
राजिम की पहचान उसके मंदिरों, त्रिवेणी संगम और जल स्रोतों से रही है। यदि यही तालाब और नहरें अवैध प्लाटिंग की भेंट चढ़ती रहीं तो आने वाले समय में इतिहास पढ़ाने के लिए सिर्फ तस्वीरें बचेंगी और जमीन पर प्लॉट।अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में केवल पुराने कार्रवाई के रिकॉर्ड गिनाता रहेगा या फिर अवैध प्लाटिंग के इस खेल पर वास्तव में बुलडोजर चलाएगा।